56 साल पहले बॉलीवुड में एक ऐसी फिल्म आई जिसने प्यार करने वालों की आंखों में आंसू ला दिए. कहानी शुरू होती है दो ऐसे प्रेमियों से, जिनके लिए खुशी का मतलब था बस एक-दूसरे का साथ, लेकिन किस्मत को शायद ये मंजूर नहीं था. एक तरफ दो प्यार करने वाले, जिनके दिल में एक-दूसरे के लिए बेपनाह प्यार था वो दूसरी तरफ थी परिवार और समाज की दीवारें. 1970 में आई इस फिल्म में एक मशहूर प्रेम कहानी दिखाई गई, जिसको पर्दे पर इस तरह से उतारा गया कि मोहब्बत के खूबसूरत पलों के साथ उसका दर्द भी लोगों के दिल में उतर गया. यही वजह है कि इस फिल्म का हर रोमांटिक पल आगे आने वाले दुख की आहट भी देता है. इस फिल्म की कहानी के साथ इसके गानों को भी लोगों ने खूब पसंद किया. आज हम इसके एक ऐसे रोमांटिक गाने की बात करेंगे जो दो प्यार करने वालों के दिल का हाल बयां करते हैं.
वारिस शाह की कहानी, चेतन आनंद का अनोखा अंदाज
साल 1970 में आई फिल्म 'हीर रांझा' जिसको चेतन आनंद के डायरेक्ट किया था. ये फिल्म पंजाब के मशहूर कवि वारिस शाह की 1766 में लिखी गई काव्य रचना 'हीर' पर बेस्ड थी. फिल्म में राजकुमार ने रांझा का किरदार और प्रिया राजवंश ने हीर का किरदार निभाया था. प्राण, पृथ्वीराज कपूर, अजीत और जयंत जैसे कलाकार भी फिल्म का हिस्सा थे. फिल्म का एक गाना था 'मिलो न तुम तो हम घबराएं, मिलो तो आंख चुराएं' जिसको राजकुमार और प्रिया राजवंश पर फिल्माया गया था. गाने में ये दोनों खेतों और खुले देहाती माहौल में नजर आते हैं तो लगता है जैसे इनके प्यार को पंख मिल गए हैं. गाने के बोल कैफी आजमी ने लिखे थे और संगीत दिया था मदन मोहन कुमार ने, जिसे लता मंगेशकर ने अपनी आवाज से सदाबहार बना दिया.
लता की आवाज में हीर के दिल की बात
इस फिल्म का गाना 'मिलो ना तुम तो हम घबराए, मिलो तो आंख चुराए…'इसे लता मंगेशकर ने अपनी आवाज दी, गाने में राजकुमार और प्रिया राजवंश की जोड़ी नजर आती है. करीब 3 मिनट 50 सेकेंड का ये गाना फिल्म के सबसे यादगार गानों में शामिल है. गाने के बोल इस तरह हैं-
मिलो ना तुम तो हम घबराएँ, मिलो तो आँख चुराएँ
हमें क्या हो गया है, हमें क्या हो गया है
तुम्हीं को दिल का राज़ बताएं, तुम्हीं से राज़ छुपाएँ
हमें क्या हो गया है, हमें क्या हो गया है
मिलो ना तुम तो हम घबराएँ, मिलो तो आँख चुराएँ
ओ भोले साथिया, ये क्या बयां किया
नज़र ने दिल की बात को, ज़ुबां पे ला दिया
नज़र ने दिल की बात को, ज़ुबां पे ला दिया
फिल्म का साउंडट्रैक
फिल्म में कुल 9 गाने थे. 'मिलो ना तुम तो हम घबराए' के अलावा 'ये दुनिया ये महफिल', 'दो दिल टूटे दो दिल हारे' और 'डोली चढ़ते ही हीर ने बैन किए'. इस फिल्म के साउंडट्रैक में मदन मोहन का संगीत और कैफी आजमी के लिखे गाने शामिल थे. इनमें सबसे ज्यादा याद किया जाने वाला गीत 'ये दुनिया, ये महफिल मेरे काम की नहीं' है, जिसे मोहम्मद रफी ने अपनी आवाज में गाया था. ये गाना आज भी हिंदी सिनेमा के सबसे दर्दभरे और यादगार नगमों में गिना जाता है. मदन मोहन और कैफी आजमी की ये जोड़ी फिल्म के संगीत को ऐसी पहचान दे गई, जिसे आज भी याद किया जाता है. मदन मोहन की ऑफिशियल वेबसाइट में भी 'मिलो ना तुम तो' को फिल्म के लोकप्रिय गीतों में गिनती है.
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