विज्ञापन
This Article is From Mar 30, 2014

भारतीय मूल के किशोर ने अमेरिका को बताया, फॉन्ट बदलकर कैसे बचाएं 40 करोड़ डॉलर

भारतीय मूल के किशोर ने अमेरिका को बताया, फॉन्ट बदलकर कैसे बचाएं 40 करोड़ डॉलर
न्यूयॉर्क:

भारतीय मूल के 14 साल के एक लड़के ने अमेरिका के सामने एक अद्भुत योजना पेश की है, जिससे आधिकारिक दस्तावेजों में इस्तेमाल किए जाने वाले फॉन्ट को बदल देने मात्र से ही हर साल लगभग 40 करोड़ डॉलर की राशि बचाई जा सकती है।

पिट्सबर्ग क्षेत्र के एक मिडिल स्कूल में पढ़ने वाले सुवीर मीरचंदानी ने दावा किया कि यदि संघीय सरकार गारमोंड फॉन्ट का इस्तेमाल करती है, तो यह विशेष तौर पर सालाना करीब 13.6 करोड़ डॉलर की बचत कर सकती है, जो स्याही पर सालाना खर्च होने वाले अनुमानित 46.7 करोड़ डॉलर से 30 प्रतिशत कम है। यदि राज्य सरकारें भी इस बदलाव को कार्यान्वित करती हैं, तो 23.4 करोड़ डॉलर की अतिरिक्त राशि बचाई जा सकती है।

मीरचंदानी ने कहा कि उसके मन में यह विचार तब आया, जब वह अपने स्कूल में विज्ञान मेला परियोजना के तहत व्यर्थ खर्च में कटौती करने और धन बचाने की सोच रहा था। उसने अपने प्रयोग के तहत शिक्षकों के हैंडआउट्स के बिना बारी के (रैंडम) नमूने लिए और आम तौर पर सर्वाधिक इस्तेमाल होने वाले ई, टी, ए तथा आर जैसे अक्षरों पर ध्यान केंद्रित किया।

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
सुवीर मीरचंदानी, गारमोंड फॉन्ट, कंप्यूटर फॉन्ट, अमेरिका, Suvir Mirchandani, Garamond Font, USA