रवीश कुमार का प्राइम टाइम : नागरिकता बिल से असम में ग़ुस्सा क्यों है?

  • 38:43
  • प्रकाशित: दिसम्बर 10, 2019
नागरिकता संशोधन बिल लोकसभा में पास हो चुका है. लोकसभा में इस बिल के पक्ष में 334 मत पड़े हैं और विरोध में मात्र 106. आप कह सकते हैं कि सदन में यह बिल व्यापक आम सहमति से पास हुआ. लेकिन इस बिल को लेकर पूर्वोत्तर के राज्यों में वैसी व्यापक आम सहमति नहीं दिखती है. दरअसल पूर्वोत्तर के राज्यों के सांसदों को संख्या कम होने के कारण बहुत बाद में और बहुत कम समय मिला. जिन राज्यों में इस बिल को लेकर सबसे अधिक आशंकाएं थीं उनके ही सांसद दो तीन पैरा के संक्षिप्त भाषण देकर चले गए. काश उन्हें ज़्यादा समय मिलता तो शेष भारत को पूर्वोत्तर की बेचैनियों को समझने का ज़्यादा मौका मिलता. जैसे आप यह जान पाते कि मिज़ोरम के एक मात्र सांसद मिज़ो नेशनल फ्रंट के सी लालरोज़ांगा ने बिल का समर्थन किया लेकिन जो आग्रह किया उसे अनदेखा नहीं किया जा सकता. लालरोज़ांगा ने कहा कि इस बिल को लेकर मिज़ोरम मानसिक यातना के दौर से गुज़र रहा था. लेकिन प्रधानमंत्री और गृहमंत्री ने हमारी चिन्ताओं को ध्यान में रखा. मिज़ोरम को इस बिल से बाहर रखा गया है. यह बिल धार्मिक प्रताड़ना के आधार पर नागरिकता की बात करता है. हम केंद्र और देश की सभी राज्य सरकारों से आग्रह करते हैं कि वे यह सुनिश्चत करें कि कम से कम हमारे यहां धार्मिक प्रताड़ना न हो. नॉर्थ ईस्ट को लेकर जो भी आश्वसान दिए गए हैं उन्हें पूरा किया जाए.

संबंधित वीडियो