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This Article is From Jan 19, 2017

UPelections: SP से गठबंधन नहीं होने पर क्‍या इस विकल्‍प को आजमाएंगे अजित सिंह...

UPelections: SP से गठबंधन नहीं होने पर क्‍या इस विकल्‍प को आजमाएंगे अजित सिंह...
अजित सिंह और सपा के बीच गठबंधन की संभावनाएं धूमिल हो रही हैं.
लखनऊ: सपा, कांग्रेस और रालोद के बीच गठबंधन की चर्चाओं से ये बात निकलकर आ रही है कि सपा ने रालोद से गठबंधन करने से इनकार कर दिया है. सपा के नेता किरणमय नंदा ने कहा है कि उनकी पार्टी का गठबंधन केवल कांग्रेस के साथ होगा. इससे साफ हो रहा है कि अजित सिंह के नेतृत्‍व वाला राष्‍ट्रीय लोकदल(रालोद) इस गठबंधन का हिस्‍सा नहीं होगा. पश्चिमी यूपी के जाट बाहुल्‍य इलाके में रालोद का अच्‍छा प्रभाव माना जाता है और पिछली बार यहां से पार्टी ने नौ सीटें जीती थीं.

सूत्रों के मुताबिक 2013 मुजफ्फरनगर दंगों की पृष्‍ठभूमि में सपा को रालोद से गठजोड़ करने में दिक्‍कत महसूस हो रही है. मुजफ्फरनगर (जिसे अजीत सिंह का गढ़ माना जाता है) दंगों के बाद सपा का जाट पार्टी से हाथ मिलाने का मतलब इलाके के मुसलमानों को खुद से दूर करना है. बता दें कि हिंदू-मुसलमानों के बीच हुए तनाव में करीब 60 लोग मारे गए थे और 40 हज़ार से ज्यादा लोग बेघर हो गए थे. उधर बसपा ने दलित-मुस्लिम फॉर्मूले के तहत अबकी बार सर्वाधिक 97 मुस्लिम प्रत्‍याशियों को मैदान में उतारा है. सपा को डर है कि इस गठबंधन की वजह से तीव्र ध्रुवीकरण होने की स्थिति में उसका परंपरागत मुस्लिम मतदाता खिसककर बसपा के पाले में जा सकता है.
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न अजित सिंह महागठबंधन में हैं और न सपा, टीम अखिलेश ने कहा
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ऐसे में सियासी हलकों में कहा जा रहा है कि सपा से गठबंधन नहीं होने पर क्‍या अजित सिंह, बीजेपी के साथ हाथ मिला सकते हैं. यह इसलिए भी अहम है क्‍योंकि यदि ध्रुवीकरण होता है और रालोद-बीजेपी गठबंधन होता है तो इसका लाभ बीजेपी को मिल सकता है. हालांकि जानकारों के मुताबिक इस बात की संभावना क्षीण ही दिखती है क्‍योंकि पश्चिमी यूपी में पहले और दूसरे चरणों में ही मतदान होना है और बीजेपी पहले ही यहां से अपने प्रत्‍याशियों को घोषित कर चुकी है. ऐसे में अब उसके पास रालोद से गठबंधन के लिहाज से ज्‍यादा विकल्‍प नहीं हैं.

सूत्रों के मुताबिक सपा और कांग्रेस से गठबंधन नहीं होने पर रालोद अकेले दम पर चुनाव लड़ने पर विचार कर रही है. गठबंधन नहीं होने की एक बड़ी वजह सीटों की संख्‍या पर फंसा पेंच भी बताया जा रहा है. रालोद किसी भी सूरत में 30-35 सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती है और गठबंधन के इच्‍छुक दल उसको 20 से ज्‍यादा सीटें देने के इच्‍छुक नहीं दिखते. बीजेपी के साथ गठबंधन की स्थिति में भी यही पेंच फंस सकता है.

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