Sri krishna janmashtmi song: भगवान श्रीकृष्ण के यूं तो कई रूप हैं- मैया यशोदा के सामने बाल-हठ करते माखनचोर, राधा संग बांसुरी की धुन पर रास रचाते छलिया. लेकिन इन सबसे परे कान्हा का एक रूप ऐसा भी है जो हर दिल के सबसे करीब है- एक सच्चे मित्र का रूप. जब-जब उनके सखाओं पर कोई मुसीबत आई, द्वारकाधीश सब छोड़कर दौड़े चले आए.
पौराणिक कथाओं से लेकर भारतीय टेलीविजन तक, श्रीकृष्ण की इसी मित्रता और लीलाओं को खूबसूरती से उकेरा गया है. साल 1993 में जब रामानंद सागर का धारावाहिक 'श्री कृष्णा' ( Sri Krishna) छोटे पर्दे पर आया, तो उसने हर घर को वृंदावन बना दिया. इस सीरियल का एक प्रसंग ऐसा था जिसने दर्शकों को भक्ति के अनोखे समंदर में डुबो दिया जो कालिया नाग मर्दन का सीन थी. जिसपर फिल्माया गाना 'कलिया के फन पर नाचत कन्हैया' (Dekho Kaliya Ke Fan Par Nachat Kanhaiya), आज भी श्रोताओं के जहन में बसा हुआ है.
रवींद्र जैन का संगीत और मोहम्मद अजीज की आवाज का जादू
इस घटना की कहानी को श्री कृष्णा में एक ऐसे भजन के जरिए सुनाई गई, जिसके बोल सुनते ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं. बोल है 'देखो कालिया के फन पर नाचत कन्हैया'. इस गीत को अपने शब्दों की जादूगरी से संवारने का काम भारतीय संगीत जगत के संगीतकार रवींद्र जैन किया था. उन्होंने न सिर्फ इस गीत के बोल लिखे, बल्कि इसकी भक्तिमयी धुन भी तैयार की. उन्होंने इसकी भाषा को इतना सरल और सहज रखा कि इसे सुनते ही दर्शक खुद को यमुना के तट पर खड़ा महसूस करने लगते थे.
मोहम्मद अजीज की आवाज से बना अमर
अपनी भारी और भावपूर्ण गायकी के लिए मशहूर गायक मोहम्मद अजीज ने इस भजन में ऐसी रूह फूंक दी कि यह सीधे आत्मा को छू जाता है.
2007 में डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर किया था रिलीज
यह प्रसंग 1993 में टीवी पर रामानंद सागर के सीरीयल श्रीकृष्णा में प्रसारित हुआ था, लेकिन ऑडियो ट्रैक के रूप में इसे 2007 में डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर रिलीज किया गया.लेकिन 32 साल बाद भी इसकी खनक आज भी वैसी है जैसी 1993 में थी. जब जन्माष्टमी का त्यौहार आता है, तो गलियों और मंदिरों में मोहम्मद अजीज की आवाज में गूंजता यह भजन टॉप चार्ट्स में अपनी जगह बना लेता है.
यहां सुने गाना कालिया के फन पप नाचत कन्हैया
कब फिल्माया गया था ये गाना
कथा के अनुसार, कालिया नाग के भयंकर विष की वजह से गोकुल की यमुना का पानी जहरीला हो चुका था. जहरीले पानी की वजह से कई पशु-पक्षी मर रहे थे और गोकुलवासी खौफ में थे. तब नन्हे कन्हा ने अपने ग्वाल-बालों और यमुना नदी को इस आतंक से मुक्त कराने की ठानी. उन्होंने एक लीला रची.
अपने सखाओं के साथ गेंद खेलते-खेलते कान्हा ने जानबूझकर गेंद को यमुना के जहरीले पानी में फेंक दिया. और गेंद निकालने के बहाने जहरीले पानी में छलांग लगा दी. जिसके बाद भगवान ने कालिया नाग के भारी-भरकम फनों को अपने नन्हे चरणों तले रौंद डाला और कालिया के अहंकार को चकनाचूर करते हुए जब श्रीकृष्ण ने उसके विशाल फन पर नृत्य किया.
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