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Disabled Candidates

'Disabled Candidates' - 2 News Result(s)
  • 'पैदा होते ही डॉक्टरों ने कहा, मेरे दिन अब गिने-चुने', UPSC क्रैक करने वाले डिसेबल कैंडिडेट अब्दुल्ला की कहानी

    'पैदा होते ही डॉक्टरों ने कहा, मेरे दिन अब गिने-चुने', UPSC क्रैक करने वाले डिसेबल कैंडिडेट अब्दुल्ला की कहानी

    अफरीद ने कहा, "मैं एक फाइटर हूं, जब मैं पैदा हुआ, तो डॉक्टरों ने मेरे माता-पिता से कहा कि मेरे दिन अब गिने-चुने रह गए हैं. लेकिन फिजिकल डिसेबिलिटी कोई मायने नहीं रखती. जब एक ब्यूरोक्रेट के तौर पर उनके काम की बात आती है तो यह सब माइंडसेट की बात है."

  • विकलांग परीक्षार्थी क्यों कर रहे हैं प्रदर्शन?

    विकलांग परीक्षार्थी क्यों कर रहे हैं प्रदर्शन?

    देश भर में चल रहे धरना प्रदर्शनों को आप देखेंगे तो लोकतंत्र की अलग तस्वीर दिखेगी. कई बार हम प्रदर्शनों को विपक्षी दलों के हिसाब से देखते हैं. जो लोग विपक्ष को खोज रहे हैं उन्हें इन प्रदर्शनों में जाना चाहिए ताकि पता चले कि विपक्ष के नेताओं के बगैर भी प्रदर्शन होते हैं. लोगों ने विपक्ष का रास्ता देखना भी बंद कर दिया है. इसे इस तरह से भी देखिए कि एक ज़माना था जब कोई नेता बनने के लिए इन प्रदर्शनों से जुड़ता था, इस्तेमाल करता था, मगर अब वो भी बंद हो गया है. लेकिन प्रदर्शन बंद नहीं हुए हैं. ज़्यादातर प्रदर्शनों का नतीजा भले ज़ीरो हो लेकिन सब अगले प्रदर्शन के लिए अपनी तरफ से एक नंबर छोड़ जाते हैं और यह सिलसिला चलता रहता है.

'Disabled Candidates' - 2 News Result(s)
  • 'पैदा होते ही डॉक्टरों ने कहा, मेरे दिन अब गिने-चुने', UPSC क्रैक करने वाले डिसेबल कैंडिडेट अब्दुल्ला की कहानी

    'पैदा होते ही डॉक्टरों ने कहा, मेरे दिन अब गिने-चुने', UPSC क्रैक करने वाले डिसेबल कैंडिडेट अब्दुल्ला की कहानी

    अफरीद ने कहा, "मैं एक फाइटर हूं, जब मैं पैदा हुआ, तो डॉक्टरों ने मेरे माता-पिता से कहा कि मेरे दिन अब गिने-चुने रह गए हैं. लेकिन फिजिकल डिसेबिलिटी कोई मायने नहीं रखती. जब एक ब्यूरोक्रेट के तौर पर उनके काम की बात आती है तो यह सब माइंडसेट की बात है."

  • विकलांग परीक्षार्थी क्यों कर रहे हैं प्रदर्शन?

    विकलांग परीक्षार्थी क्यों कर रहे हैं प्रदर्शन?

    देश भर में चल रहे धरना प्रदर्शनों को आप देखेंगे तो लोकतंत्र की अलग तस्वीर दिखेगी. कई बार हम प्रदर्शनों को विपक्षी दलों के हिसाब से देखते हैं. जो लोग विपक्ष को खोज रहे हैं उन्हें इन प्रदर्शनों में जाना चाहिए ताकि पता चले कि विपक्ष के नेताओं के बगैर भी प्रदर्शन होते हैं. लोगों ने विपक्ष का रास्ता देखना भी बंद कर दिया है. इसे इस तरह से भी देखिए कि एक ज़माना था जब कोई नेता बनने के लिए इन प्रदर्शनों से जुड़ता था, इस्तेमाल करता था, मगर अब वो भी बंद हो गया है. लेकिन प्रदर्शन बंद नहीं हुए हैं. ज़्यादातर प्रदर्शनों का नतीजा भले ज़ीरो हो लेकिन सब अगले प्रदर्शन के लिए अपनी तरफ से एक नंबर छोड़ जाते हैं और यह सिलसिला चलता रहता है.