AI अब डराने लगा है. आपके घर में लगा Smart TV, स्मार्ट फ्रिज या रोबोटिक वैक्यूम क्लीनर आने वाले समय में AI से जुड़े साइबर अटैक का हिस्सा बन सकता है. Anthropic ने चेतावनी दी है कि छोटे AI मॉडल इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) डिवाइस पर खुद की कॉपी बनाने में जल्द कैबेपल हो सकते हैं. ऐसा कुछ महीनों में ही सकता है. बताया जा रहा है कि अगर ऐसा होता है, तो AI को फैलने के लिए बड़े डेटा सेंटर पर डिपेंड रहने की जरूरत नहीं होगी. वह स्मार्ट ओवन जैसे छोटे डिवाइस पर भी चल सकता है.
Anthropic के मुताबिक, ऐसे AI सिस्टम को बंद करना मुश्किल हो सकता है. इनका कोई एक सेंट्रल कंट्रोल पॉइंट नहीं होगा. हालांकि, कंपनी ने ये भी कहा है कि इनकी संख्या बढ़ने की रफ्तार धीमी हो सकती है और इन्हें फैलने में कई दिन लग सकते हैं. अच्छी बात ये है कि अभी पूरी तरह से खुद की कॉपी बनाकर फैलने वाला AI सिस्टम सामने नहीं आया है. हालांकि, जिस हिसाब के टेक्नोलॉजी बढ़ रही है, उसके हिसाब से ऐसा होने में ज्यादा समय नहीं लगेगा.
क्या होता है खुद की कॉपी बनाने वाला AI?
आपको बता दें कि AI सेल्फ-रेप्लिकेटर ऐसा AI सिस्टम होता है, जो बिना किसी इंसानी मदद के अपनी कॉपी बना सकता है. अगर ऐसा सिस्टम इंटरनेट से जुड़े कई डिवाइस तक पहुंच जाए, तो वह एक डिवाइस से दूसरे डिवाइस तक फैल सकता है. Anthropic ने अपने ब्लॉग पोस्ट में इसे AI वर्म्स बताया है. जो खुद को फैलाने की क्षमता रखते हों. कंपनी के मुताबिक, अभी ऐसा कोई पूरी तरह डेवलप और अनकंट्रोल्ड सेल्फ-रेप्लिकेटर मौजूद नहीं है. हालांकि, AI एजेंट्स अब इस प्रोसेस के अलग-अलग स्टेप्स को पूरा करने में पहले से ज्यादा कैपेबल हो रहे हैं.
कंपनी ने चेतावनी दी है कि ट्रेडिशनल डेटा सेंटर के मुकाबले ऐसे नेटवर्क को बंद करना ज्यादा मुश्किल हो सकता है. इसकी वजह यह है कि AI की कॉपी अलग-अलग डिवाइस पर मौजूद हो सकती हैं और उन्हें एक ही जगह से कंट्रोल नहीं किया जा सकेगा.
Anthropic ने सस्ते Android TV बॉक्स पर किया टेस्ट
Anthropic ने अपने एक्सपेरिमेंट में वेट-बेस्ड रेप्लिकेटर पर फोकस किया. ये ऐसे संभावित ऑटोनॉमस वर्म्स हैं, जो कॉम्प्रोमाइज्ड हार्डवेयर पर सीधे AI मॉडल चलाते हैं. कंपनी ने चेक करने के लिए करीब 55 डॉलर यानी लगभग 5,200 रुपये कीमत वाले 15 सस्ते Android TV बॉक्स खरीदे. इन डिवाइस पर Gemma4-26B-A4B मॉडल चलाया गया, जिसकी स्पीड 0.39 टोकन प्रति सेकंड रही.
Anthropic के मुताबिक, 9 बिलियन पैरामीटर वाले एक मॉडल को टेस्ट किए गए नौ में से 8 तरह के हार्डवेयर पर चलाने में सफलता मिली. इस टेस्ट का मकसद ये समझना था कि लिमिटेड कैपिसिटी वाले डिवाइस पर भी AI मॉडल चलाने के लिए जरूरी तकनीकी सेटअप कितना संभव है. कंपनी ने बताया कि इस प्रोसेस में सबसे चैलेंजिंग कामों में से एक इन्फरेंस सेटअप है. इसके लिए हार्डवेयर और ऑपरेटिंग सिस्टम के हिसाब से सही पैकेज चुनने, उनके वर्जन तय करने और तकनीकी समस्याओं को ठीक करने जैसे कई स्टेप्स पूरे करने पड़ते हैं.
छोटे AI मॉडल भी कर पा रहे हैं कई जरूरी स्टेप्स
Anthropic के रिसर्चर्स के मुताबिक, छोटे AI मॉडल अभी पूरी रेप्लिकेशन प्रोसेस को शुरू से अंत तक सही तरीके से पूरा करने में गलतियां करते हैं. लेकिन 30 बिलियन पैरामीटर या उससे छोटे मॉडल इस प्रोसेस के कई अलग-अलग स्टेप्स पहले ही पूरे कर सकते हैं. कंपनी ने अपने ब्लॉग में दावा किया कि Zai के GLM-5.2 जैसे मॉडल पूरे प्रोसेस को शुरू से अंत तक पूरा करने में कैपेबल थे. Anthropic का अनुमान है कि अगर छोटे मॉडल इसी रफ्तार से बेहतर होते रहे, तो वे 2026 के अंत तक इस कैपिसिटी के स्तर तक पहुंच सकते हैं. इसके बाद छोटे वेट-बेस्ड रेप्लिकेटर संभव हो सकते हैं.
स्मार्ट फ्रिज से लेकर सिक्योरिटी कैमरे तक हो सकते हैं निशाने पर
Anthropic के मुताबिक, जिन AI मॉडल को एक डिवाइस पर चलाना संभव नहीं होगा, उन्हें कई मशीनों में बांटकर चलाया जा सकता है. इसके लिए मॉडल के अलग-अलग हिस्सों को कई डिवाइस पर रखा जा सकता है. इन डिवाइस में स्मार्ट फ्रिज, स्मार्ट ओवन, ऑटोमैटिक वैक्यूम क्लीनर, लॉनमूवर, सिक्योरिटी कैमरे और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग यूनिट शामिल हैं.
कंपनी की चिंता है कि ऐसे कई IoT डिवाइस इंटरनेट से जुड़े होते हैं और इनमें ट्रेडिशनल कंप्यूटरों की तुलना में लिमिटेड सिक्योरिटी प्रोटेक्शन हो सकता है. अगर इनकी सुरक्षा में कमी का फायदा उठाया जाए, तो छोटे AI मॉडल के लिए ऐसे डिवाइस पर चलने का रास्ता बन सकता है. हालांकि, इसका मतलब ये नहीं है कि हर स्मार्ट डिवाइस अपने आप AI चलाने लगेगा या सभी स्मार्ट टीवी और फ्रिज इस तरह के अटैक की चपेट में हैं.
AI वर्म्स से बचने के लिए IoT डिवाइस की सुरक्षा जरूरी
Anthropic ने कहा है कि स्मार्ट डिवाइस की सिक्योरिटी मजबूत करना जरूरी है, ताकि संभावित AI रेप्लिकेटर को एक डिवाइस से दूसरे डिवाइस तक फैलने से रोका जा सके. कंपनी के मुताबिक, सिस्टम को सेफ बनाने के साथ ऐसी स्थिति के लिए भी तैयारी करनी चाहिए, जिसमें इस तरह के खतरे मौजूद हों. आपको बता दें कि इससे पहले जुलाई में OpenAI और Hugging Face से जुड़े एक मामले में करीब 700 AI एजेंट्स के अमेरिकी कंपनी Hugging Face को हैक करने की कोशिश करने की रिपोर्ट सामने आई थी. हालांकि, वह मामला AI कंपनियों के सर्वर से जुड़ा था.
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