- यूपी MLC चुनाव में BJP को कहां-कहां लगे बड़े झटके? सामने आईं बड़ी वजहें
- सपा ने कैसे छीनीं BJP की अहम सीटें, समझिए पूरा गणित
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2027 विधानसभा की चुनावी जंग से पहले उत्तर प्रदेश विधान परिषद चुनाव के परिणामों ने भाजपा और समाजवादी पार्टी दोनों के लिए महत्वपूर्ण राजनीतिक संदेश दिए हैं. जहां बीजेपी ने शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों की 6 सीटों पर जीत दर्ज की, वहीं समाजवादी पार्टी ने 4 सीटों पर कब्जा जमाकर मुकाबले को बराबरी का बना दिया. सबसे ज्यादा चर्चा वाराणसी, आगरा और लखनऊ की सीटों को लेकर रही, जहां उम्मीदवार चयन को लेकर भाजपा के भीतर उठे सवाल चुनावी नतीजों में भी दिखाई दिए. वहीं सपा इन परिणामों को शिक्षित वर्ग और शिक्षक समुदाय के बीच बढ़ते समर्थन के रूप में पेश कर रही है.
आगरा शिक्षक सीट पर टिकट चयन पड़ा भारी
आगरा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार डॉ. आकाश अग्रवाल ने जीत दर्ज की. राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि आकाश अग्रवाल ने पहले भाजपा से टिकट के लिए संपर्क किया था, लेकिन पार्टी ने उनकी जगह हरिकिशोर तिवारी को उम्मीदवार बनाया. इसके बाद आकाश अग्रवाल समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए और चुनाव में भाजपा उम्मीदवार को पराजित कर दिया. इस परिणाम को भाजपा के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है.
वाराणसी में भाजपा को डबल झटका
वाराणसी शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में सपा के लाल बिहारी यादव ने लगातार दूसरी बार जीत दर्ज की. वर्ष 2020 में जहां उनकी जीत का अंतर 936 वोट था, वहीं इस बार उन्होंने भाजपा उम्मीदवार डॉ. प्रमोद मिश्रा को 5,015 वोटों से हराया. शिक्षक राजनीति में लंबे समय से सक्रिय लाल बिहारी यादव के मुकाबले भाजपा उम्मीदवार कमजोर साबित हुए. वहीं वाराणसी स्नातक सीट पर भाजपा ने केदारनाथ सिंह को उम्मीदवार बनाया था. केदारनाथ इससे पहले 2020 में सपा के आशुतोष सिन्हा से चुनाव हार चुके थे. इस सीट पर भी मुकाबला भाजपा की अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं रहा.
लखनऊ और झांसी-इलाहाबाद सीट पर भी सवाल
लखनऊ स्नातक सीट पर भाजपा उम्मीदवार अवनीश सिंह पटेल की उम्मीदवारी को लेकर शुरुआत से ही विरोध की चर्चा थी. यहां कैंडिडेट बदलने का पर्याप्त समय था, लेकिन संगठन ने विरोध को नजरअंदाज किया. इसी तरह झांसी-इलाहाबाद स्नातक सीट पर भाजपा उम्मीदवार अशोक राठौर के चयन को लेकर भी सवाल उठते रहे. यहां अशोक राठौर का चयन गलत साबित हुआ.
जो न डरे आज के जुल्मों के हालात से सब डटे रहें और जीत का प्रमाणपत्र लेकर ही उठें। हम वाराणसी शहर के अपने कार्यकर्ताओं से अपील करते हैं कि वो मतगणना केंद्र पर भोजन, पानी, छतरी और तौलिये आदि की व्यवस्था करके अपने साथियों की मदद करें और हौसलों के गीत गाकर जागते रहें… सवेरा अपना होगा। सड़क पर लिखी वो चेतावनी याद रखें : नज़र हटी, दुर्घटना घटी!
— Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) October 29, 2026
सपा ने वाराणसी को बनाया राजनीतिक संदेश
वाराणसी की जीत को समाजवादी पार्टी विशेष राजनीतिक महत्व दे रही है. पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव लगातार मतगणना प्रक्रिया को लेकर सोशल मीडिया पर सक्रिय रहे. उन्होंने कार्यकर्ताओं से मतगणना केंद्रों पर डटे रहने की अपील करते हुए कहा कि जीत का प्रमाणपत्र मिलने तक सतर्क रहना जरूरी है. अखिलेश यादव ने वाराणसी में मतगणना की गति और प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए थे. उन्होंने दावा किया था कि भाजपा की हार को टालने के लिए विभिन्न स्तरों पर प्रयास किए जा रहे हैं. साथ ही उन्होंने चुनाव आयोग और प्रशासन से निष्पक्ष प्रक्रिया सुनिश्चित करने की मांग की थी.
भाजपा 6 और सपा 4 सीटों पर विजयी
अब तक घोषित परिणामों के अनुसार भाजपा ने 4 शिक्षक और 2 स्नातक सीटों पर जीत दर्ज की है. वहीं समाजवादी पार्टी ने 2 शिक्षक और 2 स्नातक सीटें अपने नाम की हैं. इन नतीजों को 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले शिक्षक, स्नातक और शिक्षित मतदाता वर्ग के रुझान के संकेत के रूप में देखा जा रहा है. खासकर वाराणसी और आगरा में सपा की सफलता ने विपक्ष को नया राजनीतिक उत्साह दिया है, जबकि भाजपा के भीतर उम्मीदवार चयन और स्थानीय रणनीति को लेकर चर्चा तेज हो गई है.
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