बॉम्बे हाई कोर्ट ने बुधवार (30 सितंबर) को टीवी एक्ट्रेस प्रत्युषा बनर्जी के 2016 के सुसाइड केस में एक्टर-प्रोड्यूसर राहुल राज सिंह को बरी कर दिया. यह फैसला राहुल के लिए एक बड़ी राहत की तरह आया है. बता दें कि राहुल पर प्रत्युषा को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप थे. जस्टिस शिवकुमार डिगे की बेंच ने 1 अप्रैल 2016 को प्रत्युषा की मौत से कुछ समय पहले हुई दोनों की आखिरी फोन पर बातचीत के रिकॉर्डिंग पर काफी भरोसा किया. कोर्ट ने पाया कि कॉल ट्रांसक्रिप्ट से पता चलता है कि राहुल, प्रत्युषा को कोई बड़ा कदम उठाने से रोकने की कोशिश कर रहे थे और उनसे कह रहे थे कि वह उनसे मिलने के लिए अपनी कार वापस मोड़ चुके हैं.
बातचीत से यह भी पता चला कि प्रत्युषा परेशान थीं और उन्होंने अपने हालात के बारे में कई लोगों से बातचीत की थी. इनमें उनके माता-पिता भी शामिल थे. 'बालिका वधू' में आनंदी का किरदार निभाने के लिए मशहूर प्रत्युषा अप्रैल 2016 में मुंबई स्थित अपने अपार्टमेंट में मृत पाई गई थीं. प्रत्युषा के माता-पिता ने राहुल राज सिंह पर (उनके साथ लिव-इन रिलेशनशिप में थे) आत्महत्या के लिए उकसाने, मारपीट करने और मानसिक व शारीरिक रूप से परेशान करने का आरोप लगाया था. राहुल ने निचली अदालत की कार्रवाई को चुनौती दी थी जिसके बाद बॉम्बे हाई कोर्ट का आज यह फैसला आया.
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राहुल की तरफ से पेश हुए वकील आबाद पोंडा और श्रेयांस मिठारे ने अपनी दलील में कहा, प्रत्युषा के साथ हुई आखिरी बातचीत से साफ होता है कि राहुल उन्हें कोई गलत कदम ना उठाने के लिए समझा रहे थे. राहुल ने कहा था कि वो अपनी गाड़ी घुमाकर उनसे मिलने आ रहे हैं. वहीं प्रत्युषा बातचीत में अपने पेरेंट्स समेत सभी लोगों को अपनी हालत के बारे में जिम्मेदार ठहरा रही थीं. इसी आखिरी बातचीत के आधार पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने साल 2016 में राहुल को अग्रिम जमानत भी दी थी.
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