
बीजिंग:
चीन की सेना ने शुक्रवार को चेताया है कि उनकी सशस्त्र सेना में जारी सुधार प्रक्रिया को लेकर 'विरोधी ताकतें' कुछ ऑनलाइन अफवाहें फैलाने में लगी हैं, जिनसे कुछ नुकसान भी हुआ है. गौरतलब है कि सुधार प्रक्रिया के तहत सेना में से 300,000 सैनिकों को निकाला जाना है.
सितंबर में चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने अचानक घोषणा की थी कि वह सेना में से 300,000 लोगों, या लगभग 13 फीसदी लोगों को कम करेंगे, मौजूदा समय में चीन की सेना दुनिया में सबसे बड़ी है, और उसमें 23 लाख फौजी हैं.
यह कटौती ऐसे समय में की जा रही है, जब चीन लगातार बढ़ती आर्थिक अनिश्चितता से जूझ रहा है, वृद्धि घटती जा रही है, और देश का नेतृत्व तकलीफदेह आर्थिक सुधारों के असर से बाहर निकलने की कोशिश कर रहा है. पहले ही निकाल दिए जा चुके सैकड़ों फौजियों ने मंगलवार को राजधानी बीजिंग में विरोध प्रदर्शन भी किया था.
वैसे इन फौजियों को निकाला जाना बड़े स्तर पर सेना में आधुनिकीकरण के उद्देश्य से किए जा रहे सुधार का हिस्सा है, जिसके तहत सोवियत युग के कमांड मॉड्यूल से बाहर आकर अदृश्य लड़ाकू विमानों (स्टेल्थ जेट) तथा उपग्रह-विरोधी मिसाइलों (एन्टी-सैटेलाइट मिसाइलों) जैसे अत्याधुनिक हथियारों पर ज़्यादा ज़ोर दिया जाना शामिल है.
सरकारी 'पीपल्स लिबरेशन आर्मी डेली' ने एक कमेंटरी के दौरान लिखा कि सुधारों को अफवाहें सोशल मीडिया साइटों पर खुद को विशेषज्ञ बताने वाले लोगों के ज़रिये फैल रही हैं, जो सभी तरह की आधारहीन बातें कहने लगे हैं, जिनमें निकाले गए फौजियों को कम लाभ दिए जाने जैसी कहानियां भी शामिल हैं.
कमेंटरी के मुताबिक, "सशस्त्र सेना को साफ तौर पर समझना होगा कि इन अफवाहों के पीछे मोटे तौर पर वे आनलाइन यूज़र हैं, जिन्हें सच की समझ नहीं है, और जो जानबूझकर खयाली बातों में खोए हुए हैं..."
किसी का भी नाम लिए बिना कमेंटरी में कहा गया, "लेकिन इस तरह की विरोधी ताकतों की भी कमी नहीं है, जो हमारी सुधार प्रक्रिया में अफरातफरी के बीज बोने की नाकाम कोशिशें कर रही हैं..."
समाचारपत्र ने कहा कि इस तरह की फर्ज़ी कहानियों पर कुछ फौजियों का ध्यान गया है, और उनमें से कुछ को इन हानियों में कही गई बातों पर यकीन भी है. पत्र ने कहा, "कुछ ने इन्हें मान लिया है और इस बात से चिंतित हैं कि उन्हें निजी तौर पर नुकसान होने वाला है..."
समाचारपत्र ने कहा कि फौजियों की ज़िम्मेदारी है कि ने इन अफवाहों पर विश्वास नहीं करें, और ख़बरें सिर्फ आधिकारिक स्रोतों से ही हासिल करें. सरकार बार-बार वादा करती रही है कि वह निकाले गए फौजियों का ध्यान रखेगी, और जून माह में शी चिनफिंग ने भी कहा था कि उनके लिए अन्य काम तलाश किए जाएंगे.
© Thomson Reuters 2016
सितंबर में चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने अचानक घोषणा की थी कि वह सेना में से 300,000 लोगों, या लगभग 13 फीसदी लोगों को कम करेंगे, मौजूदा समय में चीन की सेना दुनिया में सबसे बड़ी है, और उसमें 23 लाख फौजी हैं.
यह कटौती ऐसे समय में की जा रही है, जब चीन लगातार बढ़ती आर्थिक अनिश्चितता से जूझ रहा है, वृद्धि घटती जा रही है, और देश का नेतृत्व तकलीफदेह आर्थिक सुधारों के असर से बाहर निकलने की कोशिश कर रहा है. पहले ही निकाल दिए जा चुके सैकड़ों फौजियों ने मंगलवार को राजधानी बीजिंग में विरोध प्रदर्शन भी किया था.
वैसे इन फौजियों को निकाला जाना बड़े स्तर पर सेना में आधुनिकीकरण के उद्देश्य से किए जा रहे सुधार का हिस्सा है, जिसके तहत सोवियत युग के कमांड मॉड्यूल से बाहर आकर अदृश्य लड़ाकू विमानों (स्टेल्थ जेट) तथा उपग्रह-विरोधी मिसाइलों (एन्टी-सैटेलाइट मिसाइलों) जैसे अत्याधुनिक हथियारों पर ज़्यादा ज़ोर दिया जाना शामिल है.
सरकारी 'पीपल्स लिबरेशन आर्मी डेली' ने एक कमेंटरी के दौरान लिखा कि सुधारों को अफवाहें सोशल मीडिया साइटों पर खुद को विशेषज्ञ बताने वाले लोगों के ज़रिये फैल रही हैं, जो सभी तरह की आधारहीन बातें कहने लगे हैं, जिनमें निकाले गए फौजियों को कम लाभ दिए जाने जैसी कहानियां भी शामिल हैं.
कमेंटरी के मुताबिक, "सशस्त्र सेना को साफ तौर पर समझना होगा कि इन अफवाहों के पीछे मोटे तौर पर वे आनलाइन यूज़र हैं, जिन्हें सच की समझ नहीं है, और जो जानबूझकर खयाली बातों में खोए हुए हैं..."
किसी का भी नाम लिए बिना कमेंटरी में कहा गया, "लेकिन इस तरह की विरोधी ताकतों की भी कमी नहीं है, जो हमारी सुधार प्रक्रिया में अफरातफरी के बीज बोने की नाकाम कोशिशें कर रही हैं..."
समाचारपत्र ने कहा कि इस तरह की फर्ज़ी कहानियों पर कुछ फौजियों का ध्यान गया है, और उनमें से कुछ को इन हानियों में कही गई बातों पर यकीन भी है. पत्र ने कहा, "कुछ ने इन्हें मान लिया है और इस बात से चिंतित हैं कि उन्हें निजी तौर पर नुकसान होने वाला है..."
समाचारपत्र ने कहा कि फौजियों की ज़िम्मेदारी है कि ने इन अफवाहों पर विश्वास नहीं करें, और ख़बरें सिर्फ आधिकारिक स्रोतों से ही हासिल करें. सरकार बार-बार वादा करती रही है कि वह निकाले गए फौजियों का ध्यान रखेगी, और जून माह में शी चिनफिंग ने भी कहा था कि उनके लिए अन्य काम तलाश किए जाएंगे.
© Thomson Reuters 2016
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