
हम अपने आसपास जब कभी सांप को देखते हैं तो उसे मार डालते हैं, लेकिन वैशाली उन्हें काबू में कर जंगलों में छोड़ आती हैं.
मुंबई:
वाइल्ड लाइफ टीवी कार्यक्रमों या रियलिटी शो में खतरनाक सांप को देखने भर से कई बार हम सिहर जाते हैं, लेकिन मुंबई में एक ऐसी महिला है जो खतरनाक सांपों को चुटकियों में पकड़ लेती हैं. इस स्नेक लेडी का नाम है वैशाली चव्हाण. इस बहादुर महिला का सांपों से बेहद लगाव, इसलिए उसने इनकी रक्षा का बीड़ा उठाया है. हम अपने आसपास जब कभी सांप को देखते हैं तो उसे मार डालते हैं, लेकिन वैशाली उन्हें काबू में कर जंगलों में छोड़ आती हैं. महाराष्ट्र के पालगढ़ जिले के ब्वॉयसर की एक फैक्ट्री में सांप मिलने की सूचना मिलते ही वैशाली वहां पहुंची और उसे पकड़ लिया.
फैक्ट्री में सांप पकड़ने के अनुभव को साझा करते हुए वैशाली कहती हैं, 'सांप को बाहर निकालने के लिए बड़ी-बड़ी मोटर को हटाना बड़ी चुनौती थी. इसके लिए फैक्ट्री के मजदूरों से मदद मांगी गई तो उन्होंने साफ मना कर दिया.'
एक अन्य अनुभव को याद करते हुए वैशाली कहती हैं, मैं अपनी बेटी के स्कूल में सांप पकड़ने गई थी. तब मैं सांप पकड़ने वाले एक्सपर्ट की सहयोगी थी. एक्सपर्ट ने मुझे कांच की बोतल पकड़ने को कहा था. उसने कहा कि महिलाएं कॉकरोच देखकर भी डरती हैं तो आप सांप कैसे पकड़ेगी. उस दिन के बाद मैंने फैसला किया कि वह सांप से कभी नहीं डरेंगी.'
इस घटना के बाद से वैशालीसांप पकड़ने की कला में निपुण हो गईं. उनकी देखा देखी उनकी बेटी भी जीव जंतुओं से प्यार करने लगी है. जब कोई स्कूल में किसी कीट को मारने लगते हैं तो वह उसे पकड़कर अपने घर ले आती है.
मालूम हो कि मुंबई के जंगलों में आए दिन इंसानों का सांपों से मुकाबला होता रहता है. ऐसी स्थिति में लोग वैशाली को याद करते हैं. वैशाली की तर्ज पर मानसी नथवानी भी थाने में सांप पकड़ने वाली महिला के तौर पर सक्रिय थी और वह हर रोज तकरीबन 7 से 8 कॉल रीसीव करती थी. पिछले मानसून में उन्होंने पांच कोबरा सांप पकड़े थे.
एक अन्य सांप कपड़ने के एक्सपर्ट गार्गी विजयराघवन की कहानी भी काफी अलग है, गार्गी बचपन में सांप को बचाने का काम करना शुरु करना चाहती थी और बाद में उन्होंने इसे ही अपना कैरियर बनाया, वह बार्क कालोनी में सांप पकड़ने का काम करती हैं. विजयवर्गीज के पहले सांप को बचाने की कहानी काफी अलग है, उनके पिता को एक कोबरा ने उस वक्त काट लिया था जब वह उसे अपनी मच्छरदानी से हटाने का प्रयास कर रहे थे, लेकिन एक तरफ जहां गार्गी के पिता आईसीयू में भर्ती थे तो दूसरी तरफ गार्गी उस सांप को बचाने के लिए वापस घर पहुंच गई.
फैक्ट्री में सांप पकड़ने के अनुभव को साझा करते हुए वैशाली कहती हैं, 'सांप को बाहर निकालने के लिए बड़ी-बड़ी मोटर को हटाना बड़ी चुनौती थी. इसके लिए फैक्ट्री के मजदूरों से मदद मांगी गई तो उन्होंने साफ मना कर दिया.'
एक अन्य अनुभव को याद करते हुए वैशाली कहती हैं, मैं अपनी बेटी के स्कूल में सांप पकड़ने गई थी. तब मैं सांप पकड़ने वाले एक्सपर्ट की सहयोगी थी. एक्सपर्ट ने मुझे कांच की बोतल पकड़ने को कहा था. उसने कहा कि महिलाएं कॉकरोच देखकर भी डरती हैं तो आप सांप कैसे पकड़ेगी. उस दिन के बाद मैंने फैसला किया कि वह सांप से कभी नहीं डरेंगी.'
इस घटना के बाद से वैशालीसांप पकड़ने की कला में निपुण हो गईं. उनकी देखा देखी उनकी बेटी भी जीव जंतुओं से प्यार करने लगी है. जब कोई स्कूल में किसी कीट को मारने लगते हैं तो वह उसे पकड़कर अपने घर ले आती है.
मालूम हो कि मुंबई के जंगलों में आए दिन इंसानों का सांपों से मुकाबला होता रहता है. ऐसी स्थिति में लोग वैशाली को याद करते हैं. वैशाली की तर्ज पर मानसी नथवानी भी थाने में सांप पकड़ने वाली महिला के तौर पर सक्रिय थी और वह हर रोज तकरीबन 7 से 8 कॉल रीसीव करती थी. पिछले मानसून में उन्होंने पांच कोबरा सांप पकड़े थे.
एक अन्य सांप कपड़ने के एक्सपर्ट गार्गी विजयराघवन की कहानी भी काफी अलग है, गार्गी बचपन में सांप को बचाने का काम करना शुरु करना चाहती थी और बाद में उन्होंने इसे ही अपना कैरियर बनाया, वह बार्क कालोनी में सांप पकड़ने का काम करती हैं. विजयवर्गीज के पहले सांप को बचाने की कहानी काफी अलग है, उनके पिता को एक कोबरा ने उस वक्त काट लिया था जब वह उसे अपनी मच्छरदानी से हटाने का प्रयास कर रहे थे, लेकिन एक तरफ जहां गार्गी के पिता आईसीयू में भर्ती थे तो दूसरी तरफ गार्गी उस सांप को बचाने के लिए वापस घर पहुंच गई.
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