बिहार में पिछले साल 12वीं कक्षा के रिजल्ट के दौरान टॉपर घोटाला हुआ था
- परीक्षा के पेपर और उनके उत्तर सोशल मीडिया पर हुए थे वायरल
- SIT ने BSSC के सचिव परमेश्वर राम को गिरफ्तार किया है
- बीजेपी ने लगाया पूरे मामले में 200 करोड़ के घपले का आरोप
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पटना:
बिहार की शिक्षा व्यवस्था का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि माध्यमिक परीक्षा में घपलेबाजी का मामला अभी ठीक से थमा ही नहीं है कि अब बीएसएससी की परीक्षा के पेपर लीके होने का मामला उजागर हुआ है. पुलिस ने मामले में फौरन कार्रवाई करते हुए आयोग के सचिव को गिरफ्तार कर लिया है. उधर, राज्य की विपक्षी पार्टी बीजेपी ने पूरे मामले की जांच कर रही टीम पर ही सवालिया निशान लगाए हैं.
बिहार कर्मचारी चयन आयोग यानी बीएसएससी की इंटर (12वीं) स्तरीय पदों के लिए प्रारंभिक परीक्षा में प्रश्न-पत्र और उसके उत्तर लीक होने के मामले में अहम सबूत मिलने के बाद बिहार सरकार ने बुधवार को परीक्षा रद्द करने का निर्णय ले लिया था. मामले की जांच में जुटी विशेष जांच टीम ने आयोग के सचिव परमेश्वर राम तथा आयोग के डाटा एंट्री ऑपरेटर अविनाश कुमार को गिरफ्तार कर लिया. सरकार ने भी इस प्रकरण पर तुरंत कदम उठाते हुए, हो चुकी तथा होने वाली परीक्षा को रद्द कर दिया है. पटना प्रक्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) नैयर हसनैन खां ने बताया कि एसआईटी पूरी तरह सक्रिय है और लगातार संदिग्धों से पूछताछ की जा रही है.
बता दें कि बिहार कर्मचारी चयन आयोग ने इंटर स्तरीय पदों के लिए प्रारंभिक परीक्षा के लिए चार तारिखों का ऐलान किया था. दो परीक्षाएं 29 जनवरी और पांच फरवरी को हो चुकी थीं, जबकि अन्य परीक्षाएं 19 फरवरी और 26 फरवरी को होनी थी.
पहले दो चरणों में हुई परीक्षा के प्रश्न-पत्र और उनके उत्तर सोशल मीडिया पर वायरल हो गए, लेकिन आयोग ने किसी भी तरह की लीकेज मानने से इंकार कर दिया था. जबकि पेपर देने आए छात्रों ने सोशल मीडिया पर वायरल प्रश्न-पत्रों में एक सेट को सही बताया. छात्रों ने परीक्षा रद्द करने की मांग को लेकर जमकर हंगामा किया.
छात्रों का हंगामा बढ़ता देख मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को पूरे मामले की जांच करने के निर्देश दिए. मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप के बाद पटना के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक की अगुआई में एक जांच दल गठित किया गया और जगह-जगह छापेमारी की गई और आयोग के सचिव सहित अन्य लोगों को गिरफ्तार किया.
उधर, पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने प्रश्न-पत्र लीक मामले को लेकर नीतीश सरकार पर हमला बोला है. उन्होंने कहा है कि एसआईटी का अनुमान है कि बीएसएससी परीक्षाओं का पर्चा लीक कराने में 200 करोड़ रुपये का खेल हुआ है. जिस रैकेट में 100 से ज्यादा मोबाइल नंबर का उपयोग कर हर परीक्षार्थी से दो से छह लाख रुपये तक वसूले गए हों, वह क्या सत्ता केंद्रों की हिस्सेदारी के बिना संभव हुआ होगा?"
इससे पूर्व भी बीते साल 12वीं परीक्षा में परिणाम घोषित होने के बाद टॉपर घोटला उजागर हुआ था. इसमें भी कई बड़े अधिकारियों की गिरफ्तारी हुई थी.
(इनपुट आईएएनएस से भी)
बिहार कर्मचारी चयन आयोग यानी बीएसएससी की इंटर (12वीं) स्तरीय पदों के लिए प्रारंभिक परीक्षा में प्रश्न-पत्र और उसके उत्तर लीक होने के मामले में अहम सबूत मिलने के बाद बिहार सरकार ने बुधवार को परीक्षा रद्द करने का निर्णय ले लिया था. मामले की जांच में जुटी विशेष जांच टीम ने आयोग के सचिव परमेश्वर राम तथा आयोग के डाटा एंट्री ऑपरेटर अविनाश कुमार को गिरफ्तार कर लिया. सरकार ने भी इस प्रकरण पर तुरंत कदम उठाते हुए, हो चुकी तथा होने वाली परीक्षा को रद्द कर दिया है. पटना प्रक्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) नैयर हसनैन खां ने बताया कि एसआईटी पूरी तरह सक्रिय है और लगातार संदिग्धों से पूछताछ की जा रही है.
बता दें कि बिहार कर्मचारी चयन आयोग ने इंटर स्तरीय पदों के लिए प्रारंभिक परीक्षा के लिए चार तारिखों का ऐलान किया था. दो परीक्षाएं 29 जनवरी और पांच फरवरी को हो चुकी थीं, जबकि अन्य परीक्षाएं 19 फरवरी और 26 फरवरी को होनी थी.
पहले दो चरणों में हुई परीक्षा के प्रश्न-पत्र और उनके उत्तर सोशल मीडिया पर वायरल हो गए, लेकिन आयोग ने किसी भी तरह की लीकेज मानने से इंकार कर दिया था. जबकि पेपर देने आए छात्रों ने सोशल मीडिया पर वायरल प्रश्न-पत्रों में एक सेट को सही बताया. छात्रों ने परीक्षा रद्द करने की मांग को लेकर जमकर हंगामा किया.
छात्रों का हंगामा बढ़ता देख मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को पूरे मामले की जांच करने के निर्देश दिए. मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप के बाद पटना के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक की अगुआई में एक जांच दल गठित किया गया और जगह-जगह छापेमारी की गई और आयोग के सचिव सहित अन्य लोगों को गिरफ्तार किया.
उधर, पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने प्रश्न-पत्र लीक मामले को लेकर नीतीश सरकार पर हमला बोला है. उन्होंने कहा है कि एसआईटी का अनुमान है कि बीएसएससी परीक्षाओं का पर्चा लीक कराने में 200 करोड़ रुपये का खेल हुआ है. जिस रैकेट में 100 से ज्यादा मोबाइल नंबर का उपयोग कर हर परीक्षार्थी से दो से छह लाख रुपये तक वसूले गए हों, वह क्या सत्ता केंद्रों की हिस्सेदारी के बिना संभव हुआ होगा?"
इससे पूर्व भी बीते साल 12वीं परीक्षा में परिणाम घोषित होने के बाद टॉपर घोटला उजागर हुआ था. इसमें भी कई बड़े अधिकारियों की गिरफ्तारी हुई थी.
(इनपुट आईएएनएस से भी)
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