
सीटों को लेकर सपा-कांग्रेस में मची रार में सोनिया गांधी के आने से कांग्रेसियों में आशा की किरण जगी है
नई दिल्ली:
उत्तर प्रदेश में सीटों के बंटवारे को लेकर समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन की तमाम उम्मीदों पर पानी फिरता देख कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने इस मामले में दखल दिया है. सोनिया गांधी के मामले में हस्तकक्षेप करने से कांग्रेस को यूपी में खत्म होती उम्मीदों को फिर से आशा की किरण नजर आई है. कयास लगाए जा रहे हैं कि आज दोपहर बाद तक सारी तस्वीर साफ हो जाएगी.
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, सोनिया को करीबी सपा से संपर्क स्थापिक करके इस बात की कोशिश में लगे हैं कि उसे अब कम से कम 104 सीटें ही मिल जाएं. क्योंकि शनिवार को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कांग्रेस को 99 सीटें ही देने का प्रस्ताव रखते हुए कहा था कि 'जोड़ लो या फिर तोड़ दो'.
जानकार बताते हैं कि अखिलेश यादव और प्रशांत किशोर की एक बार फिर सीटों के मुद्दे पर बात हुई है. इस बातचीत का नतीजा क्या रहा, यह साफ नहीं हो पाया है. वहीं प्रियंका गांधी भी नई दिल्ली में अपने स्तर पर सपा आलाकमान से बातचीत कर रही हैं.
सूत्रों के मुताबिक जब मुलायम सिंह से अखिलेश का झगड़ा चल रहा था और लग रहा था कि दोनों गुट अलग लड़ेंगे तब सपा 140 सीटें देने के लिए तैयार थी. बाद में सपा ने 121 सीटों की पेशकश की लेकिन आज की स्थिति में सपा 100 से अधिक सीटें देना चाहती है.
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष किरणमय नंदा ने कल कहा था कि कांग्रेस को 2012 के विधानसभा चुनाव में 54 सीटों पर समाजवादी पार्टी से ज्यादा वोट मिले थे. लिहाजा वे गंठबंधन में 54 सीटों को ही हकदार हैं. पार्टी ने उन्हें 25-30 सीटें और ज्यादा दे सकती है.
समाजवादी पार्टी का सिंबल अखिलेश को मिलने से उनकी पोजिशन बहुत मजबूत हुई है. उसके पहले ही पार्टी के ज्यादातर लोग उनके गुट में आ गए थे लेकिन सिंबल फ्रीज होने का डर था. और समझा जा रहा था कि ऐसी हालत में अखिलेश और मुलायम गुट अलग-अलग सिंबल पर आमने सामने चुनाव लड़ेंगे. ऐसे में मुस्लिम वोट के बंटवारे का अंदेशा था जिससे अखिलेश की हालत कमजोर थी. लेकिन अब पार्टी का नाम, सिंबल, झंडा सब अखिलेश के साथ है और मुलायम चुनाव आयोग में लड़ाई हारने के बाद अपने उम्मीदवार मैदान में उतारने का इरादा छोड़ चुके हैं. ऐसे में अखिलेश मजबूत हुए हैं और कांगेस से सख्त सौदेबाजी कर रहे हैं.
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, सोनिया को करीबी सपा से संपर्क स्थापिक करके इस बात की कोशिश में लगे हैं कि उसे अब कम से कम 104 सीटें ही मिल जाएं. क्योंकि शनिवार को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कांग्रेस को 99 सीटें ही देने का प्रस्ताव रखते हुए कहा था कि 'जोड़ लो या फिर तोड़ दो'.
जानकार बताते हैं कि अखिलेश यादव और प्रशांत किशोर की एक बार फिर सीटों के मुद्दे पर बात हुई है. इस बातचीत का नतीजा क्या रहा, यह साफ नहीं हो पाया है. वहीं प्रियंका गांधी भी नई दिल्ली में अपने स्तर पर सपा आलाकमान से बातचीत कर रही हैं.
सूत्रों के मुताबिक जब मुलायम सिंह से अखिलेश का झगड़ा चल रहा था और लग रहा था कि दोनों गुट अलग लड़ेंगे तब सपा 140 सीटें देने के लिए तैयार थी. बाद में सपा ने 121 सीटों की पेशकश की लेकिन आज की स्थिति में सपा 100 से अधिक सीटें देना चाहती है.
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष किरणमय नंदा ने कल कहा था कि कांग्रेस को 2012 के विधानसभा चुनाव में 54 सीटों पर समाजवादी पार्टी से ज्यादा वोट मिले थे. लिहाजा वे गंठबंधन में 54 सीटों को ही हकदार हैं. पार्टी ने उन्हें 25-30 सीटें और ज्यादा दे सकती है.
समाजवादी पार्टी का सिंबल अखिलेश को मिलने से उनकी पोजिशन बहुत मजबूत हुई है. उसके पहले ही पार्टी के ज्यादातर लोग उनके गुट में आ गए थे लेकिन सिंबल फ्रीज होने का डर था. और समझा जा रहा था कि ऐसी हालत में अखिलेश और मुलायम गुट अलग-अलग सिंबल पर आमने सामने चुनाव लड़ेंगे. ऐसे में मुस्लिम वोट के बंटवारे का अंदेशा था जिससे अखिलेश की हालत कमजोर थी. लेकिन अब पार्टी का नाम, सिंबल, झंडा सब अखिलेश के साथ है और मुलायम चुनाव आयोग में लड़ाई हारने के बाद अपने उम्मीदवार मैदान में उतारने का इरादा छोड़ चुके हैं. ऐसे में अखिलेश मजबूत हुए हैं और कांगेस से सख्त सौदेबाजी कर रहे हैं.
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