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Makhdoom Moinuddin

'Makhdoom Moinuddin' - 1 News Result(s)
  • जाने वाले सिपाही से पूछो, वो कहां जा रहा है...

    जाने वाले सिपाही से पूछो, वो कहां जा रहा है...

    क्या मख़्दूम मोइनुद्दीन की इस रचना से हमारी समझ कुछ बेहतर होती है या फिर हम अभिशप्त हैं 'मेरे देश की धरती सोना उगले, उगले हीरे-मोती...' टाइप ही सुनते रहने के लिए। उगलते रहिए, निगलते रहिए। राष्ट्रवाद के बर्गर को भकोसते रहिए, जो फास्ट फूड हो गया है राष्ट्रभक्त होने का।

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  • जाने वाले सिपाही से पूछो, वो कहां जा रहा है...

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    क्या मख़्दूम मोइनुद्दीन की इस रचना से हमारी समझ कुछ बेहतर होती है या फिर हम अभिशप्त हैं 'मेरे देश की धरती सोना उगले, उगले हीरे-मोती...' टाइप ही सुनते रहने के लिए। उगलते रहिए, निगलते रहिए। राष्ट्रवाद के बर्गर को भकोसते रहिए, जो फास्ट फूड हो गया है राष्ट्रभक्त होने का।