Memories Of Irrfan Khan
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यादों में बसी हैं इरफान खान से हुई मुलाकातें : बोलते कम थे, सुनते ज़्यादा...
- Sunday May 17, 2020
- विमल मोहन
इरफ़ान ख़ान से बस दो-तीन मुलाक़ातें ही हो पाईं, बेहद छोटी. लेकिन हर मुलाक़ात यादगार रही. आख़िरी मुलाक़ात एनडीटीवी के पार्किंग एरिया में हुई. वे शायद 'पान सिंह तोमर' फ़िल्म के प्रमोशन के लिए एनडीटीवी के के स्टूडियो आए थे. उन्हें देखते ही मैंने कहा, आपकी 'एक डॉक्टर की मौत'.. के बाद ये सबसे अच्छी फ़िल्म लगी. उन्हें बहुत अच्छा लगा कि किसी पत्रकार ने उनसे इतने लंबे वक्त के बाद 'एक डॉक्टर की मौत' का ज़िक्र किया. मुझे लगता है वो बोलते कम और सुनते ज़्यादा थे. वो दूसरों की बातों को आंखों में एक चमक और बड़े ही कौतूहल से सुनते थे. सुनते रहे. इस बीच अपनी जो भी कही, अलग ही अंदाज़ में कही.
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ndtv.in
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यादों में बसी हैं इरफान खान से हुई मुलाकातें : बोलते कम थे, सुनते ज़्यादा...
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इरफ़ान ख़ान से बस दो-तीन मुलाक़ातें ही हो पाईं, बेहद छोटी. लेकिन हर मुलाक़ात यादगार रही. आख़िरी मुलाक़ात एनडीटीवी के पार्किंग एरिया में हुई. वे शायद 'पान सिंह तोमर' फ़िल्म के प्रमोशन के लिए एनडीटीवी के के स्टूडियो आए थे. उन्हें देखते ही मैंने कहा, आपकी 'एक डॉक्टर की मौत'.. के बाद ये सबसे अच्छी फ़िल्म लगी. उन्हें बहुत अच्छा लगा कि किसी पत्रकार ने उनसे इतने लंबे वक्त के बाद 'एक डॉक्टर की मौत' का ज़िक्र किया. मुझे लगता है वो बोलते कम और सुनते ज़्यादा थे. वो दूसरों की बातों को आंखों में एक चमक और बड़े ही कौतूहल से सुनते थे. सुनते रहे. इस बीच अपनी जो भी कही, अलग ही अंदाज़ में कही.
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