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This Article is From Jul 17, 2017

क्या तेजस्वी यादव की उल्टी गिनती शुरू हो गई है? लालू के दोनों बेटे नहीं जा रहे ऑफिस

राष्ट्रपति चुनाव के बाद अब सबकी निगाहें बिहार की राजनीति पर टिकी हैं. हर कोई जानना चाहता हैं कि क्या तेजस्वी यादव इस्तीफ़ा देंगे या नहीं.

क्या तेजस्वी यादव की उल्टी गिनती शुरू हो गई है? लालू के दोनों बेटे नहीं जा रहे ऑफिस
डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव के घर पर ही जरूरी फाइल मंगवाई जा रही हैं...
  • आरजेडी और जेडीयू के बीच मध्यस्थता की जिम्मेदारी कांग्रेस पर
  • लालू और नीतीश से कई दौर की बातचीत कर चुकी है प्रदेश कांग्रेस
  • लालू प्रसाद के घर छापेमारी को राजनीति से प्रेरित मानती है कांग्रेस
पटना: राष्ट्रपति चुनाव के बाद अब सबकी निगाहें बिहार की राजनीति पर टिकी हैं. हर कोई यही जानना चाहता हैं कि क्या उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव इस्तीफ़ा देंगे या नहीं. क्योंकि, सब जानते हैं कि महागठबंधन का भविष्य उनके इस्तीफ़े पर निर्भर करता है. फिलहाल, तेजस्वी यादव के इस्तीफ़े के लिए कांग्रेस पार्टी को ज़िम्मा दिया गया है.

बिहार कांग्रेस के अध्यक्ष अशोक चौधरी इस मुद्दे पर मध्यस्थता की भूमिका में लालू और नीतीश से कई दौर की बातचीत कर चुके हैं. लेकिन कांग्रेस ने लालू यादव के घर पर 7 जुलाई को हुई सीबीआई छापेमारी को राजनीति से प्रेरित बताया था वहीं अब तेजस्वी के मुद्दे पर कह रही है कि राजद को अपना रुख नरम कर महागठबंधन के हित में निर्णय लेना चाहिए.

मतलब साफ है कि कांग्रेस तेजस्वी का इस्तीफ़ा चाहती है लेकिन सार्वजनिक रूप से बोल नहीं सकती. क्योंकि खुद कांग्रेस में कई मिसाल हैं जहां नेता पर आरोप लगने के बावजूद वे सत्ता में पद पर बने रहे. कांग्रेस को मालूम है कि इस बार उनका वास्ता एक तरफ नीतीश कुमार से पड़ा है जो भ्रष्टाचार के मुद्दे पर कोई समझौता नहीं करते और दूसरी तरफ लालू यादव हैं जो कई मामलों में आरोपी और चारा घोटाले के एक मामले में दोषी क़रार दिए जाने के बाद भी भ्रष्ट आचरण करने से परहेज नहीं करते.

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लेकिन सवाल है कि जैसा नीतीश चाहते हैं वैसा तेजस्वी यादव सार्वजनिक रूप से प्रामाणिक तथ्यों के आधार पर सफाई क्यों नहीं दे रहे हैं. उधर, राष्ट्रीय जनता दल का कहना है कि उनकी पार्टी ने पिछले हफ़्ते ये निर्णय ले लिया कि तेजस्वी के इस्तीफ़ा का सवाल नहीं है और उनके नेतृत्व में सबको आस्था है.

अब जनता दल यूनाइटेड का कहना है कि उनकी पार्टी ने अब तक इस मुद्दे पर संयम से काम लेते हुए महागठबंधन धर्म निभाते हुए इस्तीफे की मांग नहीं की लेकिन ये अनिश्चित काल के लिए नहीं माना जा सकता.



जानकार मानते हैं कि नीतीश जल्दबाज़ी में कोई कार्रवाई नहीं करना चाहते. वे चाहते हैं कि बीच का कोई रास्ता निकल जाए. लेकिन राष्ट्रीय जनता दल उसी हालत में नीतीश कुमार से बात करना चाहती है जब तेजस्वी के अभयदान के बारे में पुख्ता कर दिया जाए. इन सबके बीच तेजप्रताप और तेजस्वी ने कार्यालय जाना छोड़ दिया है और उनके विभागों की महत्वपूर्ण फाइलें उनके घर पर जा रही हैं.
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