रेलवे के लिए कबाड़ सिर्फ बेकार सामान नहीं बल्कि मोटी कमाई का जरिया बनता जा रहा है.भारतीय रेलवे के 'जीरो स्क्रैप मिशन' के तहत उत्तर रेलवे के जम्मू डिवीजन ने बेकार पड़े सामान और कबाड़ को ठिकाने लगाने का बड़ा अभियान शुरू किया है.इसेक जरिये पुराने और इस्तेमाल से बाहर हो चुके सामान की बिक्री से रेलवे अच्छी कमाई कर रहा है. पहले ही ई-ऑक्शन में रेलवे ने 1049 मीट्रिक टन स्क्रैप बेच दिया. इससे रेलवे को करोड़ों रुपये की कमाई हुई है.
रेलवे समय-समय पर अपने पुराने और काम में नहीं आने वाले सामान को ई-ऑक्शन के जरिए बेचता है. इसमें लोहे का सामान, पुराने पार्ट्स और दूसरे तरह का स्क्रैप शामिल होता है. इस बिक्री से रेलवे को आमदनी होती है और कबाड़ के लिए जगह खाली करने में भी मदद मिलती है.
कबाड़ की ई-नीलामी से कमाई
रेलवे के पास बड़ी मात्रा में ऐसा सामान जमा होता रहता है, जिसका इस्तेमाल अब नहीं किया जा सकता. पुराने रेल पार्ट्स, मेटल से जुड़ा सामान और दूसरे बिना इस्तेमाल वाले सामान को स्क्रैप के तौर पर नीलाम किया जाता है.इस बार हुई पहली ई-नीलामी में ही 1049 मीट्रिक टन स्क्रैप बेचा गया. इसकी बिक्री से रेलवे को करोड़ों रुपये मिले हैं. रेलवे की इस तरह की नीलामी में कारोबारी और कबाड़ खरीदने वाले लोग हिस्सा ले सकते हैं.
17, 22 और 28 सितंबर को आप भी ले सकते हैं हिस्सा
रेलवे से स्क्रैप खरीदने के इस मौके का फायदा उठाना चाहते हैं, तो आपको अभी मौका मिलने वाला है. रेलवे की अगली ई-नीलामी 17, 22 और 28 सितंबर को होने वाली है. नई-ऑक्शन में पुरानी गाड़ियां, बेकार मशीनरी, ऑफिस फर्नीचर और पटरियों सहित अलग-अलग तरह का स्क्रैप बिक्री के लिए रखा जा सकता है. इच्छुक खरीदार रेलवे की ई-नीलामी प्रक्रिया के तहत बोली लगा सकते हैं.
रेलवे के लिए डबल फायदा
पुराने सामान की बिक्री से रेलवे को सीधे तौर पर कमाई होती है. साथ ही रेलवे परिसरों में लंबे समय से पड़े कबाड़ को हटाने में भी मदद मिलती है.हालांकि, रेलवे के लिए स्क्रैप बिक्री कोई नई बात नहीं है. हर साल बड़ी मात्रा में पुराने सामान की नीलामी की जाती है. इसकी वजह से रेलवे को अतिरिक्त आमदनी मिलती है और बेकार पड़े सामान का बेहतर इस्तेमाल भी हो जाता है.
कबाड़ के पैसों से चमकेंगे स्टेशन,यात्रियों के लिए सुविधाएं
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, स्क्रैप की बिक्री से मिलने वाले रेवेन्यू का बड़ा हिस्सा सीधे यात्रियों की सहूलियत पर खर्च होगा. रेलवे स्टेशनों के रीडेवलपमेंट, पटरियों की मरम्मत, सिग्नलिंग और सुरक्षा संबंधी ढांचों को मजबूत करने के साथ-साथ प्लेटफॉर्म और ट्रेनों में आम लोगों के लिए नागरिक सुविधाएं बढ़ाने में इसका इस्तेमाल किया जाएगा.
कबाड़ का बिजनेस करने वालों के लिए खास है मौका
रेलवे से निकलने वाले स्क्रैप की मात्रा काफी ज्यादा हो सकती है. यही वजह है कि कबाड़ का कारोबार करने वाले लोगों की इसमें दिलचस्पी रहती है. ई-नीलामी के जरिए प्रक्रिया को रेलवे के आधिकारिक ई-ऑक्शन पोर्टल पर ऑनलाइन रखा जाता है, जिससे खरीदार बोली में हिस्सा ले सकते हैं. ऐसे में स्क्रैप बिजनेस से जुड़े लोगों के लिए आने वाले दिनों में खरीदारी का एक और मौका रहेगा.
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