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This Article is From Jan 26, 2015

ओबामा के दौरे से कितना हासिल?

Ravish Kumar, Saad Bin Omer
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  • Updated:
    जनवरी 26, 2015 21:36 pm IST
    • Published On जनवरी 26, 2015 21:08 pm IST
    • Last Updated On जनवरी 26, 2015 21:36 pm IST

नमस्कार मैं रवीश कुमार, 66वें गणतंत्र दिवस के मौके पर 94 साल के एक ऐसे शख्स से आज जुदा होना पड़ा, जिसके बिना आम आदमी की कल्पना नहीं की जा सकती। कार्टूनिस्ट आर के लक्ष्मण अब हमारे बीच नहीं हैं। बहुत कुछ बदल गया इन दो दिनों में। पहले का दावा तो नहीं कर सकता, मगर ऐसा वर्किंग गणतंत्र दिवस मुझे याद नहीं है। वर्किंग गणतंत्र दिवस यानी राष्ट्रीय उत्सव के साथ कामकाज़ भी।

गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का भाषण अब अखबारों और टीवी के भीतरी पन्नों पर खिसकता जा रहा है। गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर वॉक द टॉक और चाय पे चर्चा में प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ओबामा का साझा संदेश कूटनीतिक कामयाबी के साथ-साथ बॉडी लैंग्वेज के हिसाब से भी महत्वपूर्ण बन गया है, बल्कि देह भाषा कूटनीतिक दौरों की एक महत्वपूर्ण किताब होती ही है।

प्रधानमंत्री मोदी ने चाय तो पिलाई मगर इस अंदाज़ के साथ कि बराबरी पर बात हो रही है। मेरे और बराक के बीच बोलकर प्रधानमंत्री मोदी ने मिस्टर प्रेसिडेंट बोलने की परंपरा को भी पुराना कर दिया। नाम से पुकारना बराबरी की पहली शर्त है। इससे पहले कि जानकार इस केमिस्ट्री की चर्चा करते, प्रधानमंत्री ने ही कह दिया कि मेरे और बराक के बीच केमिस्ट्री बन गई है। इसलिए इस गणतंत्र दिवस को अब नए चश्मे से देखा जाना चाहिए। पहले होता था की जगह अब से ऐसा ही होगा पर बात होनी चाहिए।

कुछ लोग इस गिनती में लगे हैं कि 72 घंटे की मुलाकात के लिए प्रधानमंत्री ने कितने कपड़े बदले, लेकिन हैदराबाद हाउस की मुलाक़ात के दौरान उनके इस सूट ने तो तहलका ही मचा दिया है। नीले रंग के इस सूट में एक सफेद लाइन चमक रही थी। बाद में पता चला कि लाइन नहीं है, पीले रंग से प्रधानमंत्री का पूरा नाम लिखा है। नरेंद्र दामोदर दास मोदी।

मोदी छींकते हैं तो भी पता किया जाता है कि उनसे पहले किसने छींका था। इस लिहाज़ से पता चला कि ऐसा ही सूट मिस्र के पूर्व राष्ट्रपति होस्नी मुबारक पहनते थे। हमारे सहयोगी रोहित भान ने अहमदाबाद के इस स्टोर के बाहर से रिपोर्ट करते हुए बताया कि मोदी के सूट पर उनका नाम लिखा है। इसी स्टोर से प्रधानमंत्री के कपड़े डिज़ाइन किए जाते हैं। कुर्ते का तो थोड़ा बहुत ज्ञान है भी मगर सूट लेंथ की जानकारी के अभाव में कपड़े पर अपना नाम लिखने के  मायने का विश्लेषण नहीं करूंगा।

अमरीका और भारत के बीच ऐसी कोई खास असहजता नहीं है जिससे कुछ समझौता न होने पर हाय तौबा मचाई जाए, लेकिन न्यूक्लियर डील पर क्या दोनों देश एक कदम आगे बढ़े। इसे लेकर बहस हो रही है कि राष्ट्रपति ओबामा ने अपनी कार्यकारी शक्ति का इस्तेमाल कर भारतीय परमाणु रिएक्टरों को जांच के प्रावधान से मुक्त कर दिया है। अमरीका कह रहा था कि भारत के रिएक्टरों की निगरानी करेगा, भारत तैयार नहीं था।

यह साफ नहीं है कि अमरीकी संसद में इस कार्यकारी शक्ति के इस्तेमाल पर क्या प्रतिक्रिया होगी। इसके बदले भारत ने अमरीका की एक प्रॉब्लम को दूर कर दिया। संसद के कानून के अनुसार दुर्घटना हुई तो मुआवज़ा सप्लाई करने वाली कंपनियां देंगी। इसकी जगह पर एक बीमा फंड बनाया गया है, जिसे सार्वजनिक क्षेत्र की बीमा कंपनियां और सरकार मिलकर पूरा करेंगे। 1500 करोड़ का फंड।

संसद के बनाए इस कानून को भी किसी कार्यकारी शक्ति से निरस्त किया गया है या सरकार इसे लेकर संसद में जाएगी यह कहना मुश्किल है। यह भी कि संसद में इस डील का कितना स्वागत होगा। उच्च तकनीकी क्षमता वाले देश फ्रांस और जापान जब परमाणु दुर्घटना को टाल नहीं सके, तो अमरीकी कंपनियों के इस दावे पर किसके भरोसे भरासा कर लें कि ऐसा नहीं होगा।

इस जटिल मसले को आप एक झटके में नहीं समझ सकते। मोटा मोटी यह समझिये कि अगर परमाणु दुर्घटना हो जाए, तो मुआवज़ा अमरीकी कंपनियों से वसूला जाए या भारत सरकार से। लेकिन एक पक्ष यह भी है कि इसकी वजह से परमाणु ऊर्जा के मामले में प्रगति भी नहीं हो रही थी। बीच का कोई रास्ता निकाला जाए या बीच का कोई दूसरा रास्ता भी है, जिसे कोई देख नहीं रहा है। भारत के भी तो हित पूरे हुए होंगे इस दौरे में।

वैसे दुनिया में न्यूक्लियर एनर्जी के कारोबार में गिरावट आ रही हैं। फ्रांस ने तय किया है कि वह परमाणु ऊर्जा के उत्पादन में भीषण कटौती करेगा, क्योंकि जोखिम बहुत है और लागत भी बहुत ज्यादा है।

परमाणु रिएक्टर बेचने वाली वेस्टिंगहाउस इलेक्ट्रिक कंपनी ने हमारे साइंस एडिटर पल्लव बागला से कहा है कि भारत में 10 बड़े रिएक्टर बनाने के लिए 50 अरब डॉलर का बिज़नेस मिलने की उम्मीद है।

कंपनी के सीईओ ने कहा है कि वे इस डील की बारीकियों का इंतज़ार कर रहे हैं। यह देखना चाहते हैं कि जो डील हुई है वह स्वीकार्य है या नहीं। तब भी 8 से 10 साल लग जाएंगे एक रिएक्टर को शुरू होने में इसलिए भी ज़रूरी है कि समय से इस मामले में फैसला हो जाए।

एक दम से इस दौरे को खारिज कर देना या सिर्फ गुणगान ही करना दोनों अतिरेक हैं। मन की बात का प्रसारण मंगलवार को आठ बजे होगा। 26 जनवरी की शाम ताज होटल में अमरीका और भारत की कंपनी के सीईओ को दोनों प्रमुखों ने संबोधित किया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि नीतियों की निरंतरता ज़रूरी है। हमारा फोकस इस बात पर है कि भारतीयों की क्रय शक्ति बढ़े तभी हम बाहर से आयात कर सकते हैं। इसके लिए बुनियादी क्षेत्र में निवेश से पीछे हटने की कोई गुज़ाइश नहीं है। उन्होंने कहा कि जो बड़े प्रोजेक्ट हैं उनकी ज़िम्मेदारी और निगरानी मैं खुद करूंगा।

ओबामा ने कहा कि अमरीकी कंपनियां देखना चाहती हैं कि भारतीय टैक्स सिस्टम में कितनी सरलता आती है। ओबामा ने कहा कि विकास आप सिर्फ बैलेंस शीट और जीडीपी से नहीं नाप सकते हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि प्रगति का मतलब हमेशा शांति नहीं है। स्मार्ट सिटी और स्मार्ट फोन के बाद आज स्मार्ट रेगुलेशन भी लांच हो गया। ओबामा ने कहा मैं और प्रधानमंत्री मोदी स्मार्ट रेगुलेशन के पक्ष मे हैं। ओबामा ने कहा कि इस दौरे में सिंबल है और सब्सटेंस भी हैं। सिंबल मने प्रतीक और सब्सटेंस मतलब बहुत कुछ हुआ भी है।

चीन इस दौरे को अलग नज़रिये से देख रहा है। वह कह रहा है कि कुछ खास नहीं हुआ है। पर यह भी कह रहा है कि पाकिस्तान हमारा ऐसा दोस्त है जिसका कोई विकल्प नहीं है। इसका मतलब है कि चीन में इस यात्रा को लेकर कुछ छटपटाहट तो है। वर्किंग गणतंत्र दिवस हो गया। न्यूक्लियर डील के डिटेल आते ही होंगे पब्लिक में लेकिन दोनों देश करीब तो आ ही गए। फोटो और वीडियो से भी तो कुछ डिटेल निकल ही सकता है।

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