हिंदी सिनेमा के सुनहरे दौर में कई ऐसी अभिनेत्रियां हुईं, जिन्होंने बेहद कम समय में दर्शकों के दिलों में अपनी जगह बना ली. इन्हीं में एक नाम मुनव्वर सुल्ताना का भी है. लाहौर में जन्मी यह खूबसूरत अदाकारा कभी बॉलीवुड की चर्चित स्टार हुआ करती थीं. उनकी अदाकारी के साथ-साथ फिल्मों में उन पर फिल्माए गए गाने भी खूब पसंद किए गए. दिलचस्प बात यह है कि मुनव्वर का सपना फिल्मों में आने का नहीं, बल्कि डॉक्टर बनने का था. मगर एक फिल्म और उसके एक लोकप्रिय गाने ने उनकी पूरी जिंदगी की दिशा बदल दी.
छोटे से रोल से शुरू हुआ सफर
मुनव्वर सुल्ताना का जन्म 1924 में लाहौर में हुआ था. उनका परिवार फिल्मी दुनिया से दूर था और वह खुद भी अभिनेत्री बनने का सपना नहीं देखती थीं. 1941 में रिलीज हुई फिल्म ‘खजांची' से उनका फिल्मी सफर शुरू हुआ. फिल्म में उनका किरदार ज्यादा बड़ा नहीं था, लेकिन उन पर फिल्माया गया गाना ‘पीने के दिन आए' लोगों को खूब पसंद आया. गाने की लोकप्रियता ने मुनव्वर को अचानक चर्चा में ला दिया.
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इसके बाद निर्माता-निर्देशक मजहर खान की नजर उन पर पड़ी. वह उन्हें लाहौर से मुंबई लेकर आए और फिल्म ‘पहली नजर' में बतौर लीड अभिनेत्री मौका दिया. इस फिल्म में मुनव्वर पर फिल्माया गया ‘दिल जलता है तो जलने दो' भी काफी लोकप्रिय हुआ. मुकेश की आवाज में यह गीत आज भी पुराने हिंदी सिनेमा के यादगार गानों में गिना जाता है.
‘दर्द' और ‘अफसाना लिख रही हूं' ने बदल दी किस्मत
मुनव्वर सुल्ताना के करियर में 1947 की फिल्म ‘दर्द' बेहद खास साबित हुई. फिल्म में उनके साथ श्याम कुमार मुख्य भूमिका में थे, जबकि सुरैया भी अहम भूमिका में नजर आई थीं. इसी फिल्म का गीत ‘अफसाना लिख रही हूं' मुनव्वर के करियर का बड़ा मोड़ बन गया. इस गाने को उमा देवी ने आवाज दी थी, जिन्हें बाद में टुनटुन के नाम से पहचान मिली. गीत जबरदस्त हिट हुआ और मुनव्वर सुल्ताना की लोकप्रियता तेजी से बढ़ी. इसके बाद उन्होंने कई फिल्मों में काम किया. 1949 उनके करियर का बेहद व्यस्त साल रहा, जब उनकी सात फिल्में रिलीज हुईं.
शादी के बाद फिल्मों से बनाई दूरी
मुनव्वर सुल्ताना ने करीब डेढ़ दशक तक फिल्मों में काम किया. इसके बाद उन्होंने बिजनेसमैन शरीफ अली से शादी कर ली और धीरे-धीरे फिल्मी दुनिया से पूरी तरह दूर हो गईं. शादी के बाद उनका जीवन परिवार और बच्चों की जिम्मेदारियों में सिमट गया. उनके सात बच्चे हुए. 1966 में पति के निधन के बाद बच्चों की जिम्मेदारी भी उनके कंधों पर आ गई.
ग्लैमर की दुनिया से दूर मुनव्वर ने अपना जीवन परिवार को समर्पित कर दिया. समय के साथ लोग उन्हें भूलते चले गए. जीवन के अंतिम वर्षों में वह अल्जाइमर से भी जूझती रहीं. करीब आठ साल तक बीमारी से लड़ने के बाद 2007 में 82 वर्ष की उम्र में उनका निधन हो गया. कभी बड़े पर्दे पर अपनी खूबसूरती और अदाकारी से पहचान बनाने वाली यह अभिनेत्री आखिरकार बेहद खामोशी के साथ इस दुनिया से विदा हो गईं.
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