
बजट 2017 : अरुण जेटली के टैक्स संबंधी ऐलानों से कुछ पहले जानें किस टैक्स के क्या मायने...(प्रतीकात्मक फोटो)
नई दिल्ली:
इस साल 1 फरवरी को पेश किए जाने वाले आम बजट (Union Budget) को लेकर आम आदमी की उम्मीदें अधिक हैं. सबसे अधिक अपेक्षाएं इनकम टैक्स के मोर्च पर लगाई जा रही हैं और कयास भी हैं कि सरकार इनकम टैक्स में छूट की सीमा ढाई लाख रुपए से चार लाख तक कर सकती है. चलिए आज तमाम प्रकार के टैक्स के बारे में विस्तार से बात करें. कितने प्रकार के टैक्स होते हैं और कौन सा टैक्स किस दायरे में आता है, इस पर एक नजर डालने के लिए नीचे स्क्रोल करें.
इसी के साथ आपको बता दें कि देश में जुलाई से गुड्स एंड सर्विस टैक्स (GST) जोकि एक अप्रत्यक्ष कर है, लागू किए जाने की बात कही गई है. जीएसटी के तहत वस्तुओं और सेवाओं पर एक समान टैक्स लगाया जाता है. इस टैक्स के लागू हो जाने के बाद किसी भी सामान और सेवा पर सिर्फ एक टैक्स लगेगा, यानी कि वैट, एक्साइज और सर्विस टैक्स जैसे टैक्स खत्म हो जाएंगे.
टैक्स (कर) दो प्रकार के होते हैं. पहला, प्रत्यक्ष कर यानी डायरेक्ट टैक्स और दूसरा, अप्रत्यक्ष कर यानी इनडायरेक्ट टैक्स. आय कर (इनकम टैक्स) और निगम कर (कॉरपोरेट टैक्स) प्रत्यक्ष कर के दायरे में आते हैं. जबकि केंद्रीय उत्पाद शुल्क (एक्साइज ड्यूटी), सीमा शुल्क (कस्टम ड्यूटी) और सेवा कर (सर्विस टैक्स) अप्रत्यक्ष कर के दायरे में आते हैं.
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ब्लॉग पढ़ें- नोटबंदी की नाकामी से परेशान दिखेगा बजट : पार्ट 2
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इनकम टैक्स (Income tax) वह कर है जो सरकार लोगों की आय पर लगाती है. यह प्रायः एक खास सीमा से अधिक आय वालों द्वारा अदा किया जाता है. मौजूदा इनकम टैक्स सिस्टम के मुताबिक, ढाई लाख रुपए सालाना आमदनी वाले लोगों को कोई टैक्स नहीं देना पड़ता. 2.5 लाख रुपए से ज्यादा और 5 लाख रुपए तक की आमदनी पर 10 फीसदी तक टैक्स देना होता है. 5 लाख रुपए से ज्यादा और 10 लाख रुपए तक की आमदनी पर 20 फीसदी टैक्स देना होता है. वहीं जिनकी सालाना आय 10 लाख रुपए से ज्यादा है, उन्हें 30 फीसदी टैक्स देना होता है
कॉरपोरेट टैक्स ( Corporate Tax) वह टैक्स है जो कंपनियों पर लगता है. यह प्राइवेट, लिमिटेड, लिस्टेड, अनलिस्टेड सभी तरह की कंपनियों पर लगता है. कॉरपोरेट टैक्स कंपनियों की आय पर लगता है. कॉरपोरेट टैक्स अधिकतम 30 फीसदी होता है. कहा जा रहा है कि आगामी बजट में इसे घटाकर 25 फीसदी किया जा सकता है. वैसे कॉरपोरेट टैक्स पर अलग से सेस और सरचार्ज लगाए जा सकते हैं. यदि आप सोच रहे हैं कि इस टैक्स का आम आदमी से क्या लेना देना है तो बता दें कि जब आप किसी किसी कंपनी का शेयर खरीदते हैं या म्यूचुअल फंड्स (MF) के जरिए उसमें पैसा लगाते हैं तो उस शेयर या एमएफ पर जो डिविडेंड यानी लाभांश मिलता है, उसी से कमाई होती है. मगर कंपनियां जो लाभांश देती हैं उसमें से वह तमाम टैक्स आदि खर्चे काट लेने के बाद ही देती हैं. ऐसे में यदि कॉरपोरेट टैक्स कम होगा तो आपको डिविडेंड अधिक मिलेगा.
कैपिटल गेन टैक्स (Capital Gains Tax) वह टैक्स है जिसके तहत आपकी संपत्ति, शेयर, बॉन्ड्स या महंगी वस्तुओं को बेचे जाने पर होने वाले नफे पर टैक्स देना होता है. केंद्रीय उत्पाद शुल्क (Excise Duty) दरअसल उन चीजों पर लगता है जो देश में बनती हैं. यह अप्रत्यक्ष कर के दायरे में आता है. यह बिक्री कर और वैट (VAT)जैसे अन्य करों से इतर वस्तुओं पर लगाया जाता है. ज्यादातर राज्य सरकारें वस्तुओं और सेवाओं पर वैल्यू एडेड टैक्स (Value Added Tax) भी लगाती हैं. VAT की दर अलग-अलग राज्यों में अलग अलग है. बिक्री कर (Sales Tax) वह कर है जो सरकार किसी भी सामान या सेवा की खरीद-फरोख्त पर वसूलती है. वैसे देश के ज्यादातर राज्यों मे अब बिक्री कर की जगह वैट ने ले ली है.
सेवाओं पर लगने वाले टैक्स को सर्विस टैक्स (Service Tax) कहा जाता है और यह भी अप्रत्यक्ष कर का हिस्सा होता है. अभी भारत में व्यक्ति को हर सेवा पर 15 फीसदी सर्विस टैक्स देना पड़ता है. वहीं, एक टैक्स होता है जो भारत में विदेश से आयात होकर आने वाले सामानों पर सरकार लगाती है जिसे कस्मट ड्यूटी (Custom duty) कहा जाता है.
आपने सुना होगा मनोरंजन कर (Entertainment Tax) के बारे में. यह टैक्स राज्य सरकारें फिल्मों के प्रदर्शन पर, प्रदर्शनियों पर, डीटीएच सेवाओं पर और केबल सर्विस पर लगाती हैं. मगर, यह वसूला एक प्रकार से ग्राहकों से ही जाता है. वहीं, तोहफे पर भी टैक्स लगता है. यानी, अगर आपको साल भर में कुल 50,000 रुपए की कीमत से ज्यादा का गिफ्ट मिलता है तो उस पर आपको गिफ्ट टैक्स (Gift Tax) देना होगा.
एक शहर से दूसरे शहर जाने पर सड़कों और पुलों के इस्तेमाल के एवज़ में जो टैक्स आप चुकाते हैं, उसे टोल टैक्स (Toll Tax) कहते हैं. वहीं आपकी प्रॉपर्टी, मकान पर टैक्स आपको चुकाना होता है जो नगर निगम द्वारा वसूला जाता है. इसे प्रॉपर्टी टैक्स (Property Tax) कहते हैं. यह हर शहर में अलग अलग होता है. अगर आप संपत्ति खरीदते हैं तो अपने राज्य की सरकार को स्टॉम्प ड्यूटी (Stamp Duty) भी चुकाते हैं. नगर निगम द्वारा प्रफेशनल्स की कमाई पर जो टैक्स वसूला जाता है, उसे प्रफेशनल टैक्स (Professional Tax) कहा जाता है.
इसी के साथ आपको बता दें कि देश में जुलाई से गुड्स एंड सर्विस टैक्स (GST) जोकि एक अप्रत्यक्ष कर है, लागू किए जाने की बात कही गई है. जीएसटी के तहत वस्तुओं और सेवाओं पर एक समान टैक्स लगाया जाता है. इस टैक्स के लागू हो जाने के बाद किसी भी सामान और सेवा पर सिर्फ एक टैक्स लगेगा, यानी कि वैट, एक्साइज और सर्विस टैक्स जैसे टैक्स खत्म हो जाएंगे.
टैक्स (कर) दो प्रकार के होते हैं. पहला, प्रत्यक्ष कर यानी डायरेक्ट टैक्स और दूसरा, अप्रत्यक्ष कर यानी इनडायरेक्ट टैक्स. आय कर (इनकम टैक्स) और निगम कर (कॉरपोरेट टैक्स) प्रत्यक्ष कर के दायरे में आते हैं. जबकि केंद्रीय उत्पाद शुल्क (एक्साइज ड्यूटी), सीमा शुल्क (कस्टम ड्यूटी) और सेवा कर (सर्विस टैक्स) अप्रत्यक्ष कर के दायरे में आते हैं.
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इनकम टैक्स (Income tax) वह कर है जो सरकार लोगों की आय पर लगाती है. यह प्रायः एक खास सीमा से अधिक आय वालों द्वारा अदा किया जाता है. मौजूदा इनकम टैक्स सिस्टम के मुताबिक, ढाई लाख रुपए सालाना आमदनी वाले लोगों को कोई टैक्स नहीं देना पड़ता. 2.5 लाख रुपए से ज्यादा और 5 लाख रुपए तक की आमदनी पर 10 फीसदी तक टैक्स देना होता है. 5 लाख रुपए से ज्यादा और 10 लाख रुपए तक की आमदनी पर 20 फीसदी टैक्स देना होता है. वहीं जिनकी सालाना आय 10 लाख रुपए से ज्यादा है, उन्हें 30 फीसदी टैक्स देना होता है
कॉरपोरेट टैक्स ( Corporate Tax) वह टैक्स है जो कंपनियों पर लगता है. यह प्राइवेट, लिमिटेड, लिस्टेड, अनलिस्टेड सभी तरह की कंपनियों पर लगता है. कॉरपोरेट टैक्स कंपनियों की आय पर लगता है. कॉरपोरेट टैक्स अधिकतम 30 फीसदी होता है. कहा जा रहा है कि आगामी बजट में इसे घटाकर 25 फीसदी किया जा सकता है. वैसे कॉरपोरेट टैक्स पर अलग से सेस और सरचार्ज लगाए जा सकते हैं. यदि आप सोच रहे हैं कि इस टैक्स का आम आदमी से क्या लेना देना है तो बता दें कि जब आप किसी किसी कंपनी का शेयर खरीदते हैं या म्यूचुअल फंड्स (MF) के जरिए उसमें पैसा लगाते हैं तो उस शेयर या एमएफ पर जो डिविडेंड यानी लाभांश मिलता है, उसी से कमाई होती है. मगर कंपनियां जो लाभांश देती हैं उसमें से वह तमाम टैक्स आदि खर्चे काट लेने के बाद ही देती हैं. ऐसे में यदि कॉरपोरेट टैक्स कम होगा तो आपको डिविडेंड अधिक मिलेगा.
कैपिटल गेन टैक्स (Capital Gains Tax) वह टैक्स है जिसके तहत आपकी संपत्ति, शेयर, बॉन्ड्स या महंगी वस्तुओं को बेचे जाने पर होने वाले नफे पर टैक्स देना होता है. केंद्रीय उत्पाद शुल्क (Excise Duty) दरअसल उन चीजों पर लगता है जो देश में बनती हैं. यह अप्रत्यक्ष कर के दायरे में आता है. यह बिक्री कर और वैट (VAT)जैसे अन्य करों से इतर वस्तुओं पर लगाया जाता है. ज्यादातर राज्य सरकारें वस्तुओं और सेवाओं पर वैल्यू एडेड टैक्स (Value Added Tax) भी लगाती हैं. VAT की दर अलग-अलग राज्यों में अलग अलग है. बिक्री कर (Sales Tax) वह कर है जो सरकार किसी भी सामान या सेवा की खरीद-फरोख्त पर वसूलती है. वैसे देश के ज्यादातर राज्यों मे अब बिक्री कर की जगह वैट ने ले ली है.
सेवाओं पर लगने वाले टैक्स को सर्विस टैक्स (Service Tax) कहा जाता है और यह भी अप्रत्यक्ष कर का हिस्सा होता है. अभी भारत में व्यक्ति को हर सेवा पर 15 फीसदी सर्विस टैक्स देना पड़ता है. वहीं, एक टैक्स होता है जो भारत में विदेश से आयात होकर आने वाले सामानों पर सरकार लगाती है जिसे कस्मट ड्यूटी (Custom duty) कहा जाता है.
आपने सुना होगा मनोरंजन कर (Entertainment Tax) के बारे में. यह टैक्स राज्य सरकारें फिल्मों के प्रदर्शन पर, प्रदर्शनियों पर, डीटीएच सेवाओं पर और केबल सर्विस पर लगाती हैं. मगर, यह वसूला एक प्रकार से ग्राहकों से ही जाता है. वहीं, तोहफे पर भी टैक्स लगता है. यानी, अगर आपको साल भर में कुल 50,000 रुपए की कीमत से ज्यादा का गिफ्ट मिलता है तो उस पर आपको गिफ्ट टैक्स (Gift Tax) देना होगा.
एक शहर से दूसरे शहर जाने पर सड़कों और पुलों के इस्तेमाल के एवज़ में जो टैक्स आप चुकाते हैं, उसे टोल टैक्स (Toll Tax) कहते हैं. वहीं आपकी प्रॉपर्टी, मकान पर टैक्स आपको चुकाना होता है जो नगर निगम द्वारा वसूला जाता है. इसे प्रॉपर्टी टैक्स (Property Tax) कहते हैं. यह हर शहर में अलग अलग होता है. अगर आप संपत्ति खरीदते हैं तो अपने राज्य की सरकार को स्टॉम्प ड्यूटी (Stamp Duty) भी चुकाते हैं. नगर निगम द्वारा प्रफेशनल्स की कमाई पर जो टैक्स वसूला जाता है, उसे प्रफेशनल टैक्स (Professional Tax) कहा जाता है.
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