
प्रतीकात्मक तस्वीर
खगोल वैज्ञानिकों ने किसी अन्य सोलर सिस्टम में मौजूद एक ऐसे प्लेनेट को खोजकर तस्वीर ली है जिससे हमारे जुपिटर जैसे ग्रहों के बनने के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी हाथ लगने की उम्मीद है। हाल ही में जारी की गई एक स्टडी में यह कहा गया है।
वैज्ञानिकों ने चाइल में एक टेलिस्कोप के टॉप पर सेट किए गए नए जेमिनी प्लेनेट इमेजर के प्रयोग से इस ग्रह को खोजा। इसका नाम रखा गया 51 Eridani b। यह धरती से 96 प्रकाश वर्ष दूरी पर स्थित है। यह सूरज जैसे एक युवा ग्रह के चक्कर काटता है और जुपिटर से दोगुना बड़ा है। यह उन सबसे छोटे ग्रहों में से एक है जो अपने सोलर सिस्टम से इतर पाए गए हैं और जिनकी तस्वीर ली जा सकी है।
टेलिस्कोप ने जो देखा, उसके मुताबिक- यह अपने जन्म के 20 मिलियन सालों से लगातार गर्मी ही रेडियेट कर रहा है। उस ग्रह से इंफ्रारेड लाइट पैदा हो रही है। स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के एस्ट्रॉनॉमर मैकिनटोश और उनके साथियों द्वारा साइंस जरनल में इस हफ्ते के इश्यू में छपे लेख के मुताबिक, 51 Eri b से ऐसे ग्रहों को विस्तार से पढ़ने का मौका मिलता है जो अब भी अपने निर्माण की शुरुआती परिस्थितियों से प्रभावित हो।
इस जुपिटर जैसे ग्रह के वातावरण में मेथेन गैस सर्वाधिक पाई गई। इस खोज से वैज्ञानिकों को यह भी पता चल सकने के लिए कुछ संकेत मिलेंगे कि ऐसे गैस के बड़े प्लेनेट्स आखिर बनते कैसे हैं। एक स्टेटमेंट में यूनिवर्सिटी ऑफ एरिजोना के वैज्ञानिक ट्रैविस बार्मन ने कहा कि यह खरबों साल पहले जुपिटर जैसा लगता था, 51 Eri b वैसा ही लगने वाले ग्रहों में शायद यह सबसे युवा ग्रह है। जो, हमारे ग्रहों के बनने की पहेली को सुलझाने की दिशा में महत्वपूर्ण लग रहा है।
वैज्ञानिकों ने चाइल में एक टेलिस्कोप के टॉप पर सेट किए गए नए जेमिनी प्लेनेट इमेजर के प्रयोग से इस ग्रह को खोजा। इसका नाम रखा गया 51 Eridani b। यह धरती से 96 प्रकाश वर्ष दूरी पर स्थित है। यह सूरज जैसे एक युवा ग्रह के चक्कर काटता है और जुपिटर से दोगुना बड़ा है। यह उन सबसे छोटे ग्रहों में से एक है जो अपने सोलर सिस्टम से इतर पाए गए हैं और जिनकी तस्वीर ली जा सकी है।
टेलिस्कोप ने जो देखा, उसके मुताबिक- यह अपने जन्म के 20 मिलियन सालों से लगातार गर्मी ही रेडियेट कर रहा है। उस ग्रह से इंफ्रारेड लाइट पैदा हो रही है। स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के एस्ट्रॉनॉमर मैकिनटोश और उनके साथियों द्वारा साइंस जरनल में इस हफ्ते के इश्यू में छपे लेख के मुताबिक, 51 Eri b से ऐसे ग्रहों को विस्तार से पढ़ने का मौका मिलता है जो अब भी अपने निर्माण की शुरुआती परिस्थितियों से प्रभावित हो।
इस जुपिटर जैसे ग्रह के वातावरण में मेथेन गैस सर्वाधिक पाई गई। इस खोज से वैज्ञानिकों को यह भी पता चल सकने के लिए कुछ संकेत मिलेंगे कि ऐसे गैस के बड़े प्लेनेट्स आखिर बनते कैसे हैं। एक स्टेटमेंट में यूनिवर्सिटी ऑफ एरिजोना के वैज्ञानिक ट्रैविस बार्मन ने कहा कि यह खरबों साल पहले जुपिटर जैसा लगता था, 51 Eri b वैसा ही लगने वाले ग्रहों में शायद यह सबसे युवा ग्रह है। जो, हमारे ग्रहों के बनने की पहेली को सुलझाने की दिशा में महत्वपूर्ण लग रहा है।
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