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This Article is From May 03, 2014

लंदन में भारतीयों ने उच्चायुक्त से कहा, 'हमें कूड़ा समझना बंद करें'

लंदन में भारतीयों ने उच्चायुक्त से कहा, 'हमें कूड़ा समझना बंद करें'
लंदन:

लंदन में भारतीय उच्चायोग देश के सबसे बड़े और सबसे पुराने विदेशी मिशन में से एक है और यह जगह ब्रिटेन के साथ भारत के रिश्तों का केंद्र भी है। हालांकि यहां कुछ ऑनलाइन याचिकाकर्ताओं ने इसे जिस तरह से बयान किया है, वह इसकी छवी से मेल नहीं खाता।

इस संबंध में चेंज. ऑर्ग (CHANGE.ORG) पर एक ऑनलाइन याचिका जारी की गई है, जिसमें भारतीय उच्चायोग में आने वाले लोगों के साथ हुए दुर्व्यवहार का जिक्र किया गया है।

'भारतीयों को कूड़ा समझना बंद करने'  की गुहार लगाती इस याचिका पर अब तक 900 से ज्यादा लोग दस्तखत कर चुके हैं।

इस याचिका का विचार आईटी प्रोफेशनल अरुण अशोकन को आया, जो भारतीय उच्चायोग में अपने अनुभव से बेहद परेशान दिखे। वह बताते हैं, 'मैं वहां अपने दो महीने के बच्चे के जन्म का पंजीकरण कराने के लिए गया था। वेबसाइट पर बताए गए सारे दस्तावेज मेरे पास थे। लाइन में चार घंटे इंतजार करने के बाद जब मैं काउंटर पर पहुंचा, तो मुझे बताया गया कि वेबसाइट पर गलत दस्तावेज बताए गए हैं और मुझे सही दस्तावेज अपने आप ही पता करने होंगे।'

अशोकन का दावा है कि भारतीय उच्चायोग के कर्मचारी बहुत रूखा व्यवहार करते हैं। वह कहते हैं, 'मैं वहां तीन बार गया हूं और हर बार उनका व्यवहार बहुत रूखा था। आप चाहे कितने भी फोटो और दस्तावेज ले जाओ, वे आपसे प्यार से बात नहीं करेंगे।'

जब इस बारे में ब्रिटेन में भारतीय उच्चायुक्त रंजन मथाई से बात की गई तो उन्होंने कहा कि इस याचिका के जरिए जो सुझाव आएंगे, उनका स्वागत किया जाएगा। उन्होंने कहा, 'हमने इलेक्ट्रॉनिक नियुक्तियों का सिस्टम शुरू किया है। हमारे पास एक पब्लिक रेस्पॉन्स यूनिट भी है। साथ ही हम अपने सेवाओं को सुधारने की दिशा में भी काम कर रहे हैं।'

उच्चायोग ने वेबसाइट अपडेट कर दी है और याचिका करने वाले लोगों से बातचीत पर भी सहमति जताई है।

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