यूरोपीय देश पुर्तगाल का एक छोटा सा द्वीप साल में एक बार अंधेरे में डूब जाता है. यहां के लोग जानबूझकर ऐसा करते हैं. इस द्वीप पर केवल एक गांव है और यहां के लगभग 450 निवासी 2019 से हर पतझड़ में पांच रातों के लिए अपनी बत्तियां बंद कर देते हैं. हम बात कर रहे हैं पुर्तगाल के अजोरेस द्वीपसमूह के सबसे छोटे और सबसे उत्तरी द्वीप, कोरवो की. यहां के लोग पांच रातों के लिए हर लाइट को बंद कर देते हैं ताकि कोरीज शीयरवॉटर नाम के समुद्री पक्षी को मरने से बचाया जा सके. ये पक्षी मुख्य रूप से अटलांटिक महासागर में ही पाए जाते हैं.
1991 में मरने लगे थे पक्षी
साल के इस खास समय पर लाइटों को बंद करने की शुरुआत 1991 में हुई, जब इस द्वीप पर रहने वाले लोगों ने देखा कि जवान शियरवॉटर पक्षियों की बहुत बड़ी संख्या में मौत हो रही है. ये युवा पक्षी समुद्र की ओर अपनी पहली उड़ान भरने से पहले तीन महीने अपने घोंसलों में बिताते हैं, और इस दौरान वे तारों की मदद से दिशा का पता लगाते हैं. लेकिन कई पक्षी सड़कों पर लगी स्ट्रीटलाइट की चमक से बुरी तरह भ्रमित हो जाते हैं. उन्हें इस चमक में तारे नजर ही नहीं आते. ऐसे में वे यहां की संकरी गलियों में टकरा जाते हैं.
फिर साल में 5 दिनों के लिए लाइट करने लगे बंद
जब यह पक्षी टकराकर जमीन पर गिर जाते थे तो स्थानीय लोगों ने रात के समय अंधेरे में पूरे गांव में घूम-घूमकर उन्हें बचाना शुरू किया. इससे अन्य समुदायों को भी प्रेरणा मिली. द गार्डियन की रिपोर्ट के अनुसार 1995 में अजोरियन सरकार ने बाकी आठ द्वीपों को भी इसमें शामिल करने के लिए “SOS कगारो” अभियान शुरू किया. बाद के सालों में 'पुर्तगाली सोसाइटी फॉर द स्टडी ऑफ बर्ड्स' (SPEA) भी इस परियोजना से जुड़ गई, जिससे इसे और आगे बढ़ने में मदद मिली.
आज कोरवो इकलौता ऐसा द्वीप है जहां पक्षियों को बिना लाइट की परेशानी के समंदर का रास्ता मिल सके, इसके लिए रात में सारी सरकारी लाइटें पूरी तरह बंद कर दी जाती हैं. 5 रातों के लिए पूरा द्वीप अंधेरे में डूब जाता है और तारे साफ दिखाई देने लगते हैं. पक्षी समुद्र तक पहुंचने की उम्मीद में अपनी यात्रा शुरू करते हैं. जबकि लोग द्वीप के इकलौते गांव, 'विला डो कोरवो' में घूम-घूमकर गिरे हुए पक्षियों को ढूंढ़ते हैं और उन्हें बचाते हैं.
बचाए गए पक्षियों को रात भर गत्ते के डिब्बों में रखा जाता है ताकि वे संभल सकें. अगले दिन उन्हें समुद्र के पास किसी चट्टान से छोड़ दिया जाता है, जिससे उन्हें पानी यानी अपने नए घर तक पहुंचने का एक और मौका मिल सके.
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