UPSC Sucess Story: यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन (UPSC) सिविल सर्विसेज एग्जाम को 25 साल के अब्दुल्ला अफरीद ने पहले की प्रयास में पास कर लिया है. अब्दुल्ला अफरीद के लिए ये परीक्षा पास करना इतना आसान नहीं था. अफरीद एक मल्टीपल डिफरेंटली-एबल्ड कैंडिडेट हैं. अफरीद को चलने-फिरने में दिक्कत है और नजर भी कम आता है. लेकिन इतनी मुश्किलों के बाद भी अफरीद ने सिविल सर्विसेज एग्जाम 2025 को पास करके दिखाया है. ऑल इंडिया रैंक (AIR) 942 हासिल की है. अपनी इस कामयाबी पर कोयंबटूर के रहने वाले अब्दुल्ला अफरीद कहते हैं, उन्हें हमेशा यकीन था कि वह यह कर सकते हैं.
NDTV से बात करते हुए अब्दुल्ला अफरीद ने कहा, "मुझे उम्मीद थी कि मैं अपनी पहली कोशिश में ही UPSC पास कर लूंगा. जो लगातार तैयारी और हिम्मत से हुआ है. साथ ही अब्दुल्ला अफरीद ने ये भी बताया की किस प्लानिंग के साथ उन्होंने इस कठिन एग्जाम को पास किया है. अब्दुल्ला अफरीद ने कहा प्रीलिम्स एग्ज़ाम की तैयारी के लिए दिन में लगभग 9 घंटे पढ़ाई की और मेन्स के लिए इसे बढ़ाकर लगभग 14 घंटे कर दिया.
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अपनी कम नजर की वजह से, वह ज़्यादातर ऑडियो मटीरियल पर निर्भर थे. उन्होंने कहा, "मैंने बहुत सारा स्टडी मटीरियल सुना." अफरीद के पिता, अब्दुल्ला अज़ीम, जो कि ज्वेलरी बनाने का काम करते हैं. उन्होंने अपने बेटे की इस कामयाबी पर खुशी जाहिर की. अब्दुल्ला अफरीद के पिता ने कहा , मैं बेटे की पढ़ाई में मदद करता था. जब भी उसे मदद की ज़रूरत होती थी, मैं उसे पढ़कर सुनाता था."
अफरीद ने कहा " समाज ने मुझे बड़ा होने में मदद की है. मैं सिविल सर्विसेज के ज़रिए उसे वापस देना चाहतां हूं." उनकी तैयारी को कोयंबटूर में मक्का मस्जिद के IKLAS सेंटर से सपोर्ट मिला, जो माइनॉरिटी कम्युनिटी के कैंडिडेट्स को सिविल सर्विसेज़ के लिए ट्रेनिंग देता है. इंस्टीट्यूट ने पूरे प्रोसेस में - प्रीलिम्स से लेकर इंटरव्यू स्टेज तक - फाइनेंशियल और एकेडमिक सपोर्ट भी दिया.
"मैं एक फाइटर हूं"
अफरीद ने कहा, "मैं एक फाइटर हूं, जब मैं पैदा हुआ, तो डॉक्टरों ने मेरे माता-पिता से कहा कि मेरे दिन अब गिने-चुने रह गए हैं. लेकिन फिजिकल डिसेबिलिटी कोई मायने नहीं रखती. जब एक ब्यूरोक्रेट के तौर पर उनके काम की बात आती है तो यह सब माइंडसेट की बात है."
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