- पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में चुनी हुई PTI सरकार को हटाकर राज्यपाल शासन और आपातकाल लागू किया गया है
- इमरान खान के समर्थकों के विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने मंगलवार गोलीबारी की, जिसमें एक की मौत, कई घायल हुए
- प्रदर्शनकारियों ने सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया और पुलिसकर्मियों के साथ संघर्ष किया है
पाकिस्तान में लोकतंत्र का गला घोटकर खैबर पख्तूनख्वा में आपातकाल लागू करने वाली सरकार और सेना अपने ही लोगों पर टूट पड़ी है, उनपर गोलियां चला रही हैं. खैबर पख्तूनख्वा की चुनी हुई पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) सरकार को हटाकर राज्यपाल शासन लगा दिया गया है. पहले से ही जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के लिए आंदोलन चला रहे यहां के लोगों का गुस्सा और बढ़ गया है. ऐसे में यहां एक प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने गोलीबारी की है. इसमें कई लोग घायल हो गए. न्यूज एजेंसी एएफपी की रिपोर्ट के अनुसार पुलिस के एक अधिकारी और इमरान खान की पार्टी PTI के एक सदस्य ने यह जानकारी दी. अधिकारी जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के समर्थकों के खिलाफ कार्रवाई कर रहे थे.
PTI पार्टी के एक स्थानीय नेता ने कहा कि मंगलवार को खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में हुई रैली के दौरान पुलिस ने सीधे भीड़ पर गोलियां चलाईं. हालांकि, पुलिस के एक खुफिया अधिकारी ने कहा कि प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए हवा में चेतावनी के तौर पर गोलियां चलाई गई थीं.
पिछले कुछ हफ्तों में इमरान खान के हजारों समर्थकों ने खैबर पख्तूनख्वा में रैलियां निकाली हैं. यह इलाका इमरान खान की पार्टी का मजबूत गढ़ माना जाता है. प्रदर्शनकारी इमरान खान की रिहाई की मांग कर रहे हैं. साथ ही वे सरकार के खिलाफ भी नाराजगी जता रहे हैं. देश में खराब आर्थिक हालात के कारण लोगों की मुश्किलें बढ़ी हैं. इमरान खान क्रिकेट के बड़े खिलाड़ी रह चुके हैं और पाकिस्तान में काफी लोकप्रिय हैं. वह अगस्त 2023 से जेल में बंद हैं. देश में सरकार और सेना के खिलाफ हुए दंगों के बाद उन पर भ्रष्टाचार से लेकर देशद्रोह तक के कई आरोप लगाए गए हैं.
अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, "पुलिस ने आंसू गैस और लाठियों का इस्तेमाल किया, तो प्रदर्शनकारी दोबारा एकजुट हो गए. उन्होंने पुलिसकर्मियों को पकड़ लिया और उनके साथ मारपीट की."
अधिकारी ने आगे कहा, "वहां मौजूद दूसरे पुलिसकर्मियों ने अपने साथियों को बचाने के लिए हवा में गोलियां चलाईं. प्रदर्शनकारियों ने पुलिस से हथियार छीनने की भी कोशिश की. इसके बाद भीड़ को हटाने के लिए पुलिस ने हवा में और गोलियां चलाईं."
अधिकारी के मुताबिक, गोली लगने और पत्थर लगने से 11 प्रदर्शनकारी घायल हुए. प्रदर्शनकारियों ने आपातकालीन सेवाओं के एक कार्यालय में तोड़फोड़ की और एक सरकारी इमारत में आग लगा दी. PTI के स्थानीय नेता खुर्शीद अफरीदी ने AFP को बताया कि प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए पुलिस ने सीधे भीड़ पर गोलियां चलाईं. इसमें PTI के एक दर्जन से ज्यादा कार्यकर्ता गंभीर रूप से घायल हो गए.
खैबर पख्तूनख्वा में आपातकाल लागू
इमरान खान की रिहाई की मांग को लेकर कई दिनों तक सरकार विरोधी प्रदर्शन हुए. इसके बाद रविवार को खैबर पख्तूनख्वा में आपातकाल लागू कर दिया गया. स्थानीय पुलिस ने एक बयान में बताया कि बारा में 50 लोगों को गिरफ्तार किया गया है. इन लोगों पर आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होने, तोड़फोड़ करने और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का शक है.
पुलिस के मुताबिक, आपातकाल लागू होने के बाद से खैबर पख्तूनख्वा में PTI के सैकड़ों सदस्यों को हिरासत में लिया गया है. पाकिस्तान के सूचना मंत्री अत्ताउल्लाह तरार ने सोमवार को कहा कि प्रांत के मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी को हिरासत में लिया गया है. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें गिरफ्तार नहीं किया गया है.
पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में मौजूद संघीय सरकार ने खैबर पख्तूनख्वा में आपातकाल लागू करने को सही ठहराया है. सरकार का आरोप है कि प्रांत में PTI की सरकार उग्रवादी हिंसा को रोकने में नाकाम रही है. इस हिंसा के कारण प्रांत में लंबे समय से हालात खराब हैं.
PTI ने आपातकाल लगाने का कड़ा विरोध किया है. पार्टी का कहना है कि यह लोकतंत्र के खिलाफ है और संघीय सरकार सत्ता पर कब्जा करने की कोशिश कर रही है.
पाकिस्तान के कब्जे वाले गिलगित-बाल्टिस्तान में भी विरोध
पाकिस्तान के कब्जे वाले गिलगित-बाल्टिस्तान (PoGB) में व्यापारियों ने टैक्स नीतियों और 'फूड एक्ट 2022' को लागू करने के विरोध में बाजार बंद कर दिए. उन्होंने अधिकारियों पर आरोप लगाया कि वे पहले से ही आर्थिक दबाव से जूझ रहे स्थानीय कारोबारियों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ डाल रहे हैं. यह विरोध 'फूड एक्ट 2022' के तहत लागू किए गए सख्त फीस स्ट्रक्चर, अनिवार्य रजिस्ट्रेशन की शर्तों और टैक्स लागू करने के उपायों के खिलाफ था. व्यापारियों और उनके संगठनों ने सरकार की नीतियों पर चिंता जताई है और कहा है कि इन उपायों से इलाके के कारोबारी समुदाय के लिए मुश्किलें और बढ़ रही हैं.
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