अगर 'मुगल-ए-आजम' (Mughal-e-Azam) का नाम लिया जाए, तो उसके साथ 'प्यार किया तो डरना क्या' का जिक्र अपने आप हो जाता है. मधुबाला पर फिल्माया गया यह गीत सिर्फ अपनी धुन या बोल की वजह से नहीं, बल्कि इसकी मेकिंग से जुड़े दिलचस्प किस्सों के कारण भी आज तक चर्चा में रहता है. इस गाने को पर्दे पर उतारने के लिए करीब दो साल तक शीश महल का सेट तैयार किया गया. गीत के बोल कई बार बदले गए और रिकॉर्डिंग के लिए ऐसा तरीका अपनाया गया, जो आज के दौर में सुनकर भी हैरानी होती है. आइए जानते हैं इस यादगार गाने से जुड़े कुछ दिलचस्प किस्से.
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जब एक गाने के लिए दो साल तक बनता रहा शीश महल
निर्देशक के. आसिफ (K. Asif) चाहते थे कि अनारकली का यह गीत फिल्म का सबसे भव्य दृश्य बने. इसके लिए एक विशाल शीश महल का सेट तैयार कराया गया. इस सेट को बनाने में करीब दो साल लगे और इसमें बेल्जियम से मंगवाए गए शीशों का इस्तेमाल किया गया. हजारों शीशों की वजह से रोशनी और कैमरे का काम आसान नहीं था, लेकिन पूरी टीम ने लंबी तैयारी के बाद इस दृश्य को फिल्माया.
105 बार बदले गए गाने के बोल
इस गीत को लिखने की जिम्मेदारी मशहूर गीतकार शकील बदायूंनी के पास थी. संगीतकार नौशाद की उम्मीदों पर खरा उतरने के लिए उन्होंने 'प्यार किया तो डरना क्या' के बोल 105 बार लिखे और उनमें बदलाव किए. इसके बाद जाकर गीत का अंतिम रूप तय हुआ.
स्टूडियो के बाथरूम में क्यों हुई रिकॉर्डिंग?
आज रिकॉर्डिंग स्टूडियो में कंप्यूटर की मदद से किसी भी तरह का साउंड इफेक्ट तैयार किया जा सकता है, लेकिन उस दौर में ऐसी सुविधा नहीं थी. नौशाद इस गाने में गूंज यानी इको का खास असर चाहते थे. इसके लिए लता मंगेशकर से स्टूडियो के बाथरूम में यह गीत रिकॉर्ड कराया गया, ताकि वहां की प्राकृतिक गूंज आवाज में शामिल हो सके.
एक गाने पर हुआ था बड़ा खर्च
'मुगल-ए-आजम' अपने समय की सबसे महंगी फिल्मों में गिनी जाती थी. सिर्फ 'प्यार किया तो डरना क्या' पर ही उस दौर के हिसाब से बेहद बड़ा बजट खर्च किया गया था. यही वजह है कि इसे हिंदी सिनेमा के सबसे भव्य फिल्मी गीतों में से एक माना जाता है. 'प्यार किया तो डरना क्या' सिर्फ एक फिल्मी गीत नहीं, बल्कि भारतीय सिनेमा के इतिहास का अहम हिस्सा बन चुका है. मधुबाला की अदाकारी, लता मंगेशकर की आवाज, नौशाद का संगीत, शकील बदायूंनी के बोल और के. आसिफ की भव्य सोच ने मिलकर इसे ऐसी पहचान दी, जिसकी चर्चा आज भी फिल्म प्रेमियों और सिनेमा इतिहास से जुड़ी बातचीत में होती है. शायद यही वजह है कि छह दशक से ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी इस गाने से जुड़े किस्से लोगों की दिलचस्पी बनाए रखते हैं.
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