Kishanganj News: बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बार फिर बड़ी कार्रवाई देखने को मिली है. इस बार आर्थिक अपराध इकाई (EOU) के निशाने पर किशनगंज के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी गौतम कुमार (SDPO Gautam Kumar) आए हैं. मंगलवार सुबह जैसे ही सूरज की पहली किरण निकली, EOU की अलग-अलग टीमों ने गौतम कुमार के 6 ठिकानों पर एक साथ दस्तक दी. यह छापेमारी आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में की गई है, जिसमें अब तक करोड़ों रुपये के निवेश और बेनामी संपत्तियों का पता चला है.
10 घंटे तक चली रेड, 60.27% अधिक संपत्ति का खुलासा
किशनगंज में मंगलवार सुबह करीब 8:30 बजे जब EOU की टीम 3 गाड़ियों में सवार होकर पहुंची, तो हड़कंप मच गया. दोपहर 12 बजे से उनके कार्यालय में भी सघन तलाशी शुरू हुई. लगभग 10 घंटों तक चली इस कार्रवाई में 12 सदस्यों की टीम ने एक-एक कागज को खंगाला. जांच में यह सामने आया है कि गौतम कुमार ने अपनी वैध आय से लगभग 60.27 प्रतिशत अधिक संपत्ति जमा कर रखी है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, उनके खिलाफ करीब 1,94,09,244 रुपये की अवैध कमाई का शुरुआती साक्ष्य मिला है.
आलीशान बंगला, चाय बागान और महंगी गाड़ियों का कलेक्शन
छापेमारी के दौरान जो दस्तावेज हाथ लगे हैं, वे चौंकाने वाले हैं. पूर्णिया में उनका 3600 वर्गफीट में फैला एक 4 मंजिला मकान मिला है, जिसकी कीमत करीब 2.5 करोड़ रुपये आंकी गई है. इतना ही नहीं, पुलिस अधिकारी ने सिलीगुड़ी के चाय बागानों में भी मोटा पैसा लगाया है. उनके पास से थार और क्रेटा जैसी लग्जरी गाड़ियां और कई महंगी घड़ियां बरामद हुई हैं. इसके अलावा, नोएडा और गुड़गांव जैसे बड़े शहरों में भी संपत्ति खरीदने के सबूत मिले हैं. उनके सरकारी आवास से 1 लाख 37 हजार रुपये नकद भी बरामद किए गए हैं.
पत्नी और महिला मित्र के नाम पर बेनामी संपत्ति के सबूत
जांच एजेंसियों को चकमा देने के लिए गौतम कुमार ने संपत्तियां अपने करीबियों के नाम पर ले रखी थीं. जांच में कुल 25 जमीन के प्लॉट की जानकारी मिली है. इनमें से कई प्लॉट उनकी पत्नी पूनम देवी और उनकी एक महिला मित्र शगुफ्ता शमीम के नाम पर दर्ज हैं. पूर्णिया में शगुफ्ता के घर से ही 7 जमीनों के कागजात मिले हैं, जिनकी बाजार में कीमत 60 लाख रुपये से ज्यादा है. इसी वजह से EOU ने उनकी पत्नी और महिला मित्र दोनों को इस मामले में सह-आरोपी बनाया है.
तस्करों से सांठगांठ, 'किशनगंज' से पुराना नाता
गौतम कुमार का किशनगंज से रिश्ता काफी पुराना है. उन्होंने 1994 में दारोगा के रूप में करियर शुरू किया था और 1996 में उनकी पहली पोस्टिंग किशनगंज में ही हुई थी. प्रमोशन पाकर वे डीएसपी बने. अपने लंबे कार्यकाल के दौरान उन्होंने अधिकतर समय सीमांचल के चार जिलों किशनगंज, अररिया, पूर्णिया और कटिहार में ही बिताया. जांच में एक गंभीर बात यह भी सामने आई है कि उनके संबंध कोयला, शराब, सुपारी तस्करों और लॉटरी माफियाओं से रहे हैं. साथ ही, यह भी पता चला है कि वे फर्जी सिम कार्ड का इस्तेमाल कर रहे थे, ताकि उनकी गतिविधियों पर किसी की नजर न पड़े.
क्या है पूरा मामला?
इस पूरी कार्रवाई की नींव 29 मार्च 2026 को पड़ी, जब पटना में उनके खिलाफ कांड संख्या-03/26 के तहत FIR दर्ज की गई. इसके बाद पटना की विशेष निगरानी अदालत से सर्च वारंट हासिल कर 31 मार्च की सुबह पटना, पूर्णिया और किशनगंज के ठिकानों पर छापेमारी की गई. अब EOU की टीम इन सभी दस्तावेजों और निवेशों की गहराई से पड़ताल कर रही है. माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस मामले में कुछ और बड़े लोगों के नाम सामने आ सकते हैं और गौतम कुमार की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं.
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