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बच्चे के जन्म की खुशी में आज भी गूंजता है ये 65 साल पुराना गाना, मां बनने के सुख को करता है बयां

बच्चे के जन्म की खुशी में हर मां अपने बच्चे के लिए आज भी गाती है 65 साल पुराना ये गाना. लता मंगेशकर, गीत दत्त और वसंत देसाई के इस सदाबहार गीत से जुड़े दिलचस्प किस्से.

बच्चे के जन्म की खुशी में आज भी गूंजता है ये 65 साल पुराना गाना, मां बनने के सुख को करता है बयां
हर मां अपने बच्चे के जन्म पर गाती है ये गाना
नई दिल्ली:

घर मे बच्चे के जन्म की खुशी बेहद खास होती है. जब घर में नन्हा मेहमान आता है तो इसके साथ खुशियां, बधाइयां और गीत-संगीत का दौर भी शुरू हो जाता है. बॉलीवुड में भी बच्चे के जन्म को लेकर के कई गाने बने हैं, जो आज भी याद किए जाते हैं. इन्हीं में से एक है 1961 में आई फिल्म प्यार की 'प्यार की प्यास' 'मेरे अंगना में उजियाला, मेरी गोदी में गोपाला'. ये गीत मां बनने की खुशी और बच्चे के लिए प्यार और ममता को बखूबी दर्शाता है. इसके बोल भारत व्यास ने लिखे थे, जबकि संगीत वसंत देसाई का था

बच्चे के जन्म की खुशी में बना गाना

'मेरे अंगना में उजियाला' गाने के बोल ऐसे लिखे गए हैं कि इस गीत को सुनते ही मां की खुशी का एहसास हो जाता है. गाने में गीत में बच्चे को गोपाल यानी कृष्ण के रूप में देखते हुए उसकी सुंदरता और मासूमियत को बताया गया है. गाने की लाइन मेरी गोदी में गोपाला बच्चे के जन्म के बाद मां की खुशी को जाहिर करती है. इसके साथ ही गाने में बच्चे को नजर से बचाने की प्रार्थना भी की गई है. यही वजह है कि ये सिर्फ एक गीत नहीं, बल्कि मां के उस असीम प्रेम को भी दिखाता है जो उसे बच्चे से होता है.  ये गीत भारतीय परिवारों में बच्चे के जन्म के बाद गाए जाने वाले पारंपरिक बधाई गीतों की याद भी दिलाता है. गाने को लता मंगेशकर और गीता दत्त ने अपनी आवाज से सजाया था.

वसंत देसाई और भारत व्यास के बोल और संगीत

इस गाने को परफेक्ट बनाने में इसके संगीत और शब्दों की अहम भूमिका है. इस गाने का संगीत वसंत देसाई ने तैयार किया था और भारत व्यास ने इसके खूबसूरत बोल लिखे थे. दोनों की जोड़ी ने गीत को ऐसा भाव दिया, जिसमें खुशी के साथ भारतीय संस्कारों और कृष्ण भक्ति की झलक भी दिखाई देती है. इस गीत को लता मंगेशकर और गीता दत्त ने अपनी आवाज से और खास बना दिया.

फिल्म की कहानी

'मेरे अंगना में उजियाला' फिल्म 'प्यार की प्यास' का हिस्सा था.  ये फिल्म साल1961 में आई थी इसका निर्देशन महेश कौल ने किया था. फिल्म में श्रीकांत, निशी, मनमोहन कृष्ण, डेविड, मनोरमा और हनी ईरानी जैसे कलाकारों ने अभिनय किया था. कहानी एक अनाथ बच्ची गीता के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसे एक परिवार गोद लेता है, लेकिन बाद में परिवार में बच्चे के जन्म के बाद चीजें पूरी तरह से बदल जाती हैं. फिल्म को 1961 में हिंदी की तीसरी सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म के लिए सर्टिफिकेट ऑफ मेरिट भी मिला था. 

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मां की गोद में आए बच्चे को कृष्ण का रूप मानकर उसकी खुशी मनाने वाला यह गीत 60 साल से ज्यादा समय बाद भी जन्म और मातृत्व की खुशी को बयां करने वाला यादगार गीत बना हुआ है.

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