नीतीश कुमार और अमित शाह के बीच कुछ दिन पहले ही मुलाकात हुई थी.
- गिरिराज सिंह को लेकर नीतीश ने दिया साफ संदेश
- अमित शाह से जताई नाराजगी
- कुछ दिन पहले ही दोनों की हुई थी मुलाकात
पटना:
बिहार में जेडीयू-बीजेपी गठबंधन में सब कुछ ठीक नहीं है और अंदर ही अंदर असंतोष बढ़ने के बीच बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के साथ हुई एक 'प्राइवेट' बैठक में बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने इन बातों का जिक्र किया है और एक 'लकीर' भी खींच दी है. दरअसल एक केंद्रीय मंत्री का दंगा भड़काने के आरोप में गिरफ्तार शख्स से मिलने जाने के बाद से नीतीश कुमार विपक्ष के निशाने पर आ गये हैं.इतना ही नहीं केंद्रीय मंत्री ने आरोपी को निर्दोष भी बताया था. जेडीयू का कहना था कि इससे सरकार की छवि को धक्का पहुंचा है क्योंकि मंत्री सहयोगी पार्टी के नेता हैं. जेडीयू की ओर से जताई गई बार-बार नाराजगी के बाद भी बिहार में बीजेपी पर कोई असर नहीं पड़ता नहीं दिखाई दिया.
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मिली जानकारी के मुताबिक अमित शाह से साथ हुई बैठक में बिहार के सीएम और जेडीयू अध्यक्ष नीतीश कुमार ने नाराजगी जताते हुये उनसे इन मामलों में हस्तक्षेप करने को कहा है. गौरतलब है कि केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह दोनों की मुलाकात के एक दिन पहले ही नवादा जेल में बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद के नेताओं से मुलाकात करने गये थे. इन सभी पर दंगा में शामिल होने का आरोप है. मुलाकात के बाद गिरिराज सिंह ने इन सभी को निर्दोष बताया और कहा कि सरकार को लगता है कि हिंदू को दबाकर ही सिर्फ 'सांप्रदायिक सौहार्द' आयेगा.
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इसके बाद नीतीश कुमार ने केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह की सार्वजनिक तौर पर आलोचना की थी और कहा कि वह सौहार्द को बिगाड़ना चाहते हैं. लेकिन नीतीश कुमार के बयान बिहार में बीजेपी के सभी बीजेपी नेता गिरिराज सिंह के समर्थन में आ गये. वहीं एक बीजेपी नेता का कहना है कि सरकार के पास अपनी उपलब्धियां बताने के लिये कुछ भी नहीं है. वहीं एक दूसरे बीजेपी नेता ने कहा कि कोई भी हिंसा को समर्थन नहीं करता है. उन्होंने नीतीश कुमार पर निशाना साधते हुये कहा कि अपनी सहयोगी पार्टी के नेताओं को उनके क्षेत्र में रोकना उचित नही है. नीतीश कुमार को सहयोगी दलों की मजबूरी भी समझना चाहिये. दरअसल नीतीश कुमार की चिंता है कि ऐेसे बातों से मुस्लिम और दलितों के बीच उनका आधार खिसकर लालू यादव और कांग्रेस गठजोड़ की ओर खिसक सकता है.
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