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Bonus Calculation: सरकारी कर्मचारियों के बोनस पर झटका, रक्षा मंत्रालय की TCL ने 18.56 दिन का PLB ही किया मंजूर, कितना नुकसान?

Bonus Announcement: रक्षा मंत्रालय के अंडर काम करने वाले TCL के कर्मचारियों के लिए 18.56 दिनों के बराबर बोनस देने का ऐलान किया गया है. इसे कर्मचारी नुकसान के तौर पर देख रहे हैं, जबकि संगठन इसे नाकाफी बता रहा. यहां समझिए बोनस का पूरा गणित. 

Bonus Calculation: सरकारी कर्मचारियों के बोनस पर झटका, रक्षा मंत्रालय की TCL ने 18.56 दिन का PLB ही किया मंजूर, कितना नुकसान?
TCL ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए सिविलियन कर्मचारियों को 18.56 दिनों का Productivity Linked Bonus मंजूर किया है.
NDTV इंडिया ग्राफिक्‍स

Govt Employees Bonus Calculation: त्‍यौहारों से पहले हर कर्मचारी को बोनस का इंतजार रहता है. सरकारी हों या प्राइवेट, दोनों ही तरह की संस्‍था, कंपनी अपने कर्मचारियों के लिए तय करती हैं कि इस साल कितने दिन की सैलरी के बराबर बोनस दिया जाएगा. इसी क्रम में रक्षा मंत्रालय (Defense Ministry) के अंडर काम करने वाली कंपनी TCL यानी ट्रूप कम्फर्ट्स लिमिटेड ने साल 2025-26 के लिए 18.56 दिनों के बराबर बोनस देने का ऐलान किया है. ऐसे में AINPSEF ने 30 से 41 दिनों की बजाय मात्र 18.56 दिनों के बोनस को सिविलियन कर्मचारियों के लिए झटका बताया है. 

त्‍यौहारों से पहले इतने कम दिन के PLB यानी प्रोडक्टिविटी लिंक्‍ड बोनस के इस ऐलान के बाद TCL के कर्मचारियों के बीच निराशा भी बताई जा रही है. कर्मचारियों की चिंता इस बात को लेकर है कि पहले ऑर्डिनेंस फैक्ट्रियों में काम करने वाले इन्हीं कर्मचारियों को इससे ज्यादा दिनों का PLB मिलता था. 

AINPSEF के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ मंजीत सिंह पटेल के मुताबिक, पहले कर्मचारियों को आमतौर पर 30 से 41 दिन या उससे ज्यादा का PLB मिलता था. एक और बुरी खबर, डॉ पटेल इसे भी बता रहे हैं कि बोनस का कैलकुलेशन 7,000 रुपये की अधिकतम सीलिंग को मानकर किया जा रहा है. 

18.56 दिन के बोनस का कैलकुलेशन 

TCL के आदेश के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 के लिए Group-B (Non-Gazetted) और Group-C कर्मचारियों को 18.56 दिनों की मजदूरी के बराबर PLB दिया जाएगा.

  • बोनस की गणना के लिए औसतन 30.4 दिन प्रति महीने का आधार लिया गया है. इसके साथ ही बोनस के लिए 7,000 रुपये प्रति महीने की अधिकतम सीलिंग लागू रहेगी.
  • यानी अगर किसी कर्मचारी की वास्तविक मासिक मजदूरी 7,000 रुपये से ज्यादा है, तो भी PLB की गणना अधिकतम 7,000 रुपये की सीमा पर होगी.
  • इस हिसाब से 18.56 दिन के बोनस की रकम करीब 4,274 रुपये बैठती है.

पहले 41 दिन तक का मिलता था बोनस

AINPSEF के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ पटेल के मुताबिक, TCL के गठन से पहले जब ऑर्डिनेंस फैक्ट्रियां सीधे रक्षा मंत्रालय के अधीन ऑर्डिनेंस फैक्ट्री बोर्ड यानी OFB के जरिए सरकारी विभाग के तौर पर काम करती थीं, तब सिविल कर्मचारियों को PLB के तहत 41 दिनों या उससे ज्यादा का बोनस मिलता था.

  • उनके मुताबिक, आमतौर पर ये बोनस 30 से 41 दिनों के बीच रहता था.
  • उस समय भी बोनस की सीलिंग 7,000 रुपये थी. लेकिन ज्यादा दिनों के बोनस के कारण 41 दिन के हिसाब से मिलने वाली रकम करीब 9,441 रुपये बैठती है.
  • वहीं 18.56 दिन के हिसाब से ये रकम करीब 4,274 रुपये है.
  • इस तरह 41 दिन और 18.56 दिन की तुलना करें तो अंतर करीब 5,167 रुपये का बनता है.

डॉ पटेल के हिसाब से कर्मचारियों को ये करीब 5,000 रुपये का नुकसान है. उन्‍होंने कहा कि करीब 4,200 रुपये में कर्मचारियों की दीवाली भला क्‍या ही दीवाली होगी! 

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निगमीकरण के बाद बदला बोनस का गणित

डॉ पटेल का कहना है कि ऑर्डिनेंस फैक्ट्रियों के निगमीकरण के बाद इन्हें कॉरपोरेट डिफेंस पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग यानी कॉरपोरेट DPSU के तौर पर संचालित किया जा रहा है. इसके साथ प्रोडक्टिविटी और बोनस तय करने के तरीके में भी बदलाव आया है.

उनका कहना है कि पहले जहां कर्मचारियों को ज्यादा दिनों का PLB मिलता था, अब ये अवधि घटकर 18.56 दिन रह गई है. इससे कर्मचारियों को मिलने वाली बोनस राशि में कमी आई है.

उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि निगमीकरण का उद्देश्य कंपनियों से ज्यादा राजस्व जुटाना और उन्हें बेहतर प्रदर्शन करने वाली इकाइयों में बदलना था. ऐसे में कर्मचारियों के बोनस में कमी चिंता का विषय है.

ये लेटर देख लीजिए 

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सिर्फ TCL तक सीमित नहीं है मामला

डॉ. पटेल का कहना है कि TCL में बोनस के दिनों में हुई कमी को व्यापक बदलाव के तौर पर देखा जाना चाहिए. उनके मुताबिक, ऑर्डिनेंस फैक्ट्रियों के निगमीकरण के बाद कर्मचारियों के सामने इस तरह की चुनौतियां बढ़ी हैं.

उन्होंने चितरंजन लोकोमोटिव वर्क्स यानी CLW का उदाहरण देते हुए कहा कि पहले वहां भारी इंजन बनाने का काम बड़े स्तर पर होता था. उनके अनुसार, अब इंजन निर्माण की जगह पुर्जों की असेंबलिंग पर ज्यादा जोर है.

AINPSEF अध्यक्ष ने दावा किया कि अगर देश के बड़े उत्पादन केंद्रों में निर्माण क्षमता और तकनीकी कौशल कमजोर होता है, तो लंबे समय में भारत की आयात पर निर्भरता बढ़ सकती है. उन्होंने इसी को निगमीकरण और निजीकरण के विरोध का आधार बताया है. 

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