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देवर-भाभी का वो गाना जो 44 साल पहले घर-घर में हुआ मशहूर, रविंद्र जैन के बोल ने बनाया हिट, Gen-Z के पेरेंट्स सुनते हैं रीपिट में

44 साल पहले देवर-भाभी के रिश्ते पर एक गाना आया था, जिसने लोगों के दिलों में खास जगह बनाई थी. आज भी जब भी देवर-भाभी के रिश्ते पर बात होती है तो इस गाने का जिक्र जरूर होता है.

देवर-भाभी का वो गाना जो 44 साल पहले घर-घर में हुआ मशहूर, रविंद्र जैन के बोल ने बनाया हिट, Gen-Z के पेरेंट्स सुनते हैं रीपिट में
देवर-भाभी का वो गाना जो 44 साल पहले घर-घर में हुआ मशहूर
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देवर-भाभी के रिश्ते पर कई फिल्में और गाने बने हैं. फिल्मों में  इस रिश्ते को बेहद खास तरीके से दिखाया गया है. कई फिल्मों में भाभी को मां के तौर पर दिखाया गया है. 44 साल पहले देवर-भाभी के रिश्ते पर एक गाना आया था, जिसने लोगों के दिलों में खास जगह बनाई थी. आज भी जब भी देवर-भाभी के रिश्ते पर बात होती है तो इस गाने का जिक्र जरूर होता है. इस गाने का नाम 'सांची कहे तोरे आवन से हमरे' है. यह गाना साल 1982 में आई सुपरहिट फिल्म नदिया के पार का है.

गाने के बोल और संगीत 

राजश्री फिल्म नदिया के पार का ये गाना देवर-भाभी के पवित्र रिश्ते की सबसे खूबसूरत अभिव्यक्ति है. फिल्म में चंदन (सचिन पिलगांवकर) अपनी भाभी रूपा (मिताली) के प्रति ढेर सारा प्यार और सम्मान व्यक्त करते हुए ये गाना गाता है. जसपाल सिंह की कोमल आवाज में रवींद्र जैन के संगीत और बोल ने 'सांची कहे तोरे आवन से हमरे' गाने को अमर बना दिया. गाने बोल हैं-'सांची कहे तोरे आवन से हमरे अंगना में आई बहार भौजी. लक्ष्मी की सूरत, ममता की मूरत, लाखों में एक हमार भौजी.'

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गाने का मतलब 

'सांची कहे तोरे आवन से हमरे' की लाइन का मतलब है कि भाभी के आने से घर में खुशहाली, उत्सव और मां जैसी ममता आ गई. तुलसी की सेवा, कजरी-चैता की गूंज और घर का बदलता माहौल, सब कुछ गीत में बखूबी बयां हुआ है. यह सिर्फ गाना नहीं, ग्रामीण परिवार की सादगी और रिश्तों की पवित्रता का प्रतीक बन गया.

रवींद्र जैन ने 'सांची कहे तोरे आवन से हमरे' के संगीत और बोल दोनों खुद लिखे. गाने में लोक-संगीत की मिठास और फिल्मी भाव का सुंदर मेल है. यह उस समय की याद दिलाता है जब देवर-भाभी का रिश्ता मां-बेटे जैसा माना जाता था.

फिल्म के बारे में

फिल्म नदिया के पार का निर्देशन गोविंद मूनिस ने किया है, जबकि फिल्म के प्रोड्यूसर ताराचंद बड़जात्या थे. फिल्म की कहानी केशव प्रसाद मिश्र के उपन्यास कोहबर की शर्त पर आधारित है. फिल्म में सचिन पिलगांवकर, साधना सिंह, इंदर ठाकुर, मिताली और लीला मिश्रा जैसे कलाकार मुख्य भूमिका में हैं. महज 18 लाख रुपये के बजट में बनी फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर लगभग 5.4 करोड़ रुपये कमाए थे. नदिया के पार 1982 की सबसे सफल फिल्मों में से एक रही और बाद में हम आपके हैं कौन..! के रूप में रीमेक हुई.

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