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AI कंपनियों से अमेरिका परेशान, व्हाइट हाउस ने भेजा 'साइलेंट मैसेज'

डिजिटल चेतना और वैश्विक तबाही जैसी बातों पर चर्चा केंद्रित करके, AI लीडर्स पहले से ही जटिल चल रही रेगुलेटरी (नियमन संबंधी) बहस को एक ऐसी 'नैतिक घबराहट' में बदल रहे हैं, जिसे सुलझाना नामुमकिन सा लगता है.

AI कंपनियों से अमेरिका परेशान, व्हाइट हाउस ने भेजा 'साइलेंट मैसेज'
व्हाइट हाउस अब एआई लीडर्स को पूरी तरह संयमित रहने का इशारा कर रहा है. (फोटो-एनडीटीवी)
  • सांसद और सरकारी अधिकारी चाहते हैं कि AI कंपनियां अपने उत्पाद सुरक्षित तरीके से विकसित करें
  • AI उद्योग के नेताओं द्वारा विरोधाभासी संदेश देने से जनता में असमंजस और राजनीतिक अस्थिरता बढ़ रही है
  • कुछ सांसदों ने AI कंपनियों के CEO की चिंताजनक टिप्पणियों की आलोचना की है और उनकी जवाबदेही पर सवाल उठाए हैं

अमेरिका के अमेरिका होने या बनने में सिलिकॉन वैली का अहम योगदान है. मगर, अब यही सिलिकॉन वैली उसकी मुसीबत बढ़ा रहा है.सांसदों और व्हाइट हाउस के सलाहकारों ने 'एक्सिओस' (Axios) को बताया, AI क्षेत्र के मौजूदा लीडर्स एक बड़ी राजनीतिक मुसीबत बनते जा रहे हैं. यहां तक कि AI के समर्थक सरकारी अधिकारी और सांसद भी यही चाहते हैं कि AI कंपनियों के फाउंडर्स वही करें जो अन्य प्रमुख उद्योगों के प्रमुख करते हैं, यानी 'चुपचाप' अपने प्रोडक्ट्स बनाएं और वह भी सुरक्षित तरीके से.

क्यों कहा ऐसा

डिजिटल चेतना और वैश्विक तबाही जैसी बातों पर चर्चा केंद्रित करके, AI लीडर्स पहले से ही जटिल चल रही रेगुलेटरी (नियमन संबंधी) बहस को एक ऐसी 'नैतिक घबराहट' में बदल रहे हैं, जिसे सुलझाना नामुमकिन सा लगता है. किसी भी सफल राजनीतिक अभियान के मुख्य तत्व होते हैं—लोगों को किसी चीज के फायदों के बारे में समझाना और उससे होने वाली साझा समृद्धि की संभावना दिखाना. लेकिन AI इंडस्ट्री के नेता ऐसा करने के बजाय, लगातार इसके अस्तित्व के लिए ख़तरा होने की चेतावनी दे रहे हैं.

सांसदों की राय जानिए

सांसदों का कहना है कि AI कंपनियों के अधिकारियों की बातें अक्सर समृद्धि और तबाही के बीच झूलती रहती हैं—कभी-कभी तो वे एक ही सार्वजनिक कार्यक्रम में दोनों तरह की बातें कह देते हैं. सांसदों और नियामकों का मानना ​​है कि इस तरह के विरोधाभासी बयानों से राजनीतिक अस्थिरता बढ़ती है, जबकि पहले से ही जनता में इसे लेकर काफी विरोध है.

  1. सीनेटर जॉन कर्टिस (रिपब्लिकन-यूटा) ने 'एक्सिओस' (Axios) से कहा, "यह साफ है कि वे जनता को AI के फायदे समझाने की कोशिश में खुद ही उलझ रहे हैं. आज के समय में, AI इंडस्ट्री से ज्यादा अलग-थलग और आम अमेरिकी लोगों की जिंदगी से कटी हुई कोई और इंडस्ट्री खोजना मुश्किल है."
  2. प्रतिनिधि रो खन्ना (डेमोक्रेट-कैलिफ़ोर्निया) ने 'एक्सिओस' से कहा, "सैम ऑल्टमैन जैसे CEO कह रहे हैं कि इस तकनीक के फायदों के लिए दुनिया को कुछ बुरे परिणामों को भी स्वीकार कर लेना चाहिए. हमें सुरक्षित रखने के लिए फैसले लेने के मामले में आप अरबपतियों पर भरोसा नहीं कर सकते."
  3. सीनेटर बर्नी मोरेनो (रिपब्लिकन-ओहियो) ने इस महीने की शुरुआत में 'एन्थ्रोपिक' (Anthropic) के CEO डारियो अमॉडेई को एक पत्र लिखा. इसमें उन्होंने अमॉडेई की "घबराहट पैदा करने वाली टिप्पणियों" की शिकायत करते हुए कहा कि उनका रवैया तो बस सार्वजनिक चर्चा में अफरा-तफ़री मचाने जैसा है.

डेमोक्रेट्स ने इस बात पर भी बारीकी से ध्यान दिया है कि AI और टेक जगत के बड़े लीडर्स राष्ट्रपति ट्रंप के कितने करीब आ गए हैं. कई लोग AI से जुड़ी गलतियों को एक आसान राजनीतिक जीत में बदलने का मौका देख रहे हैं.

सीनेटर क्रिस मर्फी (डेमोक्रेट-कनेक्टिकट) ने 'एक्सिओस' (Axios) से कहा, "अमेरिकी जनता को यह बिल्कुल पसंद नहीं है कि डोनाल्ड ट्रंप टेक अरबपतियों के इतने करीब जा रहे हैं, जबकि AI हमारी नौकरियों और आजीविका के लिए खतरा बना हुआ है." उन्होंने आगे कहा, "डेमोक्रेट्स को AI इंडस्ट्री से आने वाले राजनीतिक चंदे और डेटा सेंटर्स के मुद्दों को उठाना चाहिए, और कामगारों तथा बच्चों की सुरक्षा के लिए आक्रामक रुख अपनाना चाहिए."

खुद बढ़ा रहे लोगों में डर

शुक्रवार रात को खबरें जारी करना और उसके बाद वीकेंड पर ब्लॉग पोस्ट लिखना, एंथ्रोपिक (Anthropic) और ओपनAI (OpenAI) के लिए एक नियमित काम (रूटीन) बन गया है. नियामक (रेगुलेटर्स) यह सोच रहे हैं कि क्या यह कोई सोची-समझी रणनीति है या फिर कोई गड़बड़ी: क्या वे IPO से पहले अपने खिलाफ बनी नकारात्मक धारणाओं को चुपचाप सुधारने की कोशिश कर रहे हैं, या फिर यह वाशिंगटन के कामकाज को समझने में संघर्ष कर रही उनकी अनुभवहीन टीमों की नाकामी है?

कैपिटल हिल (अमेरिकी संसद) के कार्यालयों के साथ बातचीत का हवाला देते हुए एक सूत्र ने कहा, "हम सब कयास लगा सकते हैं कि आखिर चल क्या रहा है, लेकिन इसका नतीजा बस यही होता है कि सोमवार सुबह लोग उठते हैं और कहते हैं— 'ये लोग बहुत खराब हैं, अब बहुत हो गया!'"

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