शादी का घर हो और ढोलक की थाप न गूंजे, ऐसा भला कैसे हो सकता है. वक्त के साथ डीजे, रीमिक्स और नए-नए वेडिंग सॉन्ग्स जरूर आ गए. लेकिन कुछ पुराने गाने आज भी ऐसे मौकों की शान बने हुए हैं. ऐसा ही एक गीत है, जो पिछले 38 सालों से महिला संगीत की जान बना हुआ है. ढोलक की थाप सुनाई देती है और महिलाएं वही गाना गा पड़ती हैं. हल्दी हो, मेहंदी हो या घर की महिलाओं की महफिल, इस गाने के बिना माहौल अधूरा सा लगता है. मीनाक्षी शेषाद्रि पर फिल्माया गया ये सॉन्ग आज भी हर शादी में पूरे जोश के साथ गाया और बजाया जाता है.
38 साल बाद भी फीका नहीं पड़ा जादू
हम बात कर रहे हैं फिल्म 'गंगा जमुना सरस्वती' के सुपरहिट गीत 'साजन मेरा उस पार है' की. साल 1988 में रिलीज हुई इस फिल्म में अमिताभ बच्चन, मीनाक्षी शेषाद्रि, जया प्रदा और मिथुन चक्रवर्ती जैसे बड़े सितारे नजर आए थे. फिल्म को लेकर लोगों की अलग-अलग राय रही, लेकिन इसका ये गाना वक्त के दर्शकों की कसौटी पर पूरी तरह खरा उतरा.
इस गाने में 24 साल की मीनाक्षी शेषाद्रि का देसी अंदाज और उनकी सादगी लोगों का दिल जीत लेती है. यही वजह है कि ये गीत सिर्फ फिल्मी गाना बनकर नहीं रह गया. बल्कि शादी-ब्याह की रस्मों का हिस्सा बन गया. आज भी जब ये गाना बजता है तो बड़े-बुजुर्ग से लेकर नई पीढ़ी तक इसकी धुन पर झूमने लगती है. इस सदाबहार गीत को लता मंगेशकर ने अपनी सुरीली आवाज दी थी. म्यूजिक अनु मलिक का था और इसके बोल गीतकार इंद्रवीर ने लिखे थे.
महिला संगीत की प्लेलिस्ट में आज भी नंबर वन
आज भले ही हर हफ्ते नए वेडिंग सॉन्ग रिलीज होते हों, लेकिन 'साजन मेरा उस पार है' की बात ही अलग है. खासकर गांवों और छोटे शहरों की शादियों में ये गाना आज भी ढोलक के साथ पूरी खुशी के साथ गाया जाता है. कई घरों में तो महिला संगीत की शुरुआत ही इसी गीत से होती है. दिलचस्प बात ये है कि ये गाना किसी डीजे बीट पर नहीं, बल्कि ढोलक की साधारण थाप पर सबसे ज्यादा रंग जमाता है. शायद यही इसकी सबसे बड़ी ताकत भी है. इसमें देसी मिट्टी की खुशबू, शादी की मस्ती और अपनापन एक साथ महसूस होता है.
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