
प्रतीकात्मक तस्वीर.
ढाका:
बांग्लादेश के एक विशेष न्यायाधिकरण ने वर्ष 1971 में पाकिस्तानी सैनिकों के साथ मिलकर नरसंहार करने और मानवता के खिलाफ अपराधों के लिए एक पूर्व सांसद समेत छह कट्टर इस्लामी लोगों को मौत की सजा सुनाई. बांग्लादेश के अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (आईसीटी-बीडी) के तीन जजों के एक पैनल ने जमात-ए-इस्लामी के छह सदस्यों को मौत की सजा सुनाते हुए कहा कि इनके खिलाफ आरोप 'संदेह से परे साबित' हुए हैं.
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पैनल के अध्यक्ष न्यायमूर्ति शाहिनुर इस्लाम ने कहा, 'अंतरराष्ट्रीय अपराध (न्यायाधिकरण) अधिनियम, 1973 की धारा 20 (2) के तहत इन लोगों को दोषी ठहराया गया और यह सजा सुनाई गई.' जिन छह लोगों को मौत की सजा सुनाई गई वे उत्तरपश्चिम गेइबंधा के रहने वाले हैं. ये सभी कट्टरपंथी पार्टी जमात-ए-इस्लामी से संबंध रखते हैं. इस पार्टी ने वर्ष 1971 में बांग्लादेश की आजादी का विरोध किया था और नरसंहार करने के लिए पाकिस्तानी सैनिकों के साथ हाथ मिला लिया था.
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छह दोषियों में से केवल एक व्यक्ति ने मामले की सुनवाई का सामना किया, जबकि पूर्व जमात सांसद अबु सालेह मोहम्मद अब्दुल अजीज मियां समेत शेष फरार थे. एक विशेष कानून के तहत दोषी इस निर्णय को सुप्रीम कोर्ट की अपीलीय डिवीजन के समक्ष चुनौती दे सकते हैं. वर्ष 2010 में सुनवाई प्रक्रिया शुरू होने के बाद से बांग्लादेश में अब तक 1971 के युद्ध अपराधों में छह लोगों को मौत की सजा दी जा चुकी है. इनमें से पांच जमात नेता और एक बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी का नेता शामिल हैं.
(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
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