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44 साल पुराना ठेठ देसी गाना, किताब पर थी फिल्म, शोले के एक्टर ने हीरो बन बॉक्स ऑफिस पर मचाया था गदर

आज के दौर में हर हफ्ते नए गाने आते हैं और कुछ दिनों बाद लोग उन्हें भूल भी जाते हैं. लेकिन एक गाना ऐसा है, जिसे 44 साल बाद भी सुनते ही लोग मुस्कुरा उठते हैं. गांव की सादगी, मासूम प्यार और दिल को छू लेने वाली धुन ने इसे ऐसा बनाया कि इसकी चमक कभी फीकी नहीं पड़ी.

44 साल पुराना ठेठ देसी गाना, किताब पर थी फिल्म, शोले के एक्टर ने हीरो बन बॉक्स ऑफिस पर मचाया था गदर
44 साल बाद भी इस देहाती रोमांटिक गाने का नहीं टूटा जादू, एक नहीं बार-बार सुनेंगे
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नई दिल्ली:

आज के दौर में हर हफ्ते नए गाने आते हैं और कुछ दिनों बाद लोग उन्हें भूल भी जाते हैं. लेकिन एक गाना ऐसा है, जिसे 44 साल बाद भी सुनते ही लोग मुस्कुरा उठते हैं. गांव की सादगी, मासूम प्यार और दिल को छू लेने वाली धुन ने इसे ऐसा बनाया कि इसकी चमक कभी फीकी नहीं पड़ी. यही वजह है कि नई पीढ़ी भी इस गाने को उतना ही पसंद करती है, जितना इसके रिलीज के समय लोगों ने किया था. दिलचस्प बात ये है कि बिना किसी बड़े शोर-शराबे के ये गाना आज भी लोगों की जुबान पर है. यही इसकी सबसे बड़ी कामयाबी है, जो इसे आज भी सदाबहार गानों की लिस्ट में शामिल रखती है.

प्यार की सबसे प्यारी कहानी

ये गाना साल 1982 में आई फिल्म नदिया के पार का है. केशव प्रसाद मिश्रा की नॉवल कोहबर की शर्त पर फिल्म बनी थी. उस दौर में फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर 18 लाख की फिल्म ने 5.4 करोड़ की शानदार कमाई की थी, लेकिन सबसे ज्यादा प्यार इसके गानों को मिला. खासकर कौन दिशा में लेके चला रे बटोहिया लोगों की पहली पसंद बन गया. गांव की खुशबू और सादगी से भरा ये गाना आज भी सुनने वालों के चेहरे पर मुस्कान ले आता है. 

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सचिन और साधना की जोड़ी ने कर दिया कमाल

इस गाने को शोले में नजर आ चुके एक्टर सचिन पिलगांवकर और साधना सिंह पर फिल्माया गया था. दोनों की मासूम एक्टिंग और प्यारी केमिस्ट्री ने इस गाने को और भी खास बना दिया. यही वजह है कि आज भी जब इस फिल्म का नाम लिया जाता है, तो सबसे पहले इसी गाने की याद आती है.

अवधी भाषा ने बढ़ाया अपना पन

इस गाने की सबसे अलग बात इसकी भाषा है. पूरे गीत में अवधी का इस्तेमाल किया गया है, जो उत्तर प्रदेश के पूर्वी हिस्सों में बोली जाती है. सिर्फ गाना ही नहीं, फिल्म के कई डायलॉग भी इसी भाषा में थे. यही वजह रही कि लोगों को फिल्म और इसके किरदार बिल्कुल अपने घर-परिवार जैसे लगे.

इन दिग्गजों ने बनाया यादगार

इस गाने को हेमलता और जस्पाल सिंह ने अपनी खूबसूरत आवाज दी थी. वहीं इसकी धुन मशहूर संगीतकार रवींद्र जैन ने तैयार की थी. शानदार संगीत, दिल को छू लेने वाले बोल और सचिन-साधना की प्यारी जोड़ी ने मिलकर इस गाने को हमेशा के लिए यादगार बना दिया. यही कारण है कि 44 साल बाद भी इसका जादू पहले जैसा ही बरकरार है.

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