Viral Post: मशहूर स्टैंड-अप कॉमेडियन अभिजीत गांगुली ने मुंबई की अव्यवस्थित जीवनशैली और अंतहीन निर्माण कार्यों से परेशान होकर नौ साल बाद इस शहर को अलविदा कह दिया है. वह अब अपने परिवार के साथ बेंगलुरु शिफ्ट हो गए हैं. अभिजीत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर अपना दर्द बताते हुए लिखा कि मुंबई में बुनियादी सुविधाओं के नाम पर केवल मंत्रियों और ठेकेदारों की जेबें भरने के लिए लगातार तोड़-फोड़ चलती रहती है. सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था और बसों में भारी कटौती सरकार की गैर-गंभीरता को दर्शाती है. उन्होंने प्रदूषण और आक्रामक माहौल के कारण दिल्ली-एनसीआर को खारिज कर दिया. बेंगलुरु में बेहतर हरियाली, कम किराया, अच्छे स्कूलों और अनुकूल माहौल को उन्होंने मुंबई से कहीं बेहतर विकल्प माना. उनकी इस पोस्ट पर सोशल मीडिया यूजर्स में तीखी बहस छिड़ गई है, जहां कुछ लोग उनके फैसले का समर्थन कर रहे हैं, तो वहीं कुछ लोग मुंबई के बुनियादी ढांचे के विकास को जरूरी बता रहे हैं.
'सरकार गंभीर होती हो बसें बंद नहीं करती'
अभिजीत ने आगे कहा, 'मैं समझता हूं कि आने-जाने की सुविधा के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट की जरूरत है. लेकिन अगर सरकार इसे लेकर गंभीर होती, तो वह बसों की संख्या में इतनी भारी कटौती नहीं करती. बल्कि, इसे तो हमेशा बढ़ाया जाना चाहिए. विदेशों के किसी भी अच्छे शहर में एक मजबूत बस व्यवस्था होती है, जहां समाज के हर वर्ग के लोग बसों में सफर करते हैं. मगर, यहां स्थिति बिल्कुल उलट है.
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'ऐसा लगा जैसे जिंदगी हार्ड मोड पर चली गई'
अभिजीत के मुताबिक, 'मुंबई में रहना ऐसा लगता था जैसे जिंदगी हार्ड मोड पर चल रही हो. और अब जब बच्चा भी है, तो मुझे थोड़ी हरियाली और खुली जगह चाहिए थी. साथ ही, ऐसे स्कूल चाहिए थे जहां बच्चों के खेलने-कूदने के लिए काफी जगह हो. 9 साल पहले जब मैं दिल्ली से यहां आया था, तब मुझे यह शहर बहुत पसंद था. लेकिन कुछ साल पहले, खासकर लॉकडाउन के बाद, हालात बदल गए. मुझे लगता है कि मुंबई तब तक रहने के लिए अच्छी जगह थी, जब तक दिल्ली से आया है क्या? कहना एक ताना या बेइज्जती माना जाता था. अब देखते हैं आगे क्या होता है.'
'मुंबई से बेहतर लगा बेंगलुरु'
अभिजीत ने माना कि मुंबई की तरह बेंगलुरु में भी कंस्ट्रक्शन की समस्या है. लेकिन उन्होंने कहा, 'यहां अभी भी बहुत सारे पेड़ हैं. शहर का 50% हिस्सा मिलिट्री कैंटोनमेंट है, और वहां की हरियाली शहर को जिंदा रखती है. इसके अलावा, यहां स्कूल बेहतर हैं, घर अच्छे हैं और किराया भी कम है. सच कहूं तो, मुंबई के बाद यहां सब कुछ सस्ता ही लगता है. मुझे पता है कि यह कोयंबटूर जैसा तो नहीं है, लेकिन हाल ही में यहां आने-जाने और चीजों को परखने के बाद मुझे यह मुंबई से कहीं बेहतर लगा.'
'NCR को पॉल्यूशन की वजह से बोला ना'
उन्होंने आखिर में कहा, 'ज्यादातर कॉमेडियंस के लिए चाहे अच्छी बात हो या बुरी, एनसीआर, बेंगलुरु और मुंबई ही काम के लिए मुख्य विकल्प हैं. अगर पुणे या हैदराबाद में आपकी ऑडियंस है, तो उन्हें भी गिना जा सकता है. लेकिन एनसीआर में प्रदूषण की स्थिति को देखते हुए बच्चे के साथ रहना मुश्किल है. साथ ही, मुंबई में रहने के बाद, NCR का माहौल बिना किसी वजह के थोड़ा आक्रामक लगता है. इसीलिए मैं अपने परिवार से बेंगलुरु शिफ्ट हो गया हूं. देखते हैं आगे क्या होता है.'
यहां पढ़ें पूरी पोस्ट:-
Sorry, should have added where I've moved to. Bangalore. Know it's not exactly Coimbatore, but still on recent evaluations and visits had been finding it far better than Mumbai. And for most comics, fortunately/unfortunately, NCR Bangalore Mumbai are the only plausible options (Pune and Hyderabad next if you have audience base there). NCR can't do with a baby with the pollution situation. Also post living in Mumbai, NCR seems a tad bit combative pointlessly. Bangalore I know also has the construction problem but there's still a lot of trees, since 50% of the city is a military cantonment and the unseen greenery keeps the city alive. Plus schools are better, houses better and rent cheaper (everything feels cheaper after Mumbai tbh). Let's see aage..🤞 Brb, on way to my kannada lesson...
— Abijit Ganguly (@AbijitG) October 19, 2026
सोशल मीडिया पर लोगों ने दिए अलग-अलग रिएक्शन्स
अभिजीत गांगुली की इस पोस्ट को पढ़कर लोग सोशल मीडिया पर अलग-अलग रिएक्शन्स दे रहे हैं. कुछ लोग उनकी लिखी बातों से सहमति जता रहे हैं, और बेंगलुरु में उनका स्वागत कर रहे हैं. वहीं, कुछ लोग अपनी-अपनी राय रखते हुए अभिजीत को मुंबई की उन लॉकेशन के बारे में बताया जहां आज भी वो सभी चीजें मिलती हैं जिसकी तलाश में वो बेंगलुरु गए हैं.'
एक यूजर ने लिखा, 'अगर इससे आपको खुशी मिलती है, तो मैं भी आपके लिए खुश हूं. हालांकि, पिछले कुछ सालों में शहर में जो निर्माण कार्य हुए हैं - जैसे मेट्रो, सड़कें और नए उपनगर - उनमें से बहुत कुछ तो काफी पहले ही हो जाना चाहिए था. रोजाना सफर करने वालों को आने-जाने में आसानी के लिए इनकी जरूरत होती है. आपका काम ऐसा है कि आपके लिए रोजाना आने-जाने के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर की कोई खास जरूरत नहीं है.'
दूसरे यूजर ने लिखा, 'मुंबई का हाल अभी एकदम बुरा है. यहां न तो ठीक से सांस ली जा सकती है, न चला जा सकता है, और न ही गाड़ी चलाई जा सकती है. सब कुछ एकदम बकवास है. काश मैं भी यहां से निकल पाता.'
तीसरे यूजर ने लिखा, 'यह सच में चिंता की बात है, और मैं आपसे सहमत हूं. लेकिन कोई बेवकूफ यहां आकर कहेगा कि आप मुंबई को कमतर दिखा रहे हैं. कुछ कहेंगे कि कुछ समय से चीजें बदल जाएंगे. लेकिन मैं मानता हूं कि चीजें ठीक नहीं होगी.'
चौथे यूजर ने लिखा, 'मुंबई शहर में अभी भी कुछ ऐसी जगहें हैं जहां आपको काफी पेड़-पौधे देखने को मिल जाएंगे. जैसे कि वालकेश्वर, शिवाजी पार्क, दादर हिंदू कॉलोनी, माटुंगा और फाइव गार्डन. आपको इन विकल्पों पर विचार करना चाहिए था. अच्छे स्कूल, शिक्षण संस्थान, स्वास्थ्य सेवाएं और सबसे जरूरी सुरक्षा.'
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