शुभ्रांशु चौधरी
शुभ्रांशु चौधरी बीबीसी के पूर्व पत्रकार हैं. वो छत्तीसगढ़ के लोकप्रिय अखबार 'देशबंधु' और ब्रिटिश अखबार 'द गार्डियन' में काम कर चुके है. वे आजकल मीडिया के लोकतंत्रीकरण के प्रयोग सीजीनेट स्वर से जुड़े हैं. मोबाइल फोन पर सामुदायिक रेडियो के दुनिया के इस पहले प्रयोग के लिए उन्हें 2014 में गूगल डिजिटल एक्टिविजम अवार्ड मिला था. यह प्रयोग उन इलाकों में जहां मोबाइल फोन का सिग्नल नहीं है, वहां बुल्टू (ब्लूटूथ) रेडियो की तरह विकसित हुआ. अब वो इसे आर्टिफिसियल इंटेलिजेंस रेडियो (AI-R) की तरह विकसित करने का प्रयास कर रहे हैं. वो पिछले एक दशक से नई शांति प्रक्रिया से जुड़े रहे हैं, जिसने मध्य भारत में माओवादी समस्या के समाधान में महत्वपूर्ण योगदान दिया. उन्होंने इस समस्या पर 'उसका नाम वासु नहीं: माओवादी दुनिया की एक पड़ताल' शीर्षक से एक किताब भी लिखी है.
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अब एक नई समस्या का सामना कर रहे हैं आत्मसमर्पण करने वाले माओवादी, सरकार से मांग रहे हैं मदद
तेलंगाना में आत्मसमर्पण करने वाले छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले के एक गांव के आदिवासी युवा की कहानी जो अब अपने गांव में रहना चाहता है. लेकिन गांव वाले नहीं चाहते हैं कि वो वापस आए.
- जून 08, 2026 16:25 pm IST
- Written by: शुभ्रांशु चौधरी
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छत्तीसगढ़ : माओवादियों के जाने के बाद क्या बीर सिंह अपने गांव लौट पाएगा, गांव वाले क्यों कर रहे हैं विरोध
माओवादी हिंसा के कारण छत्तीसगढ़ में हजारों लोगों को अपना घर-बार छोड़ना पड़ा था. लेकिन अब जब माओवादियों का सरकार ने सफाया कर दिया है तो विस्थापित लोग अपने गांव वापस नहीं लौट पा रहे हैं, ऐसा क्यों हो रहा है, बता रहे हैं वरिष्ठ पत्रकार शुभ्रांशु चौधरी.
- जून 01, 2026 18:42 pm IST
- Written by: शुभ्रांशु चौधरी
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माओवादियों के जाने के बाद बस्तर में बांस के बीच से निकल सकती है अर्थव्यवस्था की नई राह
नरेंद्र मोदी सरकार की अथक कोशिशों के बाद से छत्तीसगढ़ के बस्तर से अब माओवादियों का सफाया हो चुका है. अब वहां के विकास में बांस, हथकरघा और ग्राम स्वराज की क्या भूमिका हो सकती है, बता रहे हैं पत्रकार शुभ्रांशु चौधरी.
- मई 27, 2026 11:46 am IST
- Written by: शुभ्रांशु चौधरी