टॉक्सिक फिल्म का काफी लंबे समय से मुझे इंतजार था. हो भी क्यों नहीं. यश जैसे धांसू एक्शन स्टार की फिल्म जो आ रही थी. फिर ये भी दिमाग में चल रहा था कि आखिर प्रशांत नील की केजीएफ के बाद यश क्या नया करेंगे. फिर गीतू मोहनदास की फिल्में जैसे लायर्स डाइस और मुथॉन की वजह से क्यूरोसिटी सातवें आसमान पर थी कि 500 करोड़ के बजट के साथ वो क्या चमत्कार करने जा रहे हैं. अब सुबह 10 बजे का शो देखने सिनेमा हॉल में पहुंचा तो वहां Gen Z दर्शक अच्छी खासी संख्या में थे. अमूमन मॉर्निंग शो में इस तरह की भीड़ कम ही देखने को मिलती है. लेकिन लग रहा था कि टॉक्सिक है, यश है और फिर फिल्म को लेकर हाइप है तो कुछ बड़ा होने वाला है.
कियारा आडवाणी की अजीबोगरीब एक्टिंग
अब जैसे ही टॉक्सिक शुरू हुई तो मैंने तो फिंगर क्रॉस कर ली क्योंकि यश की मेहनत की वजह से मैं चाहता था फिल्म चले. शुरुआत अच्छे नोट पर हुई. लेकिन कियारा आडवाणी की अजीबोगरीब एक्टिंग ने पहला झटका दिया. उसके बाद यश आया और छा गया. लेकिन उसके बाद जो सिलसिला शुरू हुआ तो ऐसा लगा कि किसी रेलगाड़ी को बिना पटरी के सड़क पर दौड़ाया जा रहा हो. फिल्म में कैरेक्टर आ रहे थे, गोलियां चल रही थी, यश की स्टार पावर का इस्तेमाल किया जा रहा था.
कैसा था सिनेमाघर के अंदर का हाल
लेकिन हॉल में सन्नाटा पसरा था. सिनेमाघर में दर्शक अपने मोबाइलों में व्यस्त थे. बहुत कम का ही ध्यान परदे की ओर जा रहा था. वहीं सिनेमा के परदे पर यश लगा हुआ था दुश्मनों का सफाया करने में. लेकिन ना तो इसमें वीर रस था और ना ही रौद्र रस का ही कोई टच और जिस तरह का श्रृंगार रस दिखाया गया, वो भी बेअसर था. इस तरह तीन घंटे से ज्यादा की इस फिल्म में दर्शक पूरी तरह ऊंघते नजर आए.
मैं थक चुका था, ये सारा वॉयलेंस और फिल्म को देखकर हैरत में था कि कोई किस तरह 500 करोड़ रुपये को यूं फूंक सकता है. रिलीज से पहले क्या इन लोगों ने फिल्म नहीं देखी थी. ना कोई कहानी, ना कोई ढंग का गाना, ना कोई सॉलिड कैरेक्टराइजेशन और फिर साउथ की फिल्में जिन तालीमार सीन के लिए फेमस होती हैं, उनका ना आना. उकताते और सोचते हुए आखिरकार किसी तरह फिल्म खत्म हुई.
'इससे अच्छी तो वेलकम टू द जंगल ही थी...'
टॉक्सिक के खत्म होते ही सभी दर्शक दरवाजे की ओर भागे क्योंकि इसका दूसरा पार्ट नहीं आएगा ये तो पहले ही साफ हो चुका था. अगर आने की झलक दिखाई भी जाती तो शायद ही कोई दर्शक रुकता. जैसे ही मैं जाने के लिए उठा तो जो मैंने सुना, उसे सुनकर यश के लिए काफी दुख हुआ. ये कोई 22-23 साल का Gen Z दर्शक हंसते हुए तेज आवाज में कह रहा था, 'इससे अच्छी तो वेलकम टू द जंगल ही थी...'
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