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This Article is From Apr 17, 2026

बिहार में सम्राट कैबिनेट विस्तार में देरी के आसार, मंत्री पद के दावेदारों को करना होगा इंतजार

बिहार में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार में देरी हो सकती है. सूत्रों के अनुसार, यह विस्तार पश्चिम बंगाल समेत अन्य राज्यों के विधानसभा चुनाव नतीजों के बाद होगा. फिलहाल विभागों का बंटवारा हो चुका है, मंत्रिपद के दावेदारों को इंतजार करना पड़ेगा.

बिहार में सम्राट कैबिनेट विस्तार में देरी के आसार, मंत्री पद के दावेदारों को करना होगा इंतजार
  • बिहार में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का मंत्रिमंडल विस्तार पांच राज्यों के चुनाव परिणाम आने के बाद किया जाएगा.
  • मंत्रिमंडल विस्तार में देरी का कारण भाजपा के कई बड़े नेता पश्चिम बंगाल चुनाव में व्यस्त रहना बताया गया है.
  • मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के पास गृह विभाग सहित कुल 29 विभागों की जिम्मेदारी दी गई है.
पटना:

बिहार में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अगुवाई में बनी नई सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार में देरी होने की संभावना है. सूत्रों के अनुसार, सम्राट कैबिनेट का विस्तार पश्चिम बंगाल समेत पांच राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश के विधानसभा चुनावों के नतीजे आने के बाद ही किया जा सकता है. इन चुनावों की मतगणना 4 मई को होनी है.

सूत्रों का कहना है कि बिहार भाजपा के कई बड़े नेता और संभावित मंत्री इस समय पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में व्यस्त हैं. इसी वजह से अब तक न तो मंत्रियों के नामों पर अंतिम चर्चा हुई है और न ही कोई सूची तैयार की गई है. यही कारण है कि फिलहाल मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के साथ केवल जेडीयू के दो नेताओं- विजय कुमार चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद यादव ने डिप्टी सीएम के रूप में शपथ ली है.

विभागों का बंटवारा पूरा

तीनों नेताओं के बीच विभागों का बंटवारा कर दिया गया है. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के पास गृह विभाग सहित कुल 29 विभाग रहेंगे. उनके पास गृह के अलावा पथ निर्माण, राजस्व, स्वास्थ्य, विधि, उद्योग, पर्यटन, आपदा प्रबंधन, कला-संस्कृति, सहकारिता, पर्यावरण और पंचायती राज जैसे अहम विभाग हैं.

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डिप्टी सीएम विजय कुमार चौधरी को जल संसाधन, संसदीय कार्य, भवन निर्माण, अल्पसंख्यक कल्याण, शिक्षा, ग्रामीण विकास और उच्च शिक्षा समेत 10 विभाग सौंपे गए हैं.

वहीं डिप्टी सीएम बिजेंद्र प्रसाद यादव को ऊर्जा, वित्त, वाणिज्य, समाज कल्याण, खाद्य एवं ग्रामीण कार्य समेत 8 विभागों की जिम्मेदारी मिली है.

बीजेपी ‘बड़ा भाई', जेडीयू ‘छोटा भाई'

सूत्रों के मुताबिक भाजपा और जेडीयू के बीच हुए समझौते के तहत अब सरकार में बीजेपी बड़ी भूमिका में और जेडीयू छोटी भूमिका में रहेगी. नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री रहते जिस राजनीतिक संतुलन का पालन होता था, वह अब उलट गया है. इसी फार्मूले के तहत भाजपा का मुख्यमंत्री और जेडीयू के दो डिप्टी सीएम बनाए गए हैं. मंत्रिमंडल विस्तार में भी इसी संतुलन को लागू किए जाने की संभावना है.

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मंत्रियों की संख्या का नया गणित

एनडीए में परंपरागत रूप से हर पांच विधानसभा सीट पर एक मंत्री बनाए जाने का फार्मूला लागू होता है. नीतीश कुमार के कार्यकाल में बीजेपी के दो डिप्टी सीएम और 16 मंत्री थे, जबकि जेडीयू के 15 मंत्री थे. सहयोगी दलों को भी प्रतिनिधित्व दिया गया था.

अब नए फार्मूले के तहत बीजेपी का सीएम और लगभग 15 मंत्री, जबकि जेडीयू के दो डिप्टी सीएम समेत करीब 16 मंत्री हो सकते हैं. हालांकि सूत्रों का कहना है कि यह संख्या कुछ आगे-पीछे हो सकती है और इस पर दोनों दलों के बीच बातचीत जारी है. सहयोगी दलों को भी पहले की तरह प्रतिनिधित्व देने पर सहमति बनी हुई है. एक वरिष्ठ नेता के अनुसार, जिन विभागों का कोटा जिस दल के पास है, उसी दल के मंत्रियों को वे विभाग दिए जाएंगे.

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