बॉलीवुड के रोमांटिक सान्ग की बात करें तो वो सालों बाद भी लोगों के दिलों में वही जगह बनाए हुए हैं, जो उस वक्त थे जब ये रिलीज हुए थे. आज हम एक ऐसे ही गाने की बात करेंगे जो 80 के दशक में रिलीज हुआ था, लेकिन आज भी रोमांटिक गानों की प्लेलिस्ट में अपनी जगह बनाए हुए है.
1985 में आई फिल्म 'राम तेरी गंगा मैली' फिल्म एक अधूरे प्यार की कहानी थी. जिसमें एक भोली-भाली पहाड़ी लड़की को एक शहरी बाबू से प्यार हो जाता है. लेकिन उनकी प्रेम कहानी अधूरी रह जाती है. इसके बाद अपने प्यार को हासिल करने के लिए प्रेमिका के संघर्ष को दिखाया गया है. आखिर में सच्चा प्यार मिल ही जाता है. जैसा कि अमूमन हर फिल्म में होता है.
फिल्म के साथ, गाने भी हुए थे हिट
निर्देशक राज कपूर के फिल्ममेकिंग करियर की सबसे बेहतरीन मूवीज की जब भी बात की जाएगी तो उसमें राम तेरी गंगा मैली का नाम जरूर शामिल होगा. फिल्म की कहानी, मंदाकिनी का भोलापन और राजीव कपूर की सादगी ने इस फिल्म की कहानी को और खूबसूरती से निखारा था. इसके साथ ही इसके गाने भी लोगों को खूब पसंद आए थे. इस फिल्म का एक गाना है जिसे पहाड़ों की पहचान भी कहा जाता है. 'हुस्न पहाड़ों का' आज भी लोगों के जुबान पर चढ़ा हुआ है.
41 साल बाद भी लता दीदी की आवाज का जादू
फिल्म को रिलीज हुए 41 साल हो गए हैं. इसके बाद भी गाना हुस्न पहाड़ों का गाना खूब सुना जाता है और दिलों को सुकून पहुंचाता है. गाने के बोल और संगीत रवींद्र जैन ने तैयार किया था. लता मंगेशकर- सुरेश वाडकर ने अपनी सुरीली आवाज से इस गाने को सजाया. इस गाने में मंदाकिनी का भोलापन और राजीव कपूर की सादगी ने लोगों का दिल जीत लिया. इसके साथ ही फिल्म के सीन भी बेहद खूबसूरत थे. बर्फ से ढ़के पहाड़ और वहां की हसीन वादियों ने इस गाने में एक अलग ही जान डाल दी. इस तरह से ये गाना बनकर तैयार हुआ था.
फिल्म के बजट की बात करें तो उस समय फिल्म का बजट 1.44 करोड़ था. इस फिल्म ने 19 करोड़ की कुल कमाई की थी. 5.25 मिनट का गाना हुस्न पहाड़ों का आज भी रोमांटिक गानों की प्लेलिस्ट में अपनी जगह बनाए हुए है.
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