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This Article is From Nov 25, 2017

अयोध्‍या में अब मंदिर के दावेदारों में खिंची तलवारें...

मंदिर के लिए मस्जिद वालों से लड़ने वाले अब आपस में तलवार भांज रहे हैं. सभी का मंदिर पर भी दावा है और पुजारी के पद पर भी.

अयोध्‍या में अब मंदिर के दावेदारों में खिंची तलवारें...
  • महंत धर्म दास का मंदिर की मिल्कियत पर भी दावा है
  • वीएचपी पूरी जमीन पर मंदिर बनाने की तैयारी कर रही है
  • निर्मोही अखाड़ा वीएचपी को दंगाई समझता है
लखनऊ: अयोध्‍या में अब मंदिर के दावेदारों में तलवारें खिंच गई हैं. चूंकी अयोध्‍या विवाद में साल भर में फैसला आने की उम्‍मीद है, इसलिए अब मंदिर के दावेदारों में जमीन के स्‍वामित्‍व और मंदिर का पुजारी बनने की जंग शुरू हो गई है. जानकार कहते हैं कि मंदिर एक बड़ा पावर सेंटर होगा और बेशुमार चढ़ावा आने की भी उम्‍मीद है, इस झगड़े की वजह यही है.

मंदिर के लिए मस्जिद वालों से लड़ने वाले अब आपस में तलवार भांज रहे हैं. सभी का मंदिर पर भी दावा है और पुजारी के पद पर भी. हाई कोर्ट ने झगड़े वाली जमीन का 33 फीसदी हिस्‍सा निर्मोही अखाड़े और 33 फीसदी रामलला विराजमान को दिया है. रामलला की तरफ से वीएचपी के लोग पक्षकार है लेकिन निर्मोही अखाड़ा वीएचपी को दंगाई समझता है. भले हाई कोर्ट ने 33 फीसदी जमीन निर्मोही अखाड़े को दी हो, लेकिन वीएचपी पूरी जमीन पर मंदिर बनाने की तैयारी कर रही है.

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बाबरी मस्जिद में 1949 में मूर्तियां रखने वाले बाबा अभिराम दास के शिष्‍य महंत धर्म दास का कहना है कि राम जन्‍मभूमि के पहले पुजारी अभिराम दास थे. फिर वहां सरकारी रीसीवर बैठ गया और मौजूदा पुजारी रीसीवर के लोग हैं. अब मंदिर बनने पर अभिराम दास के शिष्‍य की हैसियत से सिर्फ वही पुजारी बन सकते हैं.

वहीं राम जन्‍मभूमि ट्रस्‍ट के अध्‍यक्ष नृत्‍यगोपाल दास, धर्म दास को पुजारी बनाने के खिलाफ हैं. लेकिन महंत धर्म दास उनकी सुनने को तैयार नहीं. महंत धर्म दास का मंदिर की मिल्कियत पर भी दावा है. उनके मुताबिक मंदिर पर ना वीएचपी का दावा सही है और न ही निर्मोही अखाड़े का.

VIDEO: राम मंदिर के दावेदार अब आमने-सामने

एक पुरानी कहावत है कि 'ना सूत ना कपास, जुलाहों में लट्ठम-लठ्ठा.' लेकिन यहां लट्ठम-लठ्ठा जुलाहों में नहीं बल्कि बाबाओं में है और ये लट्ठम-लठ्ठा इस बात का प्रतीक है अयोध्‍या में सूत-कपास का भी इंतजाम होने वाला है.
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