ट्यूलिप जोशी उन अभिनेत्रियों में गिनी जाती हैं जिनकी बॉलीवुड में एंट्री एक खास संयोग से हुई थी. हालांकि उनका ट्रैक रिकॉर्ड देखकर ऐसा लगता है कि यह फैसला उनके लिए कुछ खास नहीं रहा. यूं भी कहा जा सकता है कि उनके लिए ग्लैमर इंडस्ट्री की राह एक फायदेमंद कदम नहीं रहा. 2002 में जब वह पहली बार बड़े पर्दे पर नजर आईं तो उनके सामने यशराज फिल्म्स जैसा बड़ा बैनर था और फिल्म थी 'मेरे यार की शादी है'. नई एक्ट्रेस के लिए इससे बेहतर शुरुआत और क्या हो सकती है. फिल्म में उनके साथ उदय चोपड़ा, जिम्मी शेरगिल और बिपाशा बसु जैसे कलाकार थे. ट्यूलिप की मासूमियत और सादगी भरे अंदाज ने लोगों का ध्यान खींचा. लेकिन इस डेब्यू के पीछे की कहानी और भी दिलचस्प है, क्योंकि ट्यूलिप खुद फिल्म इंडस्ट्री में आने की योजना नहीं बना रही थीं. एक शादी में जाना उनके लिए ऐसा मोड़ लेकर आया, जिसने उनकी पूरी जिंदगी की दिशा बदल दी.
ट्यूलिप जोशी का जन्म 11 सितंबर 1979 को मुंबई में हुआ था. उनके पिता गुजराती हिंदू थे, जबकि उनकी मां अर्मेनियाई-लेबनीज क्रिश्चियन थीं. पढ़ाई पूरी करने के बाद ट्यूलिप ने साल 2000 में फेमिना मिस इंडिया प्रतियोगिता में हिस्सा लिया. वह इस प्रतियोगिता की विजेता नहीं बनीं, लेकिन मॉडलिंग की दुनिया में उनके लिए रास्ते खुलने लगे. उस समय उनका सपना एक्ट्रेस बनना नहीं था. उन्होंने खुद एक इंटरव्यू में बताया था कि वह स्पोर्ट्स में करियर बनाना चाहती थीं.
ट्यूलिप की जिंदगी का सबसे बड़ा मोड़ तब आया, जब वह एक शादी में शामिल होने गई थीं. यह शादी फिल्ममेकर आदित्य चोपड़ा और पायल खन्ना की थी. ट्यूलिप वहां लड़की वालों की तरफ से शामिल हुई थीं. शादी में उनकी पर्सनैलिटी पर आदित्य चोपड़ा की नजर पड़ी. इसके बाद उन्हें फिल्म के लिए स्क्रीन टेस्ट देने का मौका मिला. ट्यूलिप ने भी बिना ज्यादा सोचे ऑडिशन दिया और उनका सेलेक्शन हो गया. इस तरह उन्हें सीधे यशराज फिल्म्स के बड़े बैनर के साथ काम करने का मौका मिला.
साल 2002 में 'मेरे यार की शादी है' रिलीज हुई. फिल्म में ट्यूलिप के साथ उदय चोपड़ा मुख्य भूमिका में थे. फिल्म ने उन्हें नई पहचान दी. बताया जाता है कि फिल्म में अपनी लाइन्स हिंदी में बोलने में उन्हें परेशानी होती थी, इसलिए उन्होंने हिंदी की ट्यूशन ली थी.
पहली फिल्म की सफलता के बाद ट्यूलिप 'दिल मांगे मोर' में शाहिद कपूर और आयशा टाकिया के साथ नजर आईं. इसके बाद उन्होंने 'मातृभूमि: ए नेशन विदाउट वीमेन' जैसी गंभीर फिल्म की, जिसमें उन्होंने कल्कि का किरदार निभाया. फिल्म में उनके काम को काफी सराहना मिली और अलग-अलग फिल्म फेस्टिवल में सम्मान भी मिला. ट्यूलिप ने बाद में खुद कहा था कि 'मातृभूमि' के बाद उन्होंने खुद में एक कलाकार के तौर पर बदलाव महसूस किया.
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ट्यूलिप का सफर सिर्फ हिंदी फिल्मों तक सीमित नहीं रहा. उन्होंने तेलुगु, मलयालम, कन्नड़ और पंजाबी फिल्मों में भी काम किया. वह 'मिशन 90 डेज', 'धोखा', 'सुपरस्टार', 'डैडी कूल', 'रनवे', 'बच्चन', 'जट्ट एयरवेज' और 'जय हो' जैसी फिल्मों में नजर आईं. उन्होंने टीवी पर भी काम किया और 'एयरलाइंस' में पायलट का किरदार निभाया. उनका आखिरी प्रमुख फिल्मी दौर 2010 के दशक में रहा और 'जय हो' में वह कैमियो में दिखाई दीं. इसके बाद उन्होंने धीरे-धीरे फिल्मों से दूरी बना ली. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, वह बिजनेस वूमेन और वैदिक एस्ट्रोलॉजी के तौर पर काम कर रही हैं.
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