- किम यो जोंग ने दक्षिण कोरिया की सीमा के पास और अधिक सामरिक हथियार तैनात करने पर विचार व्यक्त किया है
- किम यो जोंग ने दक्षिण कोरियाई सेना पर अपने सैनिकों को चेतावनी के तौर पर गोली चलाने का गंभीर खतरा बताया है
- दक्षिण कोरिया ने कहा कि उसके पास एक शक्तिशाली सेना है जो उत्तर कोरिया का मुकाबला कर सकती है
यूक्रेन और ईरान युद्ध ने दुनिया की कमर तोड़ी हुई है. इस बीच अब नॉर्थ और साउथ कोरिया से युद्ध की आवाजें आने लगी हैं. ये कोई आम आवाजें नहीं हैं, बल्कि दोनों देशों के शीर्ष के लोगों की तरफ से आई हैं. नॉर्थ कोरिया की तरफ से उनकी बहन ने हालात को अस्थिर बता दिया है. वहीं दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ने यहां तक कह दिया है कि उनका देश भी हर तरह से तैयार है.
उत्तर कोरिया के नेता किम की बहन का बयान
उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन की प्रभावशाली बहन, किम यो जोंग ने सोमवार को सरकारी मीडिया KCNA पर एक बयान में कहा कि उनका देश दक्षिण कोरिया के साथ लगती सीमा के पास और अधिक सामरिक हथियार तैनात करने और लाउडस्पीकर के ज़रिए प्रसारण फिर से शुरू करने पर विचार कर रहा है. उन्होंने कहा, "अभी दक्षिणी सीमा पर हालात बहुत अस्थिर हैं." दक्षिण कोरिया का आधिकारिक नाम लेते हुए उन्होंने कहा, "दक्षिण कोरियाई सेना के युद्ध-प्रेमी लोग, हमारे सैनिकों पर ऑटोमैटिक राइफलों और बड़ी मशीनगनों से चेतावनी के तौर पर गोलियां चलाकर उनकी सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रहे हैं."
दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति का बयान
दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग ने सोमवार को कहा कि उनका देश, अमेरिका के साथ मिलकर काम कर रही संयुक्त सेनाओं का 'युद्धकालीन ऑपरेशनल कंट्रोल' (युद्ध के समय संचालन का नियंत्रण) वापस लेने में पूरी तरह सक्षम है. इस बदलाव को लेकर वाशिंगटन के साथ बातचीत चल रही है. ली ने यह भी कहा कि दक्षिण कोरिया ने एक शक्तिशाली सेना तैयार की है, जो उत्तर कोरिया का मुकाबला कर सकती है. भले ही प्योंगयांग ने परमाणु हथियार विकसित कर लिए हैं, लेकिन ली के अनुसार, ये हथियार मूल रूप से अंतिम बचाव के लिए हैं, न कि युद्ध में लड़ने के लिए.
राष्ट्रपति भवन 'ब्लू हाउस' में पत्रकारों से बात करते हुए ली ने कहा, "सीधे शब्दों में कहें तो, हमें जल्द से जल्द युद्धकालीन ऑपरेशनल कंट्रोल वापस ले लेना चाहिए. हम इसके लिए पूरी तरह सक्षम हैं और अमेरिका के साथ बातचीत भी अच्छी चल रही है." उन्होंने आगे कहा कि यह प्रक्रिया बिल्कुल भी आसान नहीं है, क्योंकि अमेरिका को ऑपरेशनल कंट्रोल सौंपे हुए 70 साल बीत चुके हैं.
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