एक्टर राजपाल यादव को चेक बाउंस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार यानी कल तक रजिस्ट्री में 5 करोड रूपये जमा करने का आदेश दिया है. हालांकि कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि अगर राजपाल यादव कल तक रजिस्ट्री में 5 करोड जमा कराते है तो जेल नहीं जाना होगा. सुप्रीम कोर्ट ने राजपाल यादव की याचिका पर दूसरे पक्ष को नोटिस जारी किया . जिस पर सुप्रीम कोर्ट 15 सितंबर को सुनवाई करेगा.
धारा 138 के तहत मुकदमा चल रहा है
राजपाल यादव दिल्ली हाईकोर्ट के जुलाई 10 के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे, जिसमें उनकी सजा बरकरार रखी गई थी. मामला फिल्म प्रोड्यूसर-फाइनेंसर मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से जुड़ा है. राजपाल यादव, उनकी पत्नी राधा राजपाल यादव और उनकी फिल्म प्रोडक्शन कंपनी पर सात मामलों में धारा 138 के तहत मुकदमा चला था. ये चेक फिल्म ‘अटा पाटा लपाटा' के लिए दिए गए थे.
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क्या है मामला
2010 में मुरली प्रोजेक्ट्स ने फिल्म पूरा करने के लिए 5 करोड़ रुपये दिए थे. फिल्म रिलीज में देरी होने पर कई समझौते हुए और चेक दिए गए. बाद में 2013 में एक सहमति समझौता हुआ, जिसमें 10.40 करोड़ रुपये के फुल एंड फाइनल सेटलमेंट की बात कही गई. राजपाल यादव का कहना है कि पुराने चेक वापस होने चाहिए थे, लेकिन शिकायतकर्ता ने पुराने मामलों को जारी रखा.
2018 में राजपाल यादव को दोषी ठहराया
ट्रायल कोर्ट ने 2018 में राजपाल यादव को दोषी ठहराया था. पहले छह महीने की सजा और हर मामले में 1.60 करोड़ रुपये जुर्माना था. बाद में सजा घटाकर तीन महीने की साधारण कैद और हर मामले में 1.35 करोड़ रुपये जुर्माना कर दिया गया. सजा एक साथ चलनी थी. सेशन कोर्ट ने 2024 में और दिल्ली हाईकोर्ट ने जुलाई 2026 में इस फैसले को बरकरार रखा. हाईकोर्ट ने प्रोबेशन का अनुरोध भी खारिज कर दिया था. अदालत ने कहा कि यादव ने कई बार भुगतान का वादा किया लेकिन पूरा नहीं किया. अब तक करीब 2.25 करोड़ रुपये जमा हो चुके हैं, जिन्हें जुर्माने में समायोजित करने को कहा गया था.
कंडीशनल नोटिस जारी
सुप्रीम कोर्ट ने यादव की याचिका पर कंडीशनल नोटिस जारी किया है. अगली सुनवाई 15 सितंबर को होगी. कोर्ट ने कहा कि अगर राजपाल यादव बुधवार तक 5 करोड़ रुपये रजिस्ट्री में जमा कर देते हैं, तो उन्हें फिलहाल सरेंडर नहीं करना पड़ेगा. राजपाल यादव की तरफ से तर्क दिया गया है कि समझौते के बाद पुरानी शिकायतें जारी नहीं रह सकतीं.
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