नई दिल्ली:
बेहद गंभीर मुद्रा अपनाए रखने वाले वित्तमंत्री पी चिदंबरम का 'हास्य बोध' भी काफी सुविचारित होता है और अपने बजट भाषण में उन्होंने इसका परिचय भी दिया। उन्होंने लोकसभा में वर्ष 2013-14 का आम बजट पेश करते हुए बीच-बीच में हंसी का तड़का भी लगाया और अर्थशास्त्र के आंकड़ों से भारी भरकम हुए माहौल को हल्का करने की कोशिश की।
लग्जरी कारों, मोटरसाइकिलों, याच और लग्जरी नौकाओं पर शुल्क बढ़ाए जाने की भूमिका बांधते हुए वित्तमंत्री हल्का सा मुस्कुराए और कहा कि भारत में एक ऐसा धनी वर्ग है, जो महंगी आयातित वस्तुओं का उपभोग करता है। मुझे विश्वास है कि यह वर्ग थोड़ा और शुल्क भुगतान करने पर बुरा नहीं मानेगा। कई सदस्य उनकी इस भूमिका पर मुस्कुराते देखे गए।
इसी तरह, चिदंबरम ने सिगरेट, सिगार, चूरट आदि पर उत्पाद शुल्क बढ़ाने की बात रखने से पहले भी भूमिका बांधी। वह हल्का सा मुस्कराए और कहा, साधन जुटाने की बात आती है, तो एक वित्तमंत्री क्या करता है? इसका जवाब है सिगरेट। मैं सिगरेट पर विशेष उत्पाद शुल्क बढ़ाने का प्रस्ताव करता हूं।
अपने बजट भाषण में वित्तमंत्री ने तीन महान हस्तियों का नाम लिया। उन्होंने शुरुआत में नोबेल पुरस्कार अर्थशास्त्री जोसेफ स्टिगलिट्ज की पंक्तियों को उद्धृत किया, तो वहीं भाषण का समापन अपने पसंदीदा कवि संत तिरूवल्लुवर तथा स्वामी विवेकानंद की पंक्तियों को उद्धृत करते हुए किया।
उन्होंने तिरूवल्लुवर की जिन पंक्तियों का जिक्र किया उनका अर्थ था, पूरी स्पष्टता के साथ आंखें जिसे सही देखती हैं, उसे दृढ़ इच्छाशक्ति और मजबूत इरादों के साथ इंसान को हासिल करना चाहिए। इसी प्रकार उन्होंने स्वामी विवेकानंद का उल्लेख करते हुए कहा, आप जो भी ताकत और ऊर्जा चाहते हैं, वह आपके भीतर है, इसलिए अपना भविष्य खुद बनाओ।
लग्जरी कारों, मोटरसाइकिलों, याच और लग्जरी नौकाओं पर शुल्क बढ़ाए जाने की भूमिका बांधते हुए वित्तमंत्री हल्का सा मुस्कुराए और कहा कि भारत में एक ऐसा धनी वर्ग है, जो महंगी आयातित वस्तुओं का उपभोग करता है। मुझे विश्वास है कि यह वर्ग थोड़ा और शुल्क भुगतान करने पर बुरा नहीं मानेगा। कई सदस्य उनकी इस भूमिका पर मुस्कुराते देखे गए।
इसी तरह, चिदंबरम ने सिगरेट, सिगार, चूरट आदि पर उत्पाद शुल्क बढ़ाने की बात रखने से पहले भी भूमिका बांधी। वह हल्का सा मुस्कराए और कहा, साधन जुटाने की बात आती है, तो एक वित्तमंत्री क्या करता है? इसका जवाब है सिगरेट। मैं सिगरेट पर विशेष उत्पाद शुल्क बढ़ाने का प्रस्ताव करता हूं।
अपने बजट भाषण में वित्तमंत्री ने तीन महान हस्तियों का नाम लिया। उन्होंने शुरुआत में नोबेल पुरस्कार अर्थशास्त्री जोसेफ स्टिगलिट्ज की पंक्तियों को उद्धृत किया, तो वहीं भाषण का समापन अपने पसंदीदा कवि संत तिरूवल्लुवर तथा स्वामी विवेकानंद की पंक्तियों को उद्धृत करते हुए किया।
उन्होंने तिरूवल्लुवर की जिन पंक्तियों का जिक्र किया उनका अर्थ था, पूरी स्पष्टता के साथ आंखें जिसे सही देखती हैं, उसे दृढ़ इच्छाशक्ति और मजबूत इरादों के साथ इंसान को हासिल करना चाहिए। इसी प्रकार उन्होंने स्वामी विवेकानंद का उल्लेख करते हुए कहा, आप जो भी ताकत और ऊर्जा चाहते हैं, वह आपके भीतर है, इसलिए अपना भविष्य खुद बनाओ।
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