39 साल पहले दूरदर्शन पर एक ऐसा सीरियल प्रसारित हुआ था, जिसने उस दौर के युवाओं को समाज की एक गंभीर समस्या से रूबरू कराया. जब टेलीविजन पर रामायण और महाभारत जैसे पौराणिक धारावाहिकों का बोलबाला था, तब ‘सुबह' ने ड्रग्स की लत जैसे संवेदनशील विषय को कहानी का हिस्सा बनाया. शो ने दिखाया कि किस तरह गलत संगत और नशे की शुरुआत एक मासूम जिंदगी को पूरी तरह बदल सकती है. इस सीरियल की कहानी जितनी असरदार थी, उसका टाइटल सॉन्ग भी उतना ही यादगार बना. आरडी बर्मन यानी पंचम दा की आवाज में गाया गया यह गीत लोगों के बीच खूब लोकप्रिय हुआ और शो की पहचान बन गया.
युवाओं को आईना दिखाता था ‘सुबह'
‘सुबह' साल 1986 से 1987 के बीच दूरदर्शन पर टेलीकास्ट हुआ था. इस धारावाहिक का निर्देशन भारत रंगाचारी ने किया था. इसकी कहानी तमिल लेखिका शिवसंकारी के उपन्यास ‘अवन' से प्रेरित थी. अपने समय के हिसाब से यह बेहद अलग विषय पर बनाया गया सीरियल था. इसमें उस दौर के युवाओं के बीच बढ़ती नशे की समस्या को सीधे और गंभीर तरीके से दिखाया गया था. कहानी मनोरंजन के साथ एक जरूरी सामाजिक संदेश भी देती थी.
एक दोस्ती ने बदल दी नौजवान की जिंदगी
सीरियल की कहानी एक ऐसे युवा के इर्द-गिर्द घूमती है, जो कॉलेज की पढ़ाई शुरू करता है. इसी दौरान उसकी मुलाकात भरत नाम के एक युवक से होती है. भरत खुद ड्रग्स की गिरफ्त में होता है और धीरे-धीरे उसकी संगत का असर नए लड़के पर भी पड़ता है. शुरुआत में जो चीज महज दोस्ती और जिज्ञासा लगती है, वही आगे चलकर उसकी जिंदगी की सबसे बड़ी परेशानी बन जाती है. भरत का किरदार अभिनेता सलीम घोष ने निभाया था. उनके अभिनय ने इस किरदार को बेहद प्रभावशाली बना दिया था.
पंचम दा के गीत ने छोड़ी अलग छाप
‘सुबह' की लोकप्रियता में इसके टाइटल सॉन्ग का भी बड़ा योगदान था. ‘ऐ जमाने तेरे सामने आ गए' को आरडी बर्मन ने अपनी आवाज दी थी और इसका संगीत भी उन्होंने ही तैयार किया था. पंचम दा की आवाज में इस गीत का अंदाज बाकी टीवी टाइटल ट्रैक से काफी अलग था. गीत में एक तरफ दर्द और बेचैनी महसूस होती थी, तो दूसरी तरफ मुश्किलों से लड़ने का हौसला भी सुनाई देता था. यही वजह रही कि यह गाना सीरियल खत्म होने के बाद भी लोगों को याद रहा.
उस दौर में टीवी पर सीमित चैनल और गिने-चुने कार्यक्रम होते थे, इसलिए ‘सुबह' जैसे धारावाहिकों का असर काफी दूर तक पहुंचता था. आज भले ही यह सीरियल आसानी से उपलब्ध नहीं है, लेकिन दूरदर्शन के यादगार और सामाजिक मुद्दों पर बने धारावाहिकों में इसका नाम अब भी लिया जाता है.
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