Jamiat Ulama E Hind
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जिहाद पर विवादित बयान देने वाले मौलाना मदनी का संगठन जमीयत उलेमा-ए-हिंद, कैसे करता है काम?
- Sunday November 30, 2025
- Edited by: शुभम उपाध्याय
संगठन पर पिछले तीन पीढ़ियों से मदनी परिवार का दबदबा रहा है. मौलाना हुसैन मदनी 1940 में अध्यक्ष बने थे, और उनके बाद उनके परिवार के सदस्य ही इसकी कमान संभालते रहे हैं.
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समलैंगिक विवाह मामला : विरोध में जमीयत उलेमा ए हिंद पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, पक्षकार बनाने की रखी मांग
- Saturday April 1, 2023
- Reported by: आशीष भार्गव, Edited by: अभिषेक पारीक
जमीयत उलमा ए हिंद ने अपनी हस्तक्षेप की अर्जी में कहा कि विपरीत लिंगों का विवाह भारतीय कानूनी शासन के लिए मुख्य है. विवाह की अवधारणा "किसी भी दो व्यक्तियों" के मिलन की सामाजिक-कानूनी मान्यता से कहीं अधिक है.
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जमीयत उलेमा ए हिंद ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किया जवाबी हलफनामा, सरकार की कार्रवाई को बताया अवैध
- Tuesday June 28, 2022
- Reported by: आशीष भार्गव, Edited by: पंकज चौधरी
उत्तर प्रदेश में बुलडोजर मामले में बुधवार को होने वाली सुनवाई से पहले जमीयत उलेमा ए हिंद ने सुप्रीम कोर्ट में अपना जवाब दाखिल किया है. हलफनामे में यूपी सरकार की इस दलील को नकारा गया है कि सरकार नियमों के मुताबिक अतिक्रमण हटा रही है.
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“जुल्म सह लेंगे, मगर मुल्क पर आंच नहीं आने देंगे”: जमीयत की बैठक में भावुक होते हुए बोले मौलाना महमूद मदनी
- Saturday May 28, 2022
- Reported by: सौरभ शुक्ला
जमीयत के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी ने कहा कि यकीनन हम मुश्किल दौर से गुजर रहे है हालात मुश्किल है मगर मायूसी नही है. मुश्किल झेलने के लिए ताकत चाहिये मगर हम कमजोर है, कमजोरी का मतलब ये नही कि जेल ओर फांसी हो जाए. अगर जमीयत का ये फैसला है कि हम संदेशवाहक है ओर जुल्म को बर्दाश्त कर लेंगे लेकिन अपने मुल्क पर आंच नही आने देंगे तो ये हमारी ताकत है.
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लव जिहाद कानून के मामले में जमीयत उलेमा ए हिंद भी सुप्रीम कोर्ट पहुंचा
- Wednesday January 6, 2021
- Reported by: आशीष भार्गव, Edited by: सूर्यकांत पाठक
यूपी (UP) और उत्तराखंड (Uttrakhand) में लव जिहाद (Love Jihad) कानून के मामले में जमीयत उलेमा ए हिंद (Jamiat Ulama e Hind) ने भी सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में अर्जी दाखिल की है. अर्जी में सुप्रीम कोर्ट से इस केस में उसे भी पक्षकार बनाने की मांग की गई है. इस मामले में आज ही सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र, यूपी और उत्तराखंड सरकार को नोटिस जारी कर चार हफ्ते में जवाब मांगा है.
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जिहाद पर विवादित बयान देने वाले मौलाना मदनी का संगठन जमीयत उलेमा-ए-हिंद, कैसे करता है काम?
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संगठन पर पिछले तीन पीढ़ियों से मदनी परिवार का दबदबा रहा है. मौलाना हुसैन मदनी 1940 में अध्यक्ष बने थे, और उनके बाद उनके परिवार के सदस्य ही इसकी कमान संभालते रहे हैं.
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समलैंगिक विवाह मामला : विरोध में जमीयत उलेमा ए हिंद पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, पक्षकार बनाने की रखी मांग
- Saturday April 1, 2023
- Reported by: आशीष भार्गव, Edited by: अभिषेक पारीक
जमीयत उलमा ए हिंद ने अपनी हस्तक्षेप की अर्जी में कहा कि विपरीत लिंगों का विवाह भारतीय कानूनी शासन के लिए मुख्य है. विवाह की अवधारणा "किसी भी दो व्यक्तियों" के मिलन की सामाजिक-कानूनी मान्यता से कहीं अधिक है.
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जमीयत उलेमा ए हिंद ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किया जवाबी हलफनामा, सरकार की कार्रवाई को बताया अवैध
- Tuesday June 28, 2022
- Reported by: आशीष भार्गव, Edited by: पंकज चौधरी
उत्तर प्रदेश में बुलडोजर मामले में बुधवार को होने वाली सुनवाई से पहले जमीयत उलेमा ए हिंद ने सुप्रीम कोर्ट में अपना जवाब दाखिल किया है. हलफनामे में यूपी सरकार की इस दलील को नकारा गया है कि सरकार नियमों के मुताबिक अतिक्रमण हटा रही है.
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- Saturday May 28, 2022
- Reported by: सौरभ शुक्ला
जमीयत के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी ने कहा कि यकीनन हम मुश्किल दौर से गुजर रहे है हालात मुश्किल है मगर मायूसी नही है. मुश्किल झेलने के लिए ताकत चाहिये मगर हम कमजोर है, कमजोरी का मतलब ये नही कि जेल ओर फांसी हो जाए. अगर जमीयत का ये फैसला है कि हम संदेशवाहक है ओर जुल्म को बर्दाश्त कर लेंगे लेकिन अपने मुल्क पर आंच नही आने देंगे तो ये हमारी ताकत है.
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लव जिहाद कानून के मामले में जमीयत उलेमा ए हिंद भी सुप्रीम कोर्ट पहुंचा
- Wednesday January 6, 2021
- Reported by: आशीष भार्गव, Edited by: सूर्यकांत पाठक
यूपी (UP) और उत्तराखंड (Uttrakhand) में लव जिहाद (Love Jihad) कानून के मामले में जमीयत उलेमा ए हिंद (Jamiat Ulama e Hind) ने भी सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में अर्जी दाखिल की है. अर्जी में सुप्रीम कोर्ट से इस केस में उसे भी पक्षकार बनाने की मांग की गई है. इस मामले में आज ही सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र, यूपी और उत्तराखंड सरकार को नोटिस जारी कर चार हफ्ते में जवाब मांगा है.
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