Anti Sikh Violence
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सिख विरोधी दंगा: जनकपुरी विकासपुरी हिंसा मामले में सज्जन कुमार बरी, 3 सिखों की हत्या का केस था
- Thursday January 22, 2026
- Reported by: आशीष भार्गव, Edited by: अमरीश कुमार त्रिवेदी
सिख विरोधी दंगों से जुड़े जनकपुरी और विकासपुरी हिंसा के मामलों में सज्जन कुमार को बरी कर दिया गया है. दिल्ली पुलिस ने 1984 के दंगों के मामले में एफआईआर दर्ज की थी.
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1984 का सिख दंगाः कौन था वो शख्स, जिसने 'बांध' दिए थे राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह के हाथ, बोले- मैं मजबूर हूं
- Tuesday December 18, 2018
- Written by: नवनीत मिश्र
1984 के सिख दंगे में कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को उम्रकैद की सजा हुई है. दंगे के वक्त राष्ट्रपति की कुर्सी पर भी एक सिख ज्ञानी जैल सिंह ही बैठे थे. जानिए, उन्होंने दंगा रोकने में खुद को क्यों असहाय पाया था ?
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कौन हैं सज्जन कुमार, जिन्हें 1984 के सिख विरोधी दंगों के मामले में मिली उम्रकैद की सजा, 10 खास बातें
- Monday December 17, 2018
- ख़बर न्यूज़ डेस्क
1984 के सिख विरोधी दंगों के एक मामले में दिल्ली हाईकोर्ट की डबल बेंच ने निचली अदालत के फैसले को पलटते हुए कांग्रेस नेता सज्जन कुमार (Sajjan Kumar) को दोषी करार दिया है. सज्जन कुमार को उम्रकैद की सजा और पांच लाख रुपए का जुर्माना लगाया है. निचली अदालत ने सज्जन कुमार को बरी कर दिया था. फैसला जस्टिस एस. मुरलीधर और विनोद गोयल ने सुनाया है. सज्जन कुमार (Sajjan Kumar) को हत्या, साजिश, दंगा भड़काने और भड़काऊ भाषण देने का दोषी पाया गया. कुमार को 31 दिसंबर तक सरेंडर करना होगा और तब तक वह दिल्ली नहीं छोड़ सकते. सज्जन कुमार के अलावा नेवी के रिटायर्ड अधिकरी कैप्टन भागमल, पूर्व कांग्रेस पार्षद बलवान खोकर और गिरधारी लाल को भी दोषी करार दिया है. इन तीनों को निचली अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई थी. इनके अलावा पूर्व विधायक महेंद्र यादव और किशन खोकर को भी दोषी करार पाया गया, जिन्हें निचली अदालत ने तीन साल की सजा सुनाई थी. अब हाईकोर्ट ने सज्जन कुमार (Sajjan Kumar) के अलावा कैप्टन भागमल, गिरधारी लाल तथा पूर्व कांग्रेस पार्षद बलवान खोखर को भी उम्रकैद की सजा सुनाई है. आइये आपको बताते हैं सज्जन कुमार से जुड़ी खास बातें.
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1984 का सिख दंगाः हत्यारों से भरी ट्रेन पहुंची थी दिल्ली, किसी को काटा, किसी को जिंदा जलाया
- Tuesday December 18, 2018
- Written by: नवनीत मिश्र
1984 के सिख विरोधी दंगों(1984 anti sikh riots) में हाथ होने पर कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई है. जानिए इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हुए सिख दंगे की कहानी.
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1984 सिख विरोधी हिंसा के 186 बंद मामलों की जांच के लिए SC पहुंचा याचिकाकर्ता
- Thursday July 12, 2018
- Reported by: आशीष भार्गव
9 जनवरी को 186 बंद मामलों की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एक नई SIT का गठन किया था. सुपरवाइजरी पैनल की रिपोर्ट में कहा गया था कि 239 मामलों में से 186 को बिना जांच बंद किया गया.
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सिख विरोधी हिंसा के मामलों की निगरानी करेगा सुप्रीम कोर्ट, जांच करेगी एसआईटी
- Thursday January 11, 2018
- Reported by: आशीष भार्गव, Edited by: सूर्यकांत पाठक
साल 1984 की सिख विरोधी हिंसा के मामलों की अब सुप्रीम कोर्ट निगरानी करेगा. कुल 186 बंद मामलों की फिर से जांच होगी. इसके लिए गठित नई एसआईटी में दिल्ली हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस एसएन ढींगरा, रिटायर्ड आईपीएस राजदीप सिंह और वर्तमान आईपीएम अभिषेक दुलार होंगे.
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1984 सिख विरोधी हिंसा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से 199 केसों की फाइलें तलब कीं
- Friday March 24, 2017
- Reported by: आशीष कुमार भार्गव, Edited by: वंदना वर्मा
1984 में हुई सिख विरोधी हिंसा के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से 199 केसों की फाइल तलब की हैं. केंद्र को तीन हफ्ते में केसों की फाइल कोर्ट में देने को कहा गया है. ये वे केस हैं, जिनमें SIT ने केस की जांच बंद कर दी थी. अगली सुनवाई 25 अप्रैल को होगी.
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सिख विरोधी दंगा: जनकपुरी विकासपुरी हिंसा मामले में सज्जन कुमार बरी, 3 सिखों की हत्या का केस था
- Thursday January 22, 2026
- Reported by: आशीष भार्गव, Edited by: अमरीश कुमार त्रिवेदी
सिख विरोधी दंगों से जुड़े जनकपुरी और विकासपुरी हिंसा के मामलों में सज्जन कुमार को बरी कर दिया गया है. दिल्ली पुलिस ने 1984 के दंगों के मामले में एफआईआर दर्ज की थी.
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1984 का सिख दंगाः कौन था वो शख्स, जिसने 'बांध' दिए थे राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह के हाथ, बोले- मैं मजबूर हूं
- Tuesday December 18, 2018
- Written by: नवनीत मिश्र
1984 के सिख दंगे में कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को उम्रकैद की सजा हुई है. दंगे के वक्त राष्ट्रपति की कुर्सी पर भी एक सिख ज्ञानी जैल सिंह ही बैठे थे. जानिए, उन्होंने दंगा रोकने में खुद को क्यों असहाय पाया था ?
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कौन हैं सज्जन कुमार, जिन्हें 1984 के सिख विरोधी दंगों के मामले में मिली उम्रकैद की सजा, 10 खास बातें
- Monday December 17, 2018
- ख़बर न्यूज़ डेस्क
1984 के सिख विरोधी दंगों के एक मामले में दिल्ली हाईकोर्ट की डबल बेंच ने निचली अदालत के फैसले को पलटते हुए कांग्रेस नेता सज्जन कुमार (Sajjan Kumar) को दोषी करार दिया है. सज्जन कुमार को उम्रकैद की सजा और पांच लाख रुपए का जुर्माना लगाया है. निचली अदालत ने सज्जन कुमार को बरी कर दिया था. फैसला जस्टिस एस. मुरलीधर और विनोद गोयल ने सुनाया है. सज्जन कुमार (Sajjan Kumar) को हत्या, साजिश, दंगा भड़काने और भड़काऊ भाषण देने का दोषी पाया गया. कुमार को 31 दिसंबर तक सरेंडर करना होगा और तब तक वह दिल्ली नहीं छोड़ सकते. सज्जन कुमार के अलावा नेवी के रिटायर्ड अधिकरी कैप्टन भागमल, पूर्व कांग्रेस पार्षद बलवान खोकर और गिरधारी लाल को भी दोषी करार दिया है. इन तीनों को निचली अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई थी. इनके अलावा पूर्व विधायक महेंद्र यादव और किशन खोकर को भी दोषी करार पाया गया, जिन्हें निचली अदालत ने तीन साल की सजा सुनाई थी. अब हाईकोर्ट ने सज्जन कुमार (Sajjan Kumar) के अलावा कैप्टन भागमल, गिरधारी लाल तथा पूर्व कांग्रेस पार्षद बलवान खोखर को भी उम्रकैद की सजा सुनाई है. आइये आपको बताते हैं सज्जन कुमार से जुड़ी खास बातें.
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1984 का सिख दंगाः हत्यारों से भरी ट्रेन पहुंची थी दिल्ली, किसी को काटा, किसी को जिंदा जलाया
- Tuesday December 18, 2018
- Written by: नवनीत मिश्र
1984 के सिख विरोधी दंगों(1984 anti sikh riots) में हाथ होने पर कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई है. जानिए इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हुए सिख दंगे की कहानी.
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1984 सिख विरोधी हिंसा के 186 बंद मामलों की जांच के लिए SC पहुंचा याचिकाकर्ता
- Thursday July 12, 2018
- Reported by: आशीष भार्गव
9 जनवरी को 186 बंद मामलों की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एक नई SIT का गठन किया था. सुपरवाइजरी पैनल की रिपोर्ट में कहा गया था कि 239 मामलों में से 186 को बिना जांच बंद किया गया.
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सिख विरोधी हिंसा के मामलों की निगरानी करेगा सुप्रीम कोर्ट, जांच करेगी एसआईटी
- Thursday January 11, 2018
- Reported by: आशीष भार्गव, Edited by: सूर्यकांत पाठक
साल 1984 की सिख विरोधी हिंसा के मामलों की अब सुप्रीम कोर्ट निगरानी करेगा. कुल 186 बंद मामलों की फिर से जांच होगी. इसके लिए गठित नई एसआईटी में दिल्ली हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस एसएन ढींगरा, रिटायर्ड आईपीएस राजदीप सिंह और वर्तमान आईपीएम अभिषेक दुलार होंगे.
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1984 सिख विरोधी हिंसा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से 199 केसों की फाइलें तलब कीं
- Friday March 24, 2017
- Reported by: आशीष कुमार भार्गव, Edited by: वंदना वर्मा
1984 में हुई सिख विरोधी हिंसा के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से 199 केसों की फाइल तलब की हैं. केंद्र को तीन हफ्ते में केसों की फाइल कोर्ट में देने को कहा गया है. ये वे केस हैं, जिनमें SIT ने केस की जांच बंद कर दी थी. अगली सुनवाई 25 अप्रैल को होगी.
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