हिंदी सिनेमा और भारतीय शादियों का अटूट बंधन है. चाहे दूल्हा-दुल्हन की ड्रेस हो, लेडी संगीत, हल्दी या मेहंदी की रस्म, हर मौका अपने आप से बॉलीवुडमय हो जाता है. फिर शादियों में हर रस्म के लिए गाने हैं, जो इस खास मौके की रौनक को और भी बढ़ा देते हैं. बॉलीवुड में कई ऐसे गाने बने हैं, जिनके बिना शादी अधूरी होती है. सगाई, हल्दी से लेकर शादी और फेरों तक कई गाने हैं जो शादी को बेहद खास बना देते हैं. हम आज ऐसे ही एक गाने के बारे में बताने जा रहे हैं, जो 38 साल पुराना है, लेकिन आज भी शादी में बारातियों की जान बना हुआ है. इस गाने में वेटरन एक्ट्रेस मंदाकिनी (Mandakini) नजर आई थीं.
शादियों में इस गाने पर बराती जमकर डांस करते हैं. 80 के दशक स्टार एक्ट्रेस मंदाकिनी ने अपने हुस्न से लोगों को अपना दीवाना बना दिया था. उस दौर में उन्होंने कई फिल्मों में काम किया. इनमें से एक फिल्म है जीते हैं शान से (Jeete Hain Shaan Se). यह फिल्म साल 1988 में रिलीज हुई थी.
मंदाकिनी ने फिल्म में कमाल का डांस किया है. फिल्म के जिस गाने की हम बात कर रहे हैं, वह है जूली जूली... (Julie Julie). इस गाने में मंदाकिनी के साथ डिस्को डांसर मिथुन चकवर्ती नजर आए थे. रिलीज के 38 साल बाद शादी हो या पार्टी, हर जगह यह गाना बजाया जाता है.
कविता कृष्णमूर्ति की आवाज में कल्ट, गोविंदा, संजय दत्त और मिथुन चकवर्ती साथ आए थे नजर
जूली जूली गाने को अनु मलिक (Anu Malik) और कविता कृष्णमूर्ति ने गाया है. गाने के संगीतकार भी अनु थे. वहीं इसके लिरिक्स मशहूर गीतकार इन्दीवर ने लिखा था. फिल्म जीते हैं शान से में गोविंदा, संजय दत्त और मिथुन चकवर्ती एक साथ पहली बार किसी फिल्म में साथ दिखे थे. तीनों ने शानदार अभिनय किया था और फिल्म हिट हुई थी.
फिल्म की कहानी
जॉनी, गोविंदा और इकबाल तीन दोस्त हैं जो मुंबई के एक छोटे से कस्बे में रहते हैं. वे मिलकर अपने समुदाय के जरूरतमंद लोगों की मदद करते हैं. इसी वजह से वे स्थानीय गुंडे डीके, जिसे पहले बलवंत के नाम से जाना जाता था. उसकी नजर में आ जाते हैं. गोविंदा की मां के देहांत से एक दुखद घटना घटती है. अंतिम संस्कार में गोविंदा की मुलाकात अपने पिता, एडवोकेट वर्मा से होती है, जो वर्षों से लापता थे. इसके कुछ ही समय बाद एक पुलिस इंस्पेक्टर जॉनी को उसकी जैविक मां, मैरी से मिलवाता है.
जॉनी को पता चलता है कि अतीत में उसकी मां पर हुए अत्याचारों के पीछे एडवोकेट वर्मा का हाथ था. न्याय के लिए जॉनी वर्मा का सामना करता है, जिससे गोविंदा के साथ उसका टकराव शुरू हो जाता है, जो अपने पिता का बचाव करता है. जॉनी और गोविंदा के बीच बढ़ती दरार उनकी कभी मजबूत रही दोस्ती को खतरे में डाल देती है, जिससे डीके को उनके बीच के मतभेद का फायदा उठाकर अपने स्वार्थ को साधने का मौका मिल जाता है. इस कलह के बीच, इकबाल जॉनी और गोविंदा के बीच सुलह कराने का बीड़ा उठाता है. वह डीके की योजनाओं को विफल करने तथा उनके रिश्ते को बनाए रखने का प्रयास करता है.
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