Delhi Cylinder Prices Rise
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कॉमर्शियल सिलेंडर के बढ़े दाम, दिल्ली में 42 रुपये, कोलकाता में 53 रुपये 50 पैसे
- Monday June 1, 2026
- Reported by: रवीश रंजन शुक्ला
दिल्ली में कॉमर्शियल सिलेंडर के दाम फिर से बढ़ गए हैं. इसके अलावा कोलकाता में भी कीमतों में बढ़ोतरी की गई है. सरकार लगातार सिलेंडर की कालाबाजारी करने वालों पर सख्ती भी कर रही है.
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ndtv.in
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'इतना सन्नाटा क्यों हैं' महंगाई से लेकर किसानों के मुद्दों तक मोदी सरकार पर जमकर बरसीं उर्मिला मातोंडकर
- Monday March 1, 2021
- Reported by: NDTV, Written by: सिद्धार्थ चौरसिया
शिवसेना नेता ने पीएम मोदी के मन की बात पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि, ‘आत्मनिर्भर भारत’ सुनने में कितना सुंदर लगता है? कहीं ये ‘आत्मनिर्भर भारत’ सिर्फ जुमला बनकर तो नहीं रह जाएगा? इसकी चिंता मुझे आम नागरिक के तौर पर सबसे ज्यादा होती है. क्योंकि जो मां-बाप अपने जीवन की सारी कमाई से बच्चों को पढ़ाते लिखाते हैं. आज उनके बच्चे ग्रेजुएशन, पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्रियां लेकर नौकरियों के लिए खड़े हैं, लेकिन उन्हें नौकरियां नहीं मिल रही हैं, तो आत्मनिर्भर बनने में सरकार की कुछ तो जिम्मेदारी बनती है? अगर सरकार जॉब की बात और किसानों की बात पर नहीं आती है तो यह किस तरह की ‘मन की बात’ है?”
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कॉमर्शियल सिलेंडर के बढ़े दाम, दिल्ली में 42 रुपये, कोलकाता में 53 रुपये 50 पैसे
- Monday June 1, 2026
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दिल्ली में कॉमर्शियल सिलेंडर के दाम फिर से बढ़ गए हैं. इसके अलावा कोलकाता में भी कीमतों में बढ़ोतरी की गई है. सरकार लगातार सिलेंडर की कालाबाजारी करने वालों पर सख्ती भी कर रही है.
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'इतना सन्नाटा क्यों हैं' महंगाई से लेकर किसानों के मुद्दों तक मोदी सरकार पर जमकर बरसीं उर्मिला मातोंडकर
- Monday March 1, 2021
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शिवसेना नेता ने पीएम मोदी के मन की बात पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि, ‘आत्मनिर्भर भारत’ सुनने में कितना सुंदर लगता है? कहीं ये ‘आत्मनिर्भर भारत’ सिर्फ जुमला बनकर तो नहीं रह जाएगा? इसकी चिंता मुझे आम नागरिक के तौर पर सबसे ज्यादा होती है. क्योंकि जो मां-बाप अपने जीवन की सारी कमाई से बच्चों को पढ़ाते लिखाते हैं. आज उनके बच्चे ग्रेजुएशन, पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्रियां लेकर नौकरियों के लिए खड़े हैं, लेकिन उन्हें नौकरियां नहीं मिल रही हैं, तो आत्मनिर्भर बनने में सरकार की कुछ तो जिम्मेदारी बनती है? अगर सरकार जॉब की बात और किसानों की बात पर नहीं आती है तो यह किस तरह की ‘मन की बात’ है?”
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